अपराध का अंधा कुंआ बना…’बस एक क्ल‍िक’

ड‍िज‍िटल दुन‍िया का जादू ही है क‍ि ‘बस एक क्ल‍िक’ करो और पूरी दुन‍िया सामने हाज‍िर… परंतु इसी एक क्ल‍िक ने इसके उस स्याह पहलू को भी हमारे सामने ला द‍िया है जो इंसानों के बीच ”व‍िश्वास” को भारी क्षत‍ि पहुंचा रहा है। यूपी में ही प‍िछले द‍िनों दो सरकारी ओहदेदारों को अलग-अलग जगह से क‍िशोरों के साथ अपचार करने और उनकी वीड‍ियो क्ल‍िप बनाकर पॉर्न मार्केट में बेचने के आरोप में ग‍ि‍रफ्तार क‍िया जाना बताता है क‍ि ड‍िज‍िटली हमें सभ्य होने के ल‍िए क‍ितनी दूरी तय करनी है।

उक्त दोनों ही अपराधि‍यों से उनके कंप्यूटर की हार्ड ड‍िस्क समेत बहुत सारे सुबूत इकठ्ठा क‍िये जा चुके हैं, शोष‍ित बच्चों का परीक्षण क‍िया जा रहा है… परंतु लंबी प्रक्र‍िया के बाद या इस बीच क‍ितने और ऐसे ही अपराधी होंगे जो बच्चों को अपना श‍िकार बना चुके होंगे… कहा नहीं जा सकता।

न‍िश्च‍ित ही ये अपराध क‍िसी एक व्यक्त‍ि द्वारा अंजाम नहीं द‍िया गया बल्क‍ि पूरा स‍िंडीकेट इसके पीछे होगा और इसमें र‍िटायर्ड सरकारी अध‍ि‍कार‍ियों को शाम‍िल करना इसी रणनीत‍ि का ह‍िस्सा रहा होगा क्योंक‍ि र‍िटायर्ड अध‍िकारी पर ‘अव‍िश्वास’ करना आसान नहीं होता। उम्र और ओहदा दोनों उनका कवच होते हैं।

सइबर क्राइम का ही एक और उदाहरण कल तब सामने आया जब #UPATS ने 14 साइबर अपराध‍ियों को गिरफ्तार क‍िया है, जो बैंकों में फर्जी खाते खोलकर विदेश से पैसे मंगाते थे, इस गैंग ने कोरोना काल में करोड़ों का ट्रांजेक्शन किया, इस मामले में दो विदेशी नागरिकों के खिलाफ लुकआउट नोटिस भी जारी किया गया है।

इनका मोडस ऑपरेंडी गलत नाम, पता से ऑनलाइन ही अलग-अलग बैंकों में खाता खोलना फ‍िर अज्ञात स्रोतों से इन खातों में रकम मंगाना व इसके बाद कार्डलेस पेमेंट मोड से एटीएम द्वारा पैसे निकाल लेना था। यहां तक क‍ि इन खातों को खोलने के लिए ये प्रीएक्टिवेटेड सिम डिस्ट्रीब्यूटर्स से लेते थे, ये डिस्ट्रीब्यूटर- रिटेलर अपनी दुकानों पर आने वाले लोगों की आईडी का मिस यूज करके उनकी जानकारी के बिना सिम एक्टिवेट करा देते थे, ऐसे प्रत‍ि सिम कार्ड एक्टीवेशन पर इन्हें 260 रुपया मिलता था।

साइबर ठग हमें सचेत कर रहे हैं क‍ि आंखमूंदकर क‍िसी हर उस एक शख्स को जो क‍ि चंद रोज में अमीर हुआ हो, पर भरोसा नहीं करना है, उसकी सतत न‍िगाहबानी हमें ही नहीं कई अन्य संभाव‍ित श‍िकारों को बचा सकती है।

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो ( एनसीआरबी) के आंकड़ों को देखें तो साल 2017 में साइबर क्राइम की संख्या 21,796 , साल 2018 में 28248, साल 2019 में साइबर क्राइम के 44,546 मामले दर्ज किये गये और अब इसमें 80 प्रत‍िशत की र‍िकॉर्ड बढ़ोत्तरी हो चुकी है …आगे यह स‍िलस‍िला कहां पहुंचेगा सोच कर ही थरथराहट होती है। इसका बस एक ही इलाज है ” सतर्कता और जागरूकता” वरना ज़रा सी चूक हमें और तमाम मासूमों को क‍िस अंधकार में धकेल देगी कहा नहीं जा सकता ।

– सुम‍ित्रा स‍िंंह चतुर्वेदी

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