श्रीकृष्ण-जन्मस्थान पर धूमधाम से मनायी गयी मालवीय जयन्ती

मथुरा। हिन्दी, हिन्दू और हिन्दुस्तान विचारधारा के ध्वजवाहक पं. महामना मदन मोहन मालवीय जी की जयन्ती भारतीय पंचाग के अनुसार पौष कृष्ण अष्टमी बुधवार को दोपहर में श्रीकृष्ण-जन्मभूमि स्थित भागवत-भवन में उनकी मानवाकार प्रतिमा का परंपरागत पूजन कर धूमधाम के साथ मनायी गयी।

कार्यक्रम के आरंभ में पुजारियों द्वारा स्वस्ति वाचन व पंचोपचार पूजन कराये जाने के उपरान्त श्रीकृष्ण-जन्मस्थान सेवा-संस्थान की प्रबंध समिति के सदस्य श्री गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी द्वारा प्रतिमा का माल्यार्पण कर उत्तरीय धारण कराया गया।

श्री चतुर्वेदी ने कहा कि राष्ट्रभाषा हिन्दी और देवनागरी के प्रति महामना मालवीय जी का अटूट प्रेम था ही, वे एक दूरदर्षी श‍िक्षाशास्त्री व महान गौभक्त भी थे। महामना मालवीय जी के ही प्रयासों से उस समय न्यायालयों में प्रचलित फारसी व अंग्रेजी के साथ देवनागरी लिपि को मान्यता मिल सकी थी, हिन्दू जन जागरण के अग्रणी नायक के रूप में उनका नाम सदैव स्मरण किया जाता रहेगा, हिन्दू समाज की जाति, वर्ण संबंधी रूढ़ियों पर प्रहार करते हुये उन्होंने दलित वर्ग को मंत्र दीक्षा देने का ऐतिहासिक कार्य किया था, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना कर उन्होंने विद्यालय में दलित छात्रों को निःशुल्क श‍िक्षा की व्यवस्था की थी, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय उस समय का पहला पूर्णतः आवासीय विश्वविद्यालय था। योगिराज भगवान श्रीकृष्ण की पुण्य जन्मस्थली के अन्तिम मंदिर का 1669 ई0 में औरंगजेब द्वारा ध्वस्तीकरण किये जाने के उपरान्त इसके पुनरुद्धार की पहल भी 1940 ई0 में उनके मथुरा प्रवास के समय ही हो सकी, जिसका परिणाम आज हमारे समक्ष श्रीकृष्ण-जन्मभूमि पर निर्मित उन्नत मस्तक किये खड़े भागवत-भवन सहित अन्य मन्दिरों के रूप में विद्यमान है।

पूजन कार्यक्रम के उपरान्त संस्थान द्वारा प्रसादी-भण्डारे का आयोजन भी किया गया था। इस अवसर पर संस्थान के सं0 मुख्य अधिषाशी राजीव श्रीवास्तव, गिर्राज शरण गौतम, विजयबहादुर सिंह, नारायन राय, अनुराग पाठक एवं पूजाचार्यगण आदि सहित संस्थान के अन्य कर्मचारियों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही ।

– Legend News

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