साहित्य समाज का मेरुदण्ड है: डॉ. कृष्णगोपाल मिश्र

गृह विज्ञान महाविद्यालय होशंगाबाद के हिंदी विभाग द्वारा आयोजित व्याख्यानमाला के अंतर्गत नर्मदा महाविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णगोपाल मिश्र ने भक्ति काल एवं प्रमुख कवि विषय पर विस्तृत व्याख्यान दिया।

डॉ. मिश्र ने भक्तिकाल की सामाजिक- सांस्कृतिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए तत्कालीन राजनीतिक संकटों की तथ्यपूर्ण विवेचना की उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय राजसत्ता के विफल होने पर उस युग के संतों ने समाज का नेतृत्व किया और शस्त्र तथा शास्त्र दोनों स्तरों पर आक्रांताओं की विस्तारवादी मानसिकता को चुनौती दी। वास्तव में हिंदी साहित्य का भक्ति कालीन काव्य सामाजिक- सांस्कृतिक संघर्ष के मध्य समन्वय के राजपथ का नवीन अनुसंधान है तथा मनुष्य को मनुष्यता सिखाने के महान प्रयत्न हैं।

कार्यक्रम की समन्वयक डॉ. पुष्पा दुबे ने स्वागत उद्बोधन में व्याख्यानमाला की आवश्यकता पर प्रकाश डाला तथा डॉ. मिश्र की साहित्यिक अवदान की जानकारी दी। वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. श्रुति गोखले ने कार्यक्रम का सफलतापूर्वक संचालन किया तथा डॉ. कीर्ति दीक्षित ने आभार प्रदर्शन किया। इस अवसर पर डॉ.आर.बी. शाह, डॉ. रामबाबू मेहर आदि प्राध्यापक एवं छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहीं।

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