राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस पर भगवान Dhanwantari को किया याद

मथुरा। Sanskriti University के सभागार में राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस पर संस्कृति आयुर्वेद कालेज एवं अस्पताल तथा संस्कृति कालेज आफ होमियोपैथिक फार्मेसी के संयुक्त तत्वाधान में भगवान Dhanwantari के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्पाहार समर्पित कर उन्हें याद किया गया। कार्यक्रम के दौरान विभागाध्यक्ष एवं अन्य वक्ताओं ने आयुर्वेद तथा होम्योपैथी के बढ़ते प्रभाव के अलावा इनकी उपयोगिता पर भी प्रकाश डाला।

आयुर्वेदिक कालेज एवं अस्पताल के विभागाध्यक्ष डा.रामकुमार ने छात्र-छात्राओं को बताया कि तेजी से बदलते विश्व में और विभिन्न बीमारियों की बढ़ती चुनौती के इस दौर में आयुर्वेद एक ऐसी प्राचीन पद्धति है, जो मानव जीवन में बीमारियों के स्थायी निदान में कारगर सिद्ध हो रही है। अन्य पैथी के अतंर्गत ऐसी दवाइयां दी जाती हैं जो कुछ समय के लिए आराम जरूर देती हैं लेकिन उनके साइड इफेक्ट इतने होते हैं कि वे अन्य बीमारियों को जन्म दे देती हैं या फिर मानव शरीर के अंगों को बड़ा नुकसान पहुंचा देती हैं।

विवि के कुलपति डा. राणा सिंह ने छात्र-छात्राओं को राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस की शुभकामनाएं देते हुए इस दिवस को मनाने के उद्देश्यों को विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि आज दुनिया के विकसित देश आयुर्वेद पद्धति को द्रुत गति से अपने जीवन का हिस्सा बना रहे हैं। उन्होंने छात्र-छात्राओं से आयुर्वेद को अपने जीवन में अपनाने के साथ जनसामान्य को इसके लिए प्रेरित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि आयुर्वेदिक दवाइयां रोग का स्थायी निदान तो करती ही हैं, इनका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होता है।

आयुर्वेद कालेज के छात्र-छात्राओं ने इस मौके पर आयुर्वेद के महत्व को बताने वाली अनेक प्रस्तुतियां भी दीं। कार्यक्रम के दौरान डा. हेमंत कुमार, डा.सुपर्णा साहा, डा. योगेश्वर पांडे एवं डा. ब्रजनंदन पत्सारिया ने भी विचार व्यक्त किए।

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