महाराष्ट्र: उद्धव ठाकरे ने बुलाई सहयोगी दलों की बैठक

मुंबई। कोरोना महामारी से जूझ रहे महाराष्ट्र में सियासी हलचल फिर शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने अपने आधिकारिक निवास वर्षा में महाअघाड़ी सहयोगियों की बैठक बुलाई है। इस मीटिंग पर हर किसी की नजर जा टिकी है। ताबड़तोड़ बैठकें और सियासी दिग्गजों की हालिया मुलाकात से हर किसी के जेहन में यही सवाल उठ रहा है कि क्या एक बार फिर से उद्धव ठाकरे की सीएम की कुर्सी पर खतरा मंडरा रहा है, क्या एक बार फिर एनसीपी चीफ शरद पवार चौंकाएंगे, क्या राहुल गांधी की चुप्पी उद्धव ठाकरे पर भारी पड़ेगी?
ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब और महाराष्ट्र सियासी हलचल के बीच आज सुबह 11.20 बजे एनसीपी चीफ शरद पवार ने एक टीवी चैनल से बातचीत में कहा, बीजेपी और देवेद्र फड़णवीस इस वक्त सरकार को गिराने की कोशिश में लगे हुए हैं। फड़णवीस अपना धैर्य खो रहे हैं लेकिन महाअघाड़ी सरकार को अभी कोई खतरा नहीं है। सभी विधायक हमारे साथ हैं। इस समय विधायकों को तोड़ने की कोशिश हुई तो पब्लिक पिटाई भी करेगी।
इससे पहले 11.00 बजे महाराष्ट्र विधानसभा के स्पीकर और कांग्रेस नेता नाना पटोले ने राज्य में किसी भी राजनीतिक उठापटक की संभावना से इंकार किया। उन्होंने कहा, ‘महाराष्ट्र में राजनीतिक स्थिति को लेकर इस समय मीडिया में जो भी बातें हो रही हैं, वैसा कुछ भी नहीं है। इस सम हम केवल कोरोना वायरस से लड़ने की दिशा में ही काम कर रहे हैं। हम भारत सरकार के सभी गाइडलाइन्स को फॉलो कर रहे हैं।’
10.32 बजे महाराष्ट्र में प्रमुख विपक्षी दल बीजेपी ने शिवसेना और महाअघाड़ी पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक ओर जहां महाराष्ट्र के लोग सरकार की ओर कोरोना से लड़ाई के प्रभावी कदम उठाने के लिए देख रहे, वहीं शिवसेना कुर्सी की राजनीति में लगी है।
महाराष्ट्र के कोरोना से बुरी तरह से प्रभावित होने के बाद यह कहा जा रहा था कि उद्धव ठाकरे की कार्यप्रणाली को लेकर महा अघाड़ी में असंतोष पनप रहा है। ऐसे में ही शरद पवार का अचानक राजभवन जाना एक सियासी चर्चा को शुरू कर गया। हालांकि शिवसेना ने बाद में यह भी कहा कि विपक्ष बेवजह इस मुलाकात को तूल देकर सरकार को अस्थिर करने का प्रयास कर रहा है।
10.00 बजे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने गठबंधन सहयोगियों की अहम मीटिंग बुलाई। इसमें कांग्रेस और एनसीपी के बड़े नेताओं के शामिल होने की चर्चा है। माना जा रहा है कि उद्धव सरकार पर किसी भी संकट से निपटने की रणनीति और साथियों के मन टटोलने की कोशिश करेंगे।
उधर शिवसेना के मुखपत्र सामना में दावा किया गया उद्धव सरकार स्थिर है और उद्धव की कुर्सी पर कोई खतरा नहीं है। संपादकीय में सवाल उठाते हुए कहा गया कि राजभवन में पिछले कुछ दिनों से लोगों का आना जाना लगा है ऐसे में राज्यपाल का क्या दोष?
शरद पवार के मातोश्री जाने पर इतना हंगामा क्यों? वह पहली बार तो वहां नहीं गए और सरकार में कोई भी अस्थिरता नहीं। अगर कोरोना का संकट ना होता तो 6 महीने सरकार चलाने का जश्न मनाया जा रहा होता।
-एजेंसियां

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