AQI 388 माइक्रोग्राम के साथ लखनऊ देश का 7वां सबसे प्रदूषित शहर

लखनऊ। AQI 388 माइक्रोग्राम के साथ कल शनिवार को लखनऊ देश का सातवां सबसे प्रदूषित शहर रिकॉर्ड किया गया। अभी तो यहां की हवा बहुत खराब स्थिति में है लेकिन AQI 12 माइक्रोग्राम बढ़ने पर यहां की हवा खतरनाक स्थिति में पहुंच जाएगी।
जिस तेजी से प्रदूषण बढ़ रहा है उससे हवा की गुणवत्ता खतरनाक स्थिति में पहुंचने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। एनसीआर के जिलों में हवा की गुणवत्ता खतरनाक स्थिति में पहुंच चुकी है। प्रदूषण के मामले में पहले नम्बर पर फरीदाबाद (440), दूसरे पर ग्रेटर नोएडा (420) व तीसरे नम्बर पर बुलंदशहर (415) जिला रहा।

तापमान में गिरावट के साथ बढ़ते प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए संबंधित विभाग मौन बैठे हैं। न कोई सख्ती और न कोई धरपकड़। निर्माण कार्य व कूड़े का जलना भी धड़ल्ले से जारी है। दिवाली के बाद आसमान में छाई धुंध कम नहीं हो रही है। एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) खतरनाक स्थिति में पहुंच रही है। शनिवार को एक्यूआई 388 माइक्रोग्राम प्रतिघन मीटर रिकार्ड की गई।

शहरों में AQI की स्थिति (माइक्रोग्राम प्रतिघन मीटर में)

शहर               एक्यूआई
फरीदाबाद       440
ग्रेटर नोएडा     420
बुलंदशहर       415
गाजियाबाद    403
दिल्ली          401
भिवंडी          390
लखनऊ       388
वाराणसी     368

AQI का मानक

50 माइक्रोग्राम तक हवा की गुणवत्ता बहुत अच्छी होती है।
50 से 100 के बीच हवा संतोषजनक ।
100 से 200 के बीच हवा की गुणवत्ता मध्यम वर्ग की हवा होती है
200 से 300 के बीच हवा की गुणवत्ता खराब हो जाती है।
300 से 400 के बीच हवा की गुणवत्ता बहुत खराब हो जाती है।
400 से ऊपर होने पर हवा की गुणवत्ता खतरनाक स्थिति में पहुंच जाती है।

पिछले वर्ष लखनऊ में नगर निगम को सड़कों पर व फायर बिग्रेड के पेड़ों पर छिड़काव कराना पड़ा था

पिछले वर्ष शहर में एक्यूआई 485 माइक्रोग्राम पहुंच गया था। नगर निगम ने जोन वार कार्ययोजना बनाकर छिड़काव शुरू कराया था। इस वर्ष छिड़काव की अभी कार्ययोजना नहीं बनाई गई है जिससे प्रदूषण के स्तर पर कोई कमी लाई जा सके।

प्रदूषण के लिए शहर का यातायात और उससे लगने वाला जाम काफी हद तक जिम्मेदार

प्रदूषण के लिए शहर का यातायात और उससे लगने वाला जाम काफी हद तक जिम्मेदार है। आलमबाग, चारबाग, नाका हिंडोला, बासमंडी, बलिंगटन चौराहा और अशोक मार्ग पर भीषण जाम प्रदूषण को बढ़ा रहा है। चारबाग से मवैया तक दोनों छोरों पर खड़ी बसों से अक्सर भीषण जाम लगता है। ड्राइवर और कंडक्टर बीच सड़क पर यात्रियों को चढ़ाते और उतारते हैं इससे रास्ता चोक हो जाता है। इस कारण वाहनों की लंबी कतारें लग जाती है और उनसे निकलना वाले धुएं से प्रदूषण फैलता है। हालांकि इस दिशा में नगर निगम और महापौर प्रयास कर रही हैं। इसके बावजूद बस चालक और कंडक्टरों पर परिवहन निगम कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।

शहर में अब भी दौड़ रहे डीजल टेम्पो

प्रदूषण नियंत्रित करने के लिए पिछले साल नवम्बर माह में ही मजबूत योजनाएं तैयार की गई थीं। सभी विभागों के अफसरों को डीएम ने तलब किया था। उनको लक्ष्य दिया गया था। साल गया, बात गई। अब कर्मचारी दबी जुबान में कह रहे हैं कि पिछले साल बनीं योजनाएं देखते-देखते हवा हो गईं। डीजल टेम्पो अब भी काला धुआं उगलते हुए शहर की सड़कों पर दौड़ रहे हैं। बिना प्रदूषण जांच कराए चल रहे वाहनों पर कार्रवाई होती कहीं नहीं दिख रही है। सहालग में खूब डीजल जनरेटरों का प्रयोग हो रहा है।

पिछले वर्ष 16 दिसम्बर को कलेक्ट्रेट के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम सभागार में डीएम कौशल राज शर्मा ने जिला स्तर के विभागों के मुखिया को प्रदूषण नियंत्रण की जिम्मेदारी सौंपी थी। परिवहन विभाग को जिम्मेदारी दी गई थी कि शहर में अवैध रूप से चल रहे ढाई हजार टेम्पो बाहर किए जाएं। इसके लिए क्षेत्रीय अपर सिटी मजिस्ट्रेटों को भी कार्रवाई के लिए जिम्मेदारी दी गई थी। परिवहन विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिया गया था कि सरकारी वाहनों के प्रदूषण की नियमित जांच कराएं। इसके अलावा प्रदूषण की जांच करने वाली एजेंसियों की कार्यप्रणाली जांचने का भी निर्देश दिया था। सभी थानेदारों को कालाधुआं उगलने वाले डीजल जनसेट का प्रयोग न करने देने का निर्देश दिया गया था।

मेट्रो को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भेजा नोटिस, निर्माण सामग्री को ढकने का निर्देश

प्रदूषण को बढ़ाने में लखनऊ मेट्रो रेल कारपोरेशन (एलएमआरसी) को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने नोटिस भेजी है। फैजाबाद रोड पर लगभग चार किलोमीटर की दूरी पर निर्माण सामग्री बिखरी पड़ी है। वाहनों के आवागमन से धूल उड़ रही है। निर्माण सामग्री न ढकने व सड़क पर छिड़काव न करने पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सख्त कम उठाते हुए नोटिस भेजी है। यथाशीघ्र निर्माण सामग्री को ढकने का निर्देश दिया है। वहीं एलएमआरसी के वरिष्ठ जनसंपर्क अधिकारी अमित कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि प्रदूषण के स्तर को कम करने के लिए लगातार सड़कों की सफाई व धुलाई की जा रही है। निर्माण स्थलों व आसपास की सड़कों पर धूल से बचने के लिए टैंकर व पाइपलाइनों की मदद से दो बार सफाई व धुलाई की जा रही है।

उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सचिव आशीष तिवारी ने बताया कि लखनऊ के साथ कानपुर, आगरा, वाराणसी व मुरादाबाद में मुख्य सचिव से अनुमोदित कार्ययोजना बनाकर विभागों को दे दी गई है। लखनऊ के अधिकारियों के साथ बैठक भी हो चुकी है। कार्ययोजना उन्हीं को लागू करना है। कुछ विभागों ने काम शुरू किया है लेकिन अभी इसमें तेजी लाने की जरूरत है।

– एजेंसी

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