लोकसभा में मेनका गांधी ने आज पेश किया Anti trafficking बिल

नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने आज गुरुवार को लोकसभा में Anti trafficking बिल (मानव तस्करी-रोधी विधेयक) पेश किया, जिसमें मानव तस्करी की शिकार महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा और उनके पुनर्वास का प्रावधान है। महिला एवं बाल विकास मंत्री ने निचले सदन में चर्चा के लिए इस Anti trafficking विधेयक को पेश किया और इसे नया कदम बताया।

मानव तस्करी (बचाव, सुरक्षा एवं पुनर्वास) विधेयक में इस तरह के मामलों की जांच के लिए राष्ट्रीय मानव तस्करी-रोधी ब्यूरो के गठन का भी प्रावधान है।

मेनका ने कहा, “मानव तस्करी सीमारहित अपराध है। कुछ चुनिंदा अपराधों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। जब महिलाओं और बच्चों को सोने की तरह बेचा जाता हो तो हम चुप कैसे रह सकते हैं।”

उन्होंने कहा, “इस अपराध से वर्षो से पीड़ित लाखों लोगों को सुरक्षा दिलाने के लिए आइए आज इस विधेयक को वास्तविकता बनाएं।”

मेनका ने सांसदों से इस विधेयक को पारित करने का आग्रह करते हुए कहा, “हम सभी पीड़ितों, विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों की तस्करी के लिए जिम्मेदार हैं। आज हमारे पास एक मौका है, जिससे हम उन्हें उनके अधिकारों की गारंटी दे सकते हैं और यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि अपराधियों पर कार्रवाई होगी।”

बंधुआ मजदूरी, सरोगेसी, बाल मजदूरी और बच्चों के अधिकारों के लिए ये बिल काफी अहम है. जहां ये बिल बाकी लोगों के लिए फायदेमंद हैं वहीं सेक्स वर्कर्स के लिए ये एक बड़ी समस्या लेकर आ सकता है। इस बिल का असर उनके काम पर भी पड़ सकता है।

क्‍या है इस Anti trafficking बिल में

दरअसल इस बिल में लिखा है कि तस्करी कर लाए लोगों में से कोई एड्स फैलाएगा तो उस पर भी ये क़ानून लागू होगा। साफ है कि इशारा सेक्स वर्कर्स की तरफ है, वरना मानव तस्करी के कानून में एड्स शब्द क्यों डाला जाएगा।

मानव तस्करी के मामलों की जांच के लिए इस बिल के जरिए एक राष्ट्रीय एंटी-ट्रैफिकिंग ब्यूरो की स्थापना का प्रस्ताव लोकसभा में रखा गया है। व्यक्तियों की तस्करी (रोकथाम, सुरक्षा और पुनर्वास) बिल, 2018 में तस्करी के हर पहलु को परिभाषित किया गया है।

तस्करी के नए कानून के अनुसार इसमें जबरन मज़दूरी, भीख मांगना, समय से पहले जवान करने के लिए किसी व्यक्ति को इंजेक्शन या हॉर्मोन देना, विवाह या विवाह के लिए छल या विवाह के बाद महिलाओं और बच्चों की तस्करी शामिल है।

Anti trafficking विधेयक के तहत हर राज्य सरकार एक स्टेट नोडल अधिकारी की नियुक्ति करेगा। जिला स्तर पर मानव तस्करी-रोधी इकाइयों (एटीयू) का गठन होगा और राष्ट्रीय, राज्य व जिला स्तरों पर मानव तस्करी-रोधी राहत एवं पुनर्वास समितिय का गठन होगा। इसके बाद केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा सुरक्षा आवास भी स्थापित किए जाएंगे।
-एजेंसी

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