केडी हास्पीटल में ही चेस्ट surgery कराकर बचें महंगे इलाज से

मल्टी स्पेशियेलिटी केडी हास्पीटल की टीबी एंड जनरल surgery में सेवा देने आईं बैंगलूरु से मास्टर इन सर्जरी डा. रंजीता बोल,

डा. रंजीता बोल को फेफडों के कैंसर की surgery में हासिल है महारत 
मथुरा। क्या आपको किसी चिकित्सक ने टीबी रोग की सर्जरी कराने को बोला है! क्या आपको फेफडों के कैंसर का सर्जरी के माध्यम से इलाज कराने की सलाह दी गई है! यदि आपको छाती की कोई भी समस्या जैसे दर्द, खांसी, बलगम में खून आना और श्वांस जैसी कोई गंभीर बीमारी है। तो परेशान न हो, दिल्ली या आगरा भी न जाएं। आपको सिर्फ मल्टी स्पेशियेलिटी केडी हास्पीटल की जनरल सर्जन यूनिट में मौजूद चेस्ट सर्जरी स्पेशिलिस्ट डा. रंजीता को अपनी समस्या बताने की जरुरत है। बैंगलूरु से सर्जरी में मास्टर इन सर्जरी डा. रंजीता आपकी चेस्ट सर्जरी की हर समस्या का समाधान करने को तत्पर हैं। अब उनके पास वक्ष एवं क्षय रोग से पीडित महिला मरीजों की संख्या भी काफी बढती जा रही है।

एक-दो सप्ताह से ज्यादा पुरानी खांसी बुखार, बलगम का आना, वजन का कम होते जाना, छाती में दर्द होना, छाती के उपरी हिस्से में गांठें पाई जाना क्षय रोग के हैं प्रमुख लक्षण
मल्टी स्पेशियेलिटी केडी हास्पीटल की जनरल सर्जरी की ओपीडी में मौजूद डा. रंजीता ने विशेष मुलाकात में बताया कि एक-दो सप्ताह से ज्यादा पुरानी खांसी बुखार व बलगम का आना, वजन का कम होते जाना, साथ ही वजन का नहीं बढना, छाती में दर्द होना, छाती के उपरी हिस्से में गांठें पाई जाना क्षय रोग होने के प्रमुख लक्षण हैं। ऐसे मरीजों को रोग को गंभीरता से लेना चाहिए। देर करने पर इलाज करना मुश्किल भरा होता चला जाता है। उन्होंने बताया कि धूम्रपान करने वाले लोगों की छाती यानी कि फेफडों में हवा भर जाती है। इस बीमारी को न्यूमोथारेक्स कहते हैं। इस बीमारी में श्वांस लेने तक में परेशानी होती है। बार-बार खांसी जुकाम व खून का आना ब्रोकिंटस के लक्षण हो सकते हैं। कई बार छाती में एस्पिरजिनोमा नामक कवक घर बना लेता है। जो काफी परेशानी पैदा करता है। उन्होंने बताया कि टीबी या निमोनिया होने पर मरीज को टयूब लगाई जाती है। जिसकी बाद में कम जरुरत रह जाती है। कई बार तो ये टयूब मरीज के लिए परेशानी का कारणा बनने लगती है। इसके बारे में भी सलाह लें, हो सकता है कि टयूब को निकाल देने से परेशानी से निजात मिल जाए।

छाती की नोडूयल यानी कि गांठें हो सकती हैं कैंसर -डा. रंजीता
मथुरा। दिल्ली स्थित एमबीई से स्पेशिलाइजेशन इन चेस्ट सर्जरी करके केडी हास्पीटल में आईं डा. रंजीता ने बताया कि फेफडों में अगर नोडूयल यानी कि गांठें हैं तो कैंसर भी हो सकता है। इसे शुरुआती अवस्था में ही खोज कर आसानी से आॅपरेशन किया जा सकता है। इसका साइज बढने के साथ ये आॅपरेशन के लाइक भी नहीं रहती है। इसी से ब्रजवासी महिलाएं अपनी वक्ष संबंधी समस्याओं को बेझिझक मुझ महिला चिकित्सक बता सकती हंै।

चेस्ट surgery के लिए अब दिल्ली जाने की जरुरत नहीं-डा. रामकिशोर अग्रवाल
मथुरा। आरके एजुकेशन हब के चैयरमेन डा राम किशोर अग्रवाल, वाइस चैयरमेन पंकज अग्रवाल और एमडी मनोज अग्रवाल ने कहा कि मल्टी स्पेशियेलिटी केडी हास्पीटल में वक्ष का सर्जन होने से लोगों को दिल्ली या आगरा जाने की आवश्यकता नहीं होगी। उनका आॅपरेशन अब केडी हास्पीटल की ओटी में ही हो सकेगा। ब्रज क्षेत्र के प्रमुख हास्पीटल केडी में हर क्षेत्र के विशेषज्ञ चिकित्सक मौजूद होने से मरीज के एक बार आने के बाद ठीक होने के बाद ही चिकित्सालय से जाने की जरुरत पडती है। इसके पीछे वजह ये है कि एक ही कैम्पस में विशेषज्ञ चिकित्सक होने से तुरंत रेफरेंस की सुविधा मिल जाती है। इससे मरीज के स्वस्थ होने की काफी संभावना बढ जाती है।

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