AAP सांसद संजय सिंह को राजद्रोह के आरोप में लखनऊ पुलिस का नोटिस

लखनऊ। यूपी की योगी सरकार के खिलाफ जाति आधारित सर्वे मामले में आम आदमी पार्टी AAP के नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह की मुश्किलें बढ़ गई हैं। राजधानी लखनऊ की हजरतगंज पुलिस ने संजय सिंह को नोटिस दिया है। साथ ही उन्हें 20 सितंबर को पुलिस के सामने अपना पक्ष रखने को कहा गया है। पुलिस ने संजय सिंह को नोटिस पर उपस्थित नहीं होने पर कड़ी कार्यवाही की बात कही है। इसके साथ ही पुलिस ने संजय सिंह पर राजद्रोह समेत अन्य धाराएं भी बढ़ा दी हैं।
दरअसल, संजय सिंह पर आरोप है कि उन्होंने उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के जातिवादी होने को लेकर फोन सर्वे कराया था। इसके बाद दो सितंबर को हजरतगंज थाने में एक एफआईआर दर्ज की गई थी। इस मामले में पुलिस ने बताया कि सांसद संजय सिंह को 20 सितंबर को पेश होने के लिए नोटिस भेजा है। इसके अलावा सर्वे करने वाली प्राइवेट कंपनी के तीन निदेशकों पर भी राजद्रोह और धोखाधड़ी की धारा बढ़ाई गईं है। बता दें कि एक माह के भीतर अलग-अलग शहरों में संजय पर 13 मुकदमे दर्ज हो चुके हैं।
क्या है राजद्रोह
भारतीय दण्ड संहिता की धारा 124 ए में राजद्रोह की परिभाषा के अनुसार अगर कोई व्यक्ति सरकार-विरोधी सामग्री लिखता या बोलता है, ऐसी सामग्री का समर्थन करता है, राष्ट्रीय चिन्हों का अपमान करने के साथ संविधान को नीचा दिखाने की कोशिश करता है तो उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 124 ए में राजद्रोह का मामला दर्ज हो सकता है।
राजद्रोह के आरोप में हो सकती है ये सजा
इसके अलावा अगर कोई शख्स देश विरोधी संगठन के खिलाफ अनजाने में भी संबंध रखता है या किसी भी प्रकार से सहयोग करता है तो वह भी राजद्रोह के दायरे में आता है। इसके तहत आरोपी के दोषी पाए जाने पर उम्रकैद तक की सजा हो सकती है।
बेहद संगीन होता है राष्ट्रद्रोह का आरोप
वहीं राष्ट्रद्रोह का आरोप बेहद संगीन है और ग़ैर-ज़मानती होता है। राष्ट्रद्रोह का मतलब है जो कोई भारत सरकार के विरुद्ध युद्ध करेगा, या ऐसा युद्ध करने का प्रयत्न करेगा या ऐसा युद्ध करने का दुष्प्रेरण करेगा, तो उसे मृत्युदंड या आजीवन कारावास की सजा दी जाएगी। साथ ही वह आर्थिक दंड के लिए भी उत्तरदायी होगा। यह अपराध समझौता करने योग्य नहीं है।
-एजेंसियां

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