लाइफ स्टाइल ने भारतीय युवाओं को सौगात में दे दीं कई स्वास्थ्य समस्यायें

आज वेस्टर नाइजेशन और लाइफ स्टाइल भारतीय युवाओं के बीच सिर्फ ट्रेंड ही नहीं कर रहे, बल्कि अपने साथ स्वास्थ्य से जुड़ी कई समस्याओं को भी बढ़ा रहे हैं। उच्च रक्तचाप, मोटापा और तनाव खराब जीवनशैली के कारण होने वाली सबसे आम समस्याएं हैं, जो अब सिर्फ वयस्क या बुजुर्गों तक सीमित नहीं हैं। वर्तमान में, भारत की युवा आबादी भी जीवनशैली संबंधी बीमारियों की चपेट में आ चुकी है, जहां युवा रोगियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। बीमारियों के पैटर्न में भारी बदलाव आया है। पहले वायु और जल जनित रोग के कारण डेंगू, प्लेग, पीलिया और टाइफॉइड से होने वाली मौते सबसे ज्यादा होती थीं। स्थिति अब यह है कि जीवनशैली में आए बदलाव के कारण डायबिटीज, उच्च-रक्तचाप और मोटापा जैसी बीमारियां आसानी से देखने को मिल जाती हैं। दुर्भाग्य से इनसे जुड़ी अन्य बीमारियां भी जन्म ले रही हैं, जो एक बड़ी चिंता का विषय है।

सिबिया मेडिकल सेंटर के निदेशक डा. एस.एस. सिबिया
डा. एस.एस. सिबिया

लुधियाना स्थ‍ित सिबिया मेडिकल सेंटर के निदेशक डा. एस.एस. सिबिया के अनुसार महिला सशक्तिकरण और लंबे समय तक काम करने के साथ, पुरुष और महिलाएं दोनों में तनाव होना एक आम बात है। खराब आहार और गतिहीन जीवन शैली के साथ शराब और धूम्रपान के कारण भी बीमारियों की संख्या में वृद्धि हो रही है। ऑफिस जाने वाले युवा समय पर नाश्ता न करने और जंक फूड के लगातार सेवन के कारण अक्सर मोटापे का शिकार बनते हैं। चिंता की बात ये है कि ऐसे लोगों में इनफर्टिलिटी का खतरा बढ़ जाता है।

जीवनशैली की बीमारियों और इनफर्टिलिटी के बीच संबंध
जीवनशैली की बीमारियों और इनफर्टिलिटी के बीच का लिंक दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है। मध्यम आयु वर्ग वाली लड़कियों और कामकाजी महिलाओं के बीच ये समस्याएं आम होती जा रही हैं जिसमें एडेनोमायोसिस, एंडोमेट्रियोसिस और पीसीओडी (पॉलीसिस्टिक अंडाशय रोग) खासतौर पर शामिल हैं। आयु के साथ ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस बढ़ता जाता है और एंटीऑक्सिडेंट्स का स्तर कम हो जाता है। पुरुषों की उम्र बढ़ने के साथ ही स्पर्म डीएनए का विभाजन भी बढ़ जाता है। जिनके स्पर्म कमजोर होते हैं उनके डीएनए के विभाजन में वृद्धि हुई है। महिलाओं द्वारा धूम्रपान करने से कंसीव करने की संभावना 50 प्रतिशत कम हो जाती है और गर्भपात के चांसेज बढ़ जाते हैं।
मोटापा
कॉर्पोरेट आईटी सेक्टर में अच्छे कैरियर और फाइनेंस के अवसरों के कारण अधिक से अधिक युवा इसमें काम करना पसंद करते हैं। लेकिन व्यस्त दिनचर्या के कारण वे अक्सर अपने स्वास्थ्य को लेकर लापरवाह हो जाते हैं। वार्षिक स्वास्थ्य जांच शिविर के दौरान एक कॉर्पोरेट कंपनी में किए गए एक सर्वे में पाया गया कि, हाइ कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज के साथ हाइपरटेंशन से पीड़ित 40 प्रतिशत से ज्यादा कर्मचारियों की उम्र 40 से कम थी। जिनमें से 10 प्रतिशत कर्मचारी मोटापे से ग्रस्त थे। यह अवस्था स्पष्ट संकेत दे रही है कि आने वाले समय में स्थिति और खराब हो जाएगी जिसमें हृदय रोग जैसे दिल के दौरे और कार्डियक अरेस्ट और न्यूरो-एंडोवास्कुलर बीमारी जैसे स्ट्रोक आदि बीमारियों के मामले अत्यधिक हो जाएंगे।
हड्डियों से जुड़ी समस्याएं
सर्वाइकल की समस्या, कमर दर्द, माइग्रेन, घुटनों में दर्द, रीढ़ की हड्डी संबंधी समस्याएं इन दिनों सामान्य हैं। पिछले कुछ वर्षों में कार्पल टनल सिंड्रोम और स्लिप डिस्क जैसी कुछ गंभीर समस्याएं बहुत कम कामकाजी लोगों में देखी गई हैं। उम्र चाहे जो भी हो, इन दिनों न्यूरो स्पाइनल के मुद्दे आम हो गए हैं। 20 वर्ष की आयु के लोग इन समस्याओं से ग्रस्त हो रहे हैं, जिनमें से स्लिप डिस्क, लोवर बैक पेन, सर्वाइकल सबसे ज्यादा देखे जाते हैं। स्लिप डिस्क की समस्या विभिन्न कारणों से हो सकती है। स्लिप डिस्क आपकी दैनिक दिनचर्या में कुछ नियमित और सामान्य गतिविधियाँ करते हुए भी परेशान कर सकती हैं जैसे नींद के दौरान करवट लेना, लंबे समय तक ड्राइविंग करना, गतिहीन नौकरियों में लंबे समय तक गलत मुद्रा में बैठना आदि।
हृदय रोग
दुर्भाग्य से आज युवा आबादी में हृदय रोगों की वृद्धि देखी गई है। जोखिम बढ़ाने वाले प्रमुख कारकों में डायबिटीज, हाइपरटेंशन, धूम्रपान और मोटापा शामिल है। इन सब परेशानियों का कारण अस्वस्थ लाइफस्टाइल है जिसमें शारीरिक गतिविधियों की कमी दिखाई देती है। यह आश्चर्यजनक बात है कि युवा पीढ़ी को हृदय रोगों का इलाज करवाना पड़ रहा है। जिस उम्र में उन्हें सबसे ज्यादा एक्टिव रहना चाहिए उसी उम्र में वे अपना स्टैमिना खोने लगते हैं। जिसके चलते इन सब परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

जीवनशैली संबंधी बीमारियों की रोकथाम
नियमित व्यायाम, रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करता है। धूम्रपान और शराब के सेवन को बंद करने से हृदय संबंधी बीमारियों के जोखिम को कम करने में मदद मिलती है। इस तरह के बदलाव जीवनशैली में किए जाएं तो यह कई बीमारियों से छुटकारा दिला सकता है। स्वस्थ शरीर के लिए हरी सब्जियां, फल और पानी का अधिक से अधिक सेवन बेहद जरूरी है।
अच्छी सेहत के लिए सही आहार और फिटनेस सेंटरों में अच्छा समय गुजारना ही काफी नहीं है। छोटी-छोटी चीजें जो हमारे दिन-प्रतिदिन के कार्यों का हिस्सा हैं, हमें फिट रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। हड्डियों की समस्या में मरीज को कैल्शियम का सेवन करने के लिए कहा जाता है। ऐसे लोगों को एक दिन में 1000-1500 मिलीग्राम कैल्शियम का सेवन करना चाहिए। दूध और दूध से बनी चीजें, हरी पत्तेदार सब्जियां, फल, ओट्स, ब्राउन राइस, सोयाबीन आदि के सेवन से कैल्शियम की कमी को पूरा किया जा सकता है।
टहलने और दौड़ने से न केवल शारीरिक, बल्कि मानसिक क्षमता भी बढ़ती है। वजन उठाने वाली कसरत, चलना, दौड़ना, सीढ़ियां चढ़ना, ये व्यायाम हर उम्र में व्यक्ति को फिट रखने में सहायक हैं। वर्कआउट वजन को नियंत्रित रखने के साथ हड्डियों को भी मजबूत बनाने में मदद करता है। इससे मांसपेशियों और हड्डियों में लचक बनी रहती है जिससे हड्डियों में जकड़न या दर्द आदि की समस्या नहीं होती है।

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