लोक और पौराणिक कथाओं वालेे त्‍यौहार Lohri का ये है शुभ समय

Lohri पर शिव की सती का अग्‍नि में भस्‍म होना व दुल्‍ला भट्टी को किया जाता है याद, Lohri  की अग्नि प्रज्वलित करने का शुभ समय

नई दिल्‍ली।  नई फसल की कटाई के मौके पर मनाया जाने वाला Lohri का त्योहार पंजाबियों के लिए  काफी महत्व रखता है, इस दिन पंजाबी गीत और डांस केे आनंद के साथ रात को लोहड़ी जलाकर सभी रिश्तेदार और परिवार वाले पूजा करते हैं। इस लोहड़ी से कई लोक और पौराणिक कथाएं भी जुड़ी हुई हैं जिनके कारण यह त्यौहार मनाया जाता है।

Lohri  की अग्नि प्रज्वलित करने का शुभ समय
इस बार लोहड़ी पर्व बहुत शुभ है। 13 जनवरी शाम 6:00 बजे लकड़ियां, समिधा, रेवड़ियां, तिल आदि अग्नि में प्रज्वलित कर अग्नि पूजन के रूप में लोहड़ी का समय रात 11:42 मिनट तक होगा।

इसमें शाम के समय लोहड़ी जलाने का अर्थ है कि अगले दिन सूर्य का मकर राशि में प्रवेश पर उसका स्वागत करना। सामूहिक रूप से आग जलाकर सर्दी भगाना और मूंगफली, तिल, गजक, रेवड़ी खाकर शरीर को सर्दी के मौसम में समर्थ बनाना ही लोहड़ी का उद्देश्य है।

सती की याद में जलाई जाती है लोहड़ी पर अग्‍नि
पौराणिक कथाओं के अनुसार, लोहड़ी के दिन आग जलाने को लेकर माना जाता है कि यह अग्नि राजा दक्ष की पुत्री सती की याद में जलाई जाती है। एक बार राजा दक्ष ने यज्ञ करवाया और इसमें अपने दामाद शिव और पुत्री सती को आमंत्रित नहीं किया। इस बात से निराश होकर सती अपने पिता के पास पहुंची और पूछा कि उन्हें और उनके पति को इस यज्ञ का निमंत्रण क्यों नहीं दिया गया। इस बात पर अहंकारी राजा दक्ष ने सती और भगवान शिव की बहुत निंदा की। इससे सती बहुत आहत हुईं और क्रोधित होकर खूब रोईं। उनसे अपने पति का अपमान नहीं देखा गया और उन्होंने उसी यज्ञ में खुद को भस्म कर लिया। सती के मृत्यु का समाचार सुन खुद भगवान शिव ने वीरभद्र को उत्पन्न कर उसके द्वारा यज्ञ का विध्वंस करा दिया। तब से माता सती की याद में लोहड़ी पर आग जलाने की परंपरा है।

लोहड़ी से जुड़ी दुल्ला भट्टी की कहानी
लोहड़ी के त्यौहार को लेकर एक लोककथा भी है जो कि पंजाब से जुड़ी हुई है। हालांकि कुछ लोग इसे इतिहास बताते हैं। कहा जाता है कि मुगल काल में बादशाह अकबर के समय में दुल्ला भट्टी नाम का एक युवक पंजाब में रहता था। कहा जाता है कि एक बार कुछ अमीर व्यापारी कुछ समान के बदले इलाके की लड़कियों का सौदा कर रहे थे। तभी दुल्ला भट्टी ने वहां पहुंचकर लड़कियों को व्यापारियों के चंगुल से मुक्त कराया। और फिर इन लड़कियों की शादी हिन्दू लड़कों से करवाई। इस घटना के बाद से दुल्ला भट्टी को नायक की उपाधि दी गई और हर बार लोहड़ी पर उसी की याद में ‘सुंदर मुंदरिए’ लोकगीत गाया जाता है।
-एजेंसी

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