जानिए…बोको हराम की कहानी आखिर शुरू कैसे हुई?

इस सुन्नी जिहादी गुट का उभार उत्तरी नाइजीरिया में साल 2002 में हुआ. उत्तरी नाइजीरिया का ये इलाक़ा मुल्क का मुस्लिम आबादी बहुल क्षेत्र है. अफ्रीका के सबसे धनी देशों में से गिने जाने वाले नाइजीरिया का ये सबसे ग़रीब इलाक़ा है.
बहुत से लोग बोको हराम के उभार को नाइजीरिया के भीतर दक्षिणी और उत्तरी इलाक़े के बीच की ग़ैरबराबरी से भी जोड़कर देखते हैं.
बताया जाता है कि मुस्लिम मौलवी मोहम्मद यूसुफ़ ने नाइजीरिया में शरिया क़ानून को मानने वाली सरकार के गठन के इरादे से ये संगठन बनाया था.
बोको हराम इस्लाम के जिस स्वरूप को बढ़ावा देता है, उसमें मुसलमानों को वोटिंग या धर्मनिरपेक्ष शिक्षा जैसे पश्चिमी जीवन मूल्यों और शैली से प्रभावित किसी किस्म की राजनीतिक या सामाजिक गतिविधियों में भाग लेने की मनाही है.
यूसुफ़ ने इसके लिए एक मस्जिद और एक मदरसे का निर्माण कराया लेकिन उनके संगठन की दिलचस्पी का दायरा शिक्षा के क्षेत्र से बाहर फैलने लगा. उनका राजनीतिक मक़सद एक इस्लामी राज्य की स्थापना था और वो मदरसा जल्द ही एक जिहादी भर्ती केंद्र में बदल गया.
दुनिया को चौंकाया इस कुख्‍यात इस्‍लामी चरमपंथी गुट ने
गत वर्ष बोको हराम ने स्कूली बच्चों को अगवा करके दुनिया को एक बार फिर से चौंका दिया है. साल 2014 में 200 से ज़्यादा लड़कियों को अगवा करने के बाद ये इस्लामी चरमपंथी गुट कुख्यात हुआ था.
बीते वर्ष फिर ये ख़बरें आईं कि नाइजीरिया के उत्तर पश्चिमी राज्य कात्सिना के स्कूल पर हमले के बाद वहां से 300 से ज़्यादा बच्चे लापता है. इस बार बोको हराम ने जिस स्कूल को निशाना बनाया है, वो लड़कों का बोर्डिंग स्कूल है.
इस स्कूल में 800 बच्चों के नाम दर्ज हैं. हमले के दौरान कई बच्चे भाग गए लेकिन बहुत से बच्चे अभी भी लापता हैं जिनके बारे में ये माना जा रहा है कि उन्हें अगवा कर लिया गया है.
सरकार ने स्कूल पर हुए हमले के लिए आपराधिक गिरोहों को ज़िम्मेदार ठहराया लेकिन इसके बाद ताक़तवर इस्लामी चरमपंथी गुट बोको हराम ने इसकी जिम्मेदारी लेने का दावा किया.
पिछले एक दशक से भी ज़्यादा समय से नाइजीरिया में बोको हराम का ख़ौफ का कारोबार फल-फूल रहा है. अगवा किए जाने की घटनाएं और मिलिट्री और आम लोगों पर उनके हमले बदस्तूर जारी हैं.
नाइजीरिया की मिलिट्री
नाइजीरिया में जब से सेना और बोको हराम के बीच संघर्ष की शुरुआत हुई है, हज़ारों लोग इस लड़ाई में मारे जा चुके हैं और लाखों लोगों को अपना घर-बार छोड़कर कहीं और पनाह लेनी पड़ी है.
सरकार ये बात ज़ोर देकर कहती है कि उसने बोको हराम की ताक़त काफी हद तक कमज़ोर कर दी है लेकिन नाइजीरिया में बहुत से लोग इस सरकारी दावे पर यकीन करने से हिचकते हैं. उनके लिए बोको हराम आज भी बहुत ताक़तवर संगठन है.
एमनेस्टी इंटरनेशनल के अनुसार साल 2020 के पहले छह महीने में देश के उत्तरी इलाके में 1100 से ज़्यादा लोग ‘डाकुओं’ के हाथों मारे गए हैं. हालांकि ये बात पक्के तौर पर नहीं कही जा सकती कि इन सभी अपराधों के पीछे बोको हराम का ही हाथ है.
“नाइजीरिया की मिलिट्री ये कहती है कि उसने बोको हराम को बरबाद कर दिया है लेकिन इसके बावजूद सैनिकों और आम नागरिकों पर इस चरमपंथी संगठन के हमले जारी हैं.”
बोको हराम काम कैसे करता है?
साल 2009 में बोको हराम ने उत्तर पश्चिमी नाइजीरिया के बोर्नो राज्य की राजधानी मायदुगुरी में पुलिस थानों और सरकारी इमारतों पर कई हमलों को अंजाम दिया. इस हमले में बोको हराम के कई समर्थक मारे गए और हज़ारों चरमपंथी शहर छोड़कर भाग गए.
नाइजीरिया के सुरक्षाबलों ने बोको हराम के हेडक्वॉर्टर को अपने नियंत्रण में ले लिया. कई चरमपंथी लड़ाकों को गिरफ़्तार किया गया और उनके नेता मौलवी यूसुफ़ को मार डाला गया.
इसके बाद सुरक्षाबलों ने मौलवी यूसुफ़ की लाश को टेलीविज़न पर दिखलाया और कहा कि बोको हराम का ख़ात्मा कर दिया गया है.
लेकिन बोको हराम के लड़ाके अपने नए नेता अबू बकर शेखु के नेतृत्व एक बार फिर से संगठित हो गए.
इस चरमपंथी संगठन के हमलों का सिलसिला बढ़ने लगा. साल 2013 में बढ़ती हिंसा के मद्देनज़र नाइजीरिया ने बोको हराम के प्रभाव वाले राज्यों में आपातकाल लागू करने की घोषणा कर दी.
उसी साल बोको हराम को संयुक्त राष्ट्र ने एक चरमपंथी संगठन घोषित कर दिया. अबू बकर शेखु के नेतृत्व में बोको हराम के बर्बर तौर तरीके और ज़्यादा कुख्यात होने लगे.
आम लोगों पर बमबारी, बच्चों का खुदकुश हमलावर के तौर पर इस्तेमाल, स्कूलों से अगवा किए जाने की घटनाएं इसी सिलसिले का हिस्सा थीं. कात्सिना प्रांत में शुक्रवार की घटना भी कुछ ऐसी ही थी.
स्कूली बच्चों को अगवा किए जाने की घटना
साल 2014 में नाइजीरिया के उत्तर पूर्व के चिबोक के एक स्कूल में बच्चों को अगवा किए जाने की घटना ने पूरे देश को उद्वेलित कर दिया. बोको हराम ने इस स्कूल की 276 लड़कियों को अगवा कर लिया था.
इनमें से कुछ भागने में कामयाब रहीं तो 100 लड़कियों को बोको हराम के चरमपंथियों की रिहाई के एवज में छोड़ा गया. अगवा की गई उन लड़कियों में से 100 का आज तक कुछ पता नहीं चल पाया.
“बोको हराम ने मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के साथ-साथ स्थानीय लोगों को भी अगवा किया. इनमें से कुछ लोगों की हत्या कर दी गई. कुछ को फिरौती की रकम लेकर छोड़ दिया गया.”
अपहरण, फिरौत से मिली रकम और अल-क़ायदा जैसे दूसरे चरमपंथी संगठनों की मदद से बोको हराम ने अपनी कई गतिविधियों के लिए पैसे का इंतज़ाम किया.
शरणार्थियों के लिए काम करने वाली संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी ‘यूएनएचसीआर’ का कहना है कि नाइजीरिया में बोको हराम और सेना के बीच जारी संघर्ष से देश भर में क़रीब तीस लाख लोगों का विस्थापन हुआ है.
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने दोनों ही पक्षों पर मानवाधिकार हनन और युद्ध अपराध का आरोप लगाया है.
बोको हराम कितना ताक़तवर है?
नाइजीरिया के उत्तर पूर्वी इलाके और लेक चाड क्षेत्र में बोको हराम की सक्रियता बनी हुई है. मैसेजिंग ऐप ‘टेलीग्राम’ पर बोको हराम अपने ऑफ़िशियल एकाउंट्स से प्रोपेगैंडा जारी रखे हुए हैं.
ऐसा लगता है कि पश्चिमी अफ्रीका में सक्रिय चरमपंथी संगठन ‘इस्लामिक स्टेट’ के एक छोटे से गुट से बोको हराम की प्रतिस्पर्धा चल रही है और ये दावा उसी रणनीति का नतीजा हो सकती है.
“इस हमले के जिम्मेदार लोगों का पता लगाने के लिए अधिकारी पड़ताल कर रहे हैं लेकिन उत्तर पश्चिमी क्षेत्र में बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों की बेचैनी इस घटना से बढ़ गई है.”
हालांकि दुनिया के संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों के बारे में विशेषज्ञता रखने वाले थिंक टैंक ‘इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप’ का मानना है कि कड़ी सैनिक कार्रवाई से शांति की बहाली नहीं होगी. उनकी राय है कि इसके उलटे नतीजे हो सकते हैं.
-BBC

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