Mahalaya आज, इसी से होती है दुर्गा पूजा की शुरुआत

पितृ पक्ष की आखिरी श्राद्ध तिथि को Mahalaya पर्व मनाया जाता है. हिन्‍दू पंचांग के अनुसार अश्विन मास के कृष्‍ण पक्ष की अंतिम तिथि यानी अमावस्‍या को महालया अमावस्‍या (Mahalaya Amavasya 2019) कहा जाता है. ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार महालया पर्व हर साल सितंबर या अक्‍टूबर के महीने में मनाया जाता है. इस बार महालया 28 सितंबर अर्थात् आज ही है.

महालया (Mahalya) के दिन ही मूर्तिकार मां दुर्गा (Maa Durga) की आंखों को तैयार करते हैं. बंगाल के लोगों के लिए महालया का विशेष महत्‍व है और वे साल भर इस दिन की प्रतीक्षा करते हैं. महालया के साथ ही जहां एक तरफ श्राद्ध (Shradh) खत्‍म हो जाते हैं वहीं मान्‍यताओं के अनुसार इसी दिन मां दुर्गा कैलाश पर्व से धरती पर आगमन करती हैं और अगले 10 दिनों तक यहीं रहती हैं. महालया के दिन ही मूर्तिकार मां दुर्गा (Maa Durga) की आंखों को तैयार करते हैं. महालया के बाद ही मां दुर्गा की मूर्तियों को अंतिम रूप दे दिया जाता है और वह पंडालों की शोभा बढ़ाती हैं.

महालया का इतिहास
पौराणिक मान्‍यताओं के अनुसार ब्रह्मा, विष्‍णु और महेश ने अत्‍याचारी राक्षस महिषासुर के संहार के लिए मां दुर्गा का सृजन किया. महिषासुर को वरदान मिला हुआ था कि कोई देवता या मनुष्‍य उसका वध नहीं कर पाएगा. ऐसा वरदान पाकर महिषासुर राक्षसों का राजा बन गया और उसने देवताओं पर आक्रमण कर दिया. देवता युद्ध हार गए और देवलोकर पर महिषासुर का राज हो गया. महिषासुर से रक्षा करने के लिए सभी देवताओं ने भगवान विष्णु के साथ आदि शक्ति की आराधना की.

इस दौरान सभी देवताओं के शरीर से एक दिव्य रोशनी निकली जिसने देवी दुर्गा का रूप धारण कर लिया. शस्‍त्रों से सुसज्जित मां दुर्गा ने महिषासुर से नौ दिनों तक भीषण युद्ध करने के बाद 10वें दिन उसका वध कर दिया. दरसअल, महालया मां दुर्गा के धरती पर आगमन का द्योतक है. मां दुर्गा को शक्ति की देवी माना जाता है.

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