ज़मानत मिलते ही लालू करने लगे हिंदू-मुसलमान, जेडीयू ने आपत्ति जताई

बक्सर। राष्ट्रीय जनता दल RJD प्रमुख करीब चार साल बाद जमानत पर जेल से बाहर आए हैं। उनकी सेहत इतनी खराब है कि वह दिल्ली से पटना आने की हालत में नहीं हैं, लेकिन उन्‍होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से बक्सर में गंगा नदी से मिले शवों के क्रियाक्रम पर सवाल उठाया है। गंगा नदी से भारी संख्या में शव मिलने पर बिहार प्रशासन के लोग उन्हें अपने कब्जे में लेकर उन्हें दफनाकर क्रियाक्रम को संपन्न करा रहे हैं। इस पर लालू प्रसाद यादव ने आपत्ति जताई है। हालांकि लालू के ट्वीट पर बीजेपी और जेडीयू ने आपत्ति जताई है और शवों पर राजनीति ना करने की सलाह दी है।
लालू प्रसाद यादव के आधिकारिक ट्वीटर हैंडल से किए गए ट्वीट में लिखा है- ‘जीते जी दवा, ऑक्सीजन, बेड और ईलाज नहीं दिया। मरने के बाद लकड़ी, दो गज कफ़न और ज़मीन भी नसीब नहीं हुआ। दुर्गति के लिए शवों को गंगा में फेंक दिया। कुत्ते लाशों को नोच रहे है। हिंदुओं को दफ़नाया जा रहा है। कहाँ ले जा रहे है देश और इंसानियत को??’
कोरोना काल में हिंदू-मुस्लिम की बात करना कितना जायज
पिछले साल कोरोना संक्रमण के मामले सामने आने पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी गाइडलाइंस में कहा गया था कि कोविड पॉजिटिव शख्स की जान जाने पर उनका अंतिम संस्कार इलेक्ट्रॉनिक शव दाह केंद्र पर किया जाएगा। पिछले एक साल में उस अनुपात में इलेक्ट्रिक शव दाह केंद्र नहीं बन पाए जिस अनुपात में संक्रमितों की जान गई है। इसके अलावा कई परिजन शवों का दाह संस्कार इलेक्ट्रिक केंद्र पर करने से कतराते हैं इसलिए सरकार ने कुछ विशेष नियम कायदे के तहत पारंपरिक तरीके के तहत लकड़ी की मदद से शवों का दाह संस्कार करने की अनुमति प्रदान की है। हालांकि शव दाह केंद्रों पर अपेक्षा से ज्यादा शव पहुंचने पर वहां लकड़ी, दाह स्थान आदि की कमी देखी जा रही है।
यहां तक कि इस मौके पर कर्मकांड करने वाले दाह संस्कार के वक्त मुंह मांगा कीमत डिमांड कर रहे हैं इसलिए समाज के आर्थिक रूप से कमजोर लोग शवों को सीधे गंगा में प्रवाहित कर रहे हैं। गंगा में प्रवाहित शवों की हालत बेहद खराब है। आलम यह है कि उन्हें जलाना संभव नहीं हो पा रहा है। ऐसे में प्रशासन उन्हें दफनाकर क्रियाक्रम को अंजाम दे रहा है ताकि संदिग्ध लोगों के शव को जलाने से उठने वाले धुएं से आसपास के गांव में रहने वाले लोगों को परेशानी ना हो। साथ ही इन शवों से उठने वाले दुर्गंध से भी लोगों को बचाया जा सके।
कोरोना काल में प्रशासन की ओर से क्रियाक्रम के लिए अपनाई जा रही इन विधियों पर भी लालू प्रसाद यादव जैसे राजनेता सवाल उठा रहे हैं। वह इसमें हिंदू-मुस्लिम का एंगल तलाश रहे हैं।
बक्सर प्रशासन ने कहा-डेड बॉडी का कराएंगे दाह संस्कार
बक्सर के जिलाधिकारी ने इस संदर्भ में कहा है कि बिहार सरकार का सख्त आदेश है कि जिन डेड बॉडी का दाह संस्कार करने में परिजन समर्थ्य नहीं हैं वहां यह जिम्मेदारी प्रशासन के लोग निभाएंगे। ना केवल बक्सर बल्कि पूरे बिहार में यह किया जा रहा है। बक्सर में गंगा नदी से जो भी शव मिले हैं, प्रशासन के लोग उनका पूरे विधि विधान से अंतिम संस्कार करा रहे हैं। दफनाने की बात कहां से आई इसपर जांच के बाद दी कुछ भी कहा जा सकता है।
लालू पहले पूरी बात पता करें फिर कुछ भी बोलें: बीजेपी
बीजेपी प्रवक्ता प्रेम रंजन पटेल ने लालू के ट्वीट पर कहा कि बक्सर में डेड बॉडी कहां से आई, कितनी दूर से आई ये जांच का विषय है। केंद्रीय जल मंत्री ने स्वंय कहा है कि वे इसकी जांच कराएंगे। लालू यादव को ये जानकारी प्राप्त करना चाहिए कि यहां के प्रशासन ने कहा है कि वे इन डेड बॉडियों का अंतिम संस्कार कराने का काम करेंगे। खुद गृह सचिव और डीजीपी ने इस बात की तहकीकात की है। लगातार उन डेड बॉडियों का अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया गया है। इस बात की जानकारी प्राप्त करने के बाद दी लालू जी को कुछ भी बोलना चाहिए।
लालू यादव शवों पर भी राजनीति करने से बाज नहीं आ रहे: जेडीयू
जेडीयू प्रवक्ता निखिल मंडल ने कहा कि आश्चर्य लेकिन सत्य, इस कोरोना काल में खुल लालू प्रसाद यादव अस्वस्थ्य चल रहे हैं लेकिन शव पर राजनीति करने से नहीं चूक रहे हैं। कह रहे हैं कि हिंदुओं को दफनाया जा रहा है। उन्हें जानना चाहिए कि कोरोना काल में जो स्थिति है और स्थिति खराब ना हो इसलिए सुरक्षित तरीके से अगर दफनाया ही जा रहा है तो क्या ये कोई वक्त है इस तरह की बात करने की। राजद और लालू यादव जी आप जितने भी लोग हैं आप आपदा के वक्त सरकार के साथ आएं। अपने विधायकों को क्षेत्र में भेजकर लोगों की मदद करने को कहें, ना कि आपदा के वक्त राजनीति करें।
शहाबुद्दीन की मौत से बौखला गई है लालू फैमिली
लालू यादव के विरोधी दलों के नेताओं का कहना है कि मोहम्मद शहाबुद्दीन की मौत के बाद बिहार का मुसलमान लालू से अलग होना चाहता है। शहाबुद्दीन की फैमिली को अपने साथ जोड़े रखने के लिए लालू यादव ने अपने बड़े बेटे तेजप्रताप यादव को सिवान भेजा है। इसी परेशानी को देखते हुए लालू यादव को कोरोना काल में भी हिंदू-मुस्लिम की बातें याद आ रही हैं।
-एजेंसियां

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