वायु सेना के पास लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट की कमी: PAC रिपोर्ट

नई दिल्‍ली। कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे की अगुआई वाली संसद की लोक लेखा समिति PAC ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि देश की वायु सेना के पास पर्याप्त संख्या में लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलएसी) यानी हल्के लड़ाकू विमान नहीं हैं। समिति ने अपनी रिपोर्ट में एलएसी, जिनमें तेजस जैसे विमान हैं, की कम संख्या को लेकर अपनी चिंता जाहिर करते हुए इसे देश की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा करार दिया है।
बता दें कि संसदीय कमेटी की यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब मोदी सरकार अत्याधुनिक लड़ाकू विमान राफेल के सौदे को लेकर घिरी हुई है।
लोक लेखा समिति ने रक्षा मंत्रालय से तत्काल इस दिशा में जरूरी कदम उठाने का सुझाव भी दिया है। पीएसी में बीजेपी और कांग्रेस के आलावा टीएमसी, शिरोमणि अकाली दल, बीजू जनता दल, शिव सेना से लोकसभा और राज्यसभा के कुल 22 सदस्य शामिल हैं। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि वायु सेना अपनी ऑपरेशनल जरूरतों के लिए फिलहाल अल्पकालीन उपायों पर निर्भर है। यह स्थिति ठीक नहीं है और जल्द इसका समाधान होना चाहिए। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा, ‘वायु सेना की जरूरतों को देखते हुए तत्काल इस प्रोजेक्ट को पूरा करना चाहिए। लंबे समय के लिए भारत इस श्रेणी के विमानों के आयात को रोकने और इसे भारत में ही बनाने को लेकर सरकार को दिशा-रेखा तय करनी चाहिए।’
पीएसी ने अपनी रिपोर्ट में वर्तमान स्थिति से निराशा जताई है। रिपोर्ट में कहा है कि 3 दशकों से अधिक का समय बीत जाने के बावजूद भी रक्षा मंत्रालय के अधीन ऐरोनॉटिकल डिवेलपमेंट एजेंसी (ADA) जरूरत के मुताबिक स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान विकसित नहीं कर पाई है।
संसदीय समिति ने वायु सेना को पर्याप्त संख्या में हल्के लड़ाकू विमान तेजस को उपलब्ध करा पाने में हिंदुस्तान ऐरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) की नाकामी पर चिंता जाहिर की है। संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है जुलाई 2018 तक भारतीय वायुसेना को 200 तेजस फाइटर जेट्स और 20 ट्रेनर एयरक्राफ्ट की जरूरत थी, लेकिन उसे सिर्फ 9 तेजस मिल पाए।
पब्लिक अकाउंट्स कमेटी PAC यानी लोक लेखा समिति की ‘डिजाइन्स डिवेलपमेंट, मैन्यूफैक्चर ऐंड इंडक्शन ऑफ लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट’ शीर्षक की रिपोर्ट में कहा गया है कि सुपरसोनिक फाइटर जेट को विकसित करने और वायुसेना में शामिल करने में बहुत ज्यादा देरी हो रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय वायुसेना को मिग-बीआईएस, मिग-29, मिराज-2000 और जैगुआर जैसे एयरक्राफ्ट को अपग्रेड करना है, जिस पर 20,037 करोड़ रुपये की लागत आएगी।
संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि LCA का मकसद पुराने हो चुके मिग-21 और मिग-27 की भरपाई करना था। बता दें कि तेजस एक सिंगल-इंजन वाला कॉम्बैट एयरक्राफ्ट है। सरकार ने 1983 में LCA के विकास और निर्माण के कार्यक्रम को शुरू किया था। भारतीय वायु सेना के लिए 42 स्क्वॉड्रंस को मंजूर किया गया है लेकिन फिलहाल सिर्फ 35 स्क्वॉड्रंस ही ऑपरेशनल हैं। समिति ने कहा कि मिग-21 और मिग-27 के स्क्वॉड्रन अगले 10 सालों में रिटायर हो जाएंगे।
-एजेंसियां

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