लॉकडाउन ने नदियों और पर्यावरण को साफ रखने का रास्ता दिखाया: जावड़ेकर

नई दिल्‍ली। कोरोना और लॉकडाउन की वजह से देश कई तरह की समस्याओं से जूझ रहा है लेकिन दूसरी तरफ इससे प्रदूषण में बड़ी कमी आई है। इसी को लेकर केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि लॉकडाउन ने नदियों और पर्यावरण को साफ रखने का रास्ता दिखाया है और आगे से ध्यान रखना चाहिए की नदियां गंदी न हों। वह एक निजी चैनल से बात कर रहे थे। उन्होंने यह भी कहा कि इस संकट के समय में पता नहीं क्या सोचकर लोगों ने अखबारों से दूरी बनाई है लेकिन यह बिल्कुल सही नहीं है।
अखबार पूरी तरह से सुरक्षित हैं और लोगों को इस समय सही समाचारों के लिए अखबार पढ़ने चाहिए।
फेक न्यूज पर जावड़ेकर ने कहा, ‘जो लोग लोकतंत्र से नहीं जीत पा रहे वे यहां तक आ गए। कई तरह की अफवाहें फैलाई जाती हैं जो बाद में फेक साबित होती हैं। जो झूठी खबरें सोशल मीडिया पर चलती हैं, उसका दुष्परिणाम सामने आता है। बांद्रा में इसी वजह से लोग स्टेशन पर जमा हो गए थे।’
‘प्रधानमंत्री सबसे अच्छे कम्युनिकेटर’
उन्होंने कहा कि पीएम मोदी सबसे अच्छे कम्युनिकेटर हैं और जनता उनकी बात मानती है। उन्होंने कहा, ‘हमारा भाग्य है कि प्रधानमंत्री सबसे अच्छे कम्युनिकेटर हैं। उन्होंने जो भी भाषण दिए, या मन की बात की, जनता उनके साथ खड़ी रही। उन्होंने कहा दीये जलाओ तो लोगों ने दीये जलाए। ऐसे लोगों ने भी दीये जलाए जिनके घर नहीं है। हम इस बीमारी से न डरने की बात हमेशा कह रहे हैं लेकिन दो गज की दूरी बहुत जरूरी और बार-बार हाथ धोने पर जोर दे रहे हैं। हम कह रहे हैं कि घर में बने रहिए और भीड़ में जाने पर मास्क पहनिए।’
लोगों से अपील, पैदल घर न जाएं
प्रकाश जावड़ेकर ने कहा, लोगों से अपील करूंगा कि आप जहां हैं वहीं रुकें। अगर आप दूसरे राज्य में जाना चाहते हैं तो उसके नियम बनाए गए हैं। उसके लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराकर इंतजार करिए। सरकार और सामाजिक संगठन आपकी जिम्मेदारी उठाते हैं। अगर ऐसा नहीं होता है तो बीजेपी के कार्यकर्ता मैदान में हैं। पैदल न चलिए। ऐसे कैसे पहुंचेंगे। विश्वास रखिए आपको सही तरीके से घर पहुंचाया जाएगा।
केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री ने कहा, ‘सचाई है कि मीडिया को दिक्कतों को सामना करना पड़ रहा है। चैनल का रेवेन्यू भी बढ़ेगा। एकाध महीने यह समस्या रहेगी। लोगों के दिल में बैठ गया है कि समाचार पत्र लेने से कोविड होता है। यह तो हद हो गई। मुझे तो समझ में नहीं आ रहा है लेकिन पढ़े लिखे लोग भी न्यूज़ पेपर नहीं ले रहे । मुंबई पुणे में राज्य सरकार ने भी बंद कर रखा है। अगर डोर डिलिवरी होगी तो समाचार पत्र की क्यों नहीं होगी। संकट के बाद कभी अच्छे दिन आते हैं तो कभी बुरे दिन आते हैं। यह उद्योग इतना ताकतवर है कि बाहर आएगी। सरकार हमेशा उनका ख्याल रखेगी। ‘
-एजेंसियां

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