हड़ताली कर्मचारियों पर MESMA के तहत कार्रवाई पर विचार कर रही है म. सरकार

महाराष्‍ट्र सरकार राज्य परिवहन निगम के हड़ताली कर्मचारियों पर MESMA (महाराष्ट्र आवश्यक सेवा रख-रखाव अधिनियम) । इसके लिए परिवहन मंत्री अनिल परब कानूनी सलाह ले रहे हैं। मेस्मा लगाने के बाद आवश्यक सेवा में कार्यरत कर्मचारी हड़ताल पर नहीं जा सकेंगे।
कर्मचारियों की हड़ताल खत्म करने के लिए शुक्रवार को परिवहन मंत्री परब ने एसटी महामंडल के मुख्यालय में बैठक की। बैठक के बाद परब ने कहा कि कर्मचारियों के वेतन वृद्धि के फैसले का लिखित आदेश दिया जा चुका है। उन्हें बढ़ा हुआ वेतन मिलेगा। रही बात एसटी महामंडल के राज्य सरकार में विलीनीकरण की तो इस पर अध्ययन करने के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश पर समिति का गठन कर दिया है। समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही विलीनीकरण हो सकेगा।
सीएम और डेप्युटी सीएम लेंगे सलाह
परिवहन मंत्री परब ने कहा कि राज्य परिवहन बस सेवा अत्यावश्यक सेवाओं में आती है इसलिए हड़ताली एसटी कर्मचारियों के खिलाफ मेस्मा कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है। इसके लिए कानूनी सलाह ली जा रही है। इस संबंध में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और उपमुख्यमंत्री अजित पवार से चर्चा करके जल्द फैसला लिया जाएगा। परब ने कहा कि अब तक एसटी के निलंबित कर्मचारियों का निलंबन वापस नहीं लिया जाएगा। हड़ताल खत्म होने के बाद भी कर्मचारियों का निलंबन तुरंत रद्द नहीं होगा। उन्होंने कहा कि यदि सेवा देने के लिए कार्यस्थल पर आने वाले एसटी कर्मचारियों को किसी ने रोकने की कोशिश की, तो उनके खिलाफ शनिवार से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
भ्रम की स्थिति में हैं कर्मचारी
शुक्रवार को एसटी महामंडल के 73,438 कर्मचारी हड़ताल में शामिल हुए, जबकि 18,828 कर्मचारियों ने काम किया। दिनभर में 1331 बसें सड़क पर उतरीं। परिवहन मंत्री परब ने कहा कि हड़ताल में शामिल एसटी कर्मचारियों के बीच तरह-तरह की अफवाह फैलाई जा रही हैं। ऐसा भ्रम फैलाया जा रहा है कि यदि 60 दिन हड़ताल जारी रही तो मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को इस्तीफा देना पड़ेगा, लेकिन मैं एसटी कर्मचारियों को स्पष्ट कहना चाहता हूं कि ऐसा कोई कानून नहीं है। इसीलिए कर्मचारी अफवाहों पर विश्वास न करें। उनके लिए बेहतर होगा कि जल्द से जल्द काम पर लौटें, ताकि लोगों की परेशानियां खत्म की जा सकें।
-एजेंसियां

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