सुप्रीम कोर्ट में लंबित याचिका की दलील यूके में इस्‍तेमाल नहीं कर सकेगा माल्‍या

नई दिल्‍ली। लंदन में रह रहे भगोड़े कारोबारी विजय माल्या को आज सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विजय माल्या अपनी याचिका के लंबित रहने की दलील का इस्तेमाल यूके में नहीं कर सकते हैं।
सर्वोच्च अदालत ने कहा कि माल्या के बकाए का भुगतान करने के लिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की यूके में शुरू की गई इन्सॉल्वेंसी की कार्यवाही को रोकने के लिए इसे तर्क के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट में सरकारी बैंकों ने रखा पक्ष
इस मामले पर अगली सुनवाई शुक्रवार तक टाल दी गई है। सरकारी बैंकों ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उसके पास लंबित एक पुरानी याचिका को आधार बना विजय माल्या यूके की कोर्ट में दिवालिया कार्यवाही पर रोक में सफल रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया, ‘हमारे पास लंबित किसी याचिका के आधार पर माल्या दुनिया की किसी कोर्ट में अपने खिलाफ कार्यवाही पर रोक की मांग नहीं कर सकता है।’
कोर्ट ने दी माल्या की संपत्ति जब्त करने की अनुमति
बता दें कि पिछले सप्ताह ही मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रही एक विशेष अदालत ने बैंकों को मंजूरी दी है कि वे विजय माल्या की संपत्तियों को नीलाम कर सकती हैं। यह मंजूरी विजय माल्या की जब्त की गई संपत्तियों के लिए दी गई है। बता दें कि कारोबारी विजय माल्या पर बैंकों का 11,000 करोड़ रुपये से ज्यादा कर्ज है और उसे देश से आर्थिक भगोड़ा घोषित किया जा चुका है।
लंदन में जमानत पर बाहर है माल्या
विजय माल्या पर बैंकों से धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है। फिलहाल वह यूके की हाई कोर्ट से मिली जमानत पर रिहा है। पिछले साल पीएमएलए कोर्ट ने विजय माल्या को आर्थिक भगोड़ा घोषित किया था।
पीएमएलए ऐक्ट के मुताबिक कुछ मामलों में ट्रायल के दौरान भी प्रॉपर्टी का हक लौटाया जा सकता है। बैंकों ने विजय माल्या को जो पैसे लोन के रूप में दिए हैं, वह करीब 6,203.55 करोड़ रुपये है। अब बैंकों को 2013 से 11.5 पर्सेंट ब्याज जोड़कर ये पैसे वसूलने हैं।
-एजेंसियां

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