आश्‍चर्य: अभी तक लुंबिनी में भारत का कोई केंद्र ही नहीं था

नेपाल में अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध संस्कृति और विरासत केंद्र की आधारशिला भारत की ओर से क्यों रखी जा रही है, इसका जवाब है भगवान बुद्ध की जन्मस्थली लुंबिनी में भारत का कोई केंद्र अब तक नहीं था. युनेस्को तथा विश्व के सभी बौद्ध सम्प्रदाय (महायान, बज्रयान, थेरवाद आदि) मानते हैं कि यह स्थान आज नेपाल के कपिलवस्तु में है, जहाँ पर सभी बुद्ध धर्म के सम्प्रयायों ने अपने संस्कृति अनुसार के मन्दिर, गुम्बा, विहार आदि निर्माण किया है। इस स्थान पर सम्राट अशोक द्वारा स्थापित अशोक स्तम्भ में ब्राह्मी लिपिकृत प्राकृत भाषा में बुद्ध का जन्म स्थान होनेका वर्णन किया हुआ शिलापत्र अवस्थित है।

ये तब है जब भारत दुनिया में बौद्ध धर्म के प्रमुख केंद्रों में से एक है और इसके बावजूद, बुद्ध के जन्मस्थान लुंबिनी में इसका कोई केंद्र नहीं था. जबकि थाईलैंड, कनाडा, कंबोडिया, म्यांमार, श्रीलंका, सिंगापुर, फ्रांस, जर्मनी, जापान, वियतनाम, ऑस्ट्रिया, चीन, दक्षिण कोरिया और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देशों का प्रतिनिधित्व मठ क्षेत्र में ऐसे केंद्रों द्वारा किया जा रहा है,

1978 में स्वीकृत नेपाल सरकार के लुंबिनी मास्टर प्लान के तहत लुंबिनी मठ क्षेत्र विभिन्न संप्रदायों और देशों से बौद्ध मठों और केंद्रो के विकसित करने की योजना अस्तित्व में आयी थी. पिछले तीन दशकों में कई देशों ने लुम्बिनी जोन के भीतर भूमि की मांग की जबकि भारत इससे बाहर रहा, अब इसका समय भी समाप्त हो रहा था और मूल मास्टर प्लान में केवल दो भूखंड खाली रह गए थे.

पीएम मोदी की सरकार में इस मुद्दे को नेपाल के साथ उच्चतम स्तर पर उठाया गया था दोनों सरकारों के निरंतर और सकारात्मक प्रयासों के परिणामस्वरूप, नवंबर 2021 में, लुंबिनी डेवलपमेंट ट्रस्ट ने एक परियोजना बनाने के लिए IBC को एक प्लॉट (80 मीटर X 80 मीटर) आवंटित किया. इसके बाद मार्च 2022 में IBC और LDT के बीच विस्तृत समझौता किया गया, जिसके बाद भूमि औपचारिक रूप से IBC को पट्टे पर दी गई जिस पर आज भारत की ओर से केंद्र तैयार किया जा रहा है.

सात परतों में तैयार डिजाइन

अंतरराष्ट्रीय बौद्ध केंद्र बनने के बाद इसका अद्वितीय डिजाइन सात परतों में तैयार किया गया है, जो बुद्ध द्वारा उनके जन्म के तुरंत बाद उठाए गए सात कदमों का प्रतीक है. इसमें प्रार्थना कक्ष, ध्यान कक्ष, पुस्तकालय, सभागार, बैठक कक्ष, कैफेटेरिया और भिक्षुओं के रहने के लिए आवास होंगे ऊर्जा और अपशिष्ट प्रबंधन के मामले में केंद्र तकनीकी रूप से उन्नत होगा. कुल मिलाकर ये केंद्र भारत की बौद्ध विरासत और तकनीकी कौशल दोनों का प्रदर्शन करेगा.
– Legend News

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