मुंबई में चल रहा किसान आंदोलन ध्वजारोहण के बाद समाप्‍त

मुंबई। मुंबई में चल रहे किसान आंदोलन का गणतंत्र दिवस पर ध्वजारोहण के बाद समापन हो गया है। 73 साल की किसान महिला जमुनाबाई जाधव के हाथों आजाद मैदान में तिरंगा लहरा कर इस आंदोलन की समाप्ति का ऐलान कर दिया गया है। ध्वजारोहण के मौके पर महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष नाना पटोले भी किसानों के साथ मौजूद थे। आजाद मैदान में डटे हुए यह किसान अब अपने गांव की तरफ निकलना शुरू कर चुके हैं। किसान बस, ट्रेन और जीप के जरिए अपने अपने गांव की तरफ रवाना हो रहे हैं। किसानों ने कहा है कि मुंबई का यह आंदोलन भले ही खत्म हो गया हो लेकिन दिल्ली में यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक केंद्र सरकार कृषि कानून वापस नहीं ले लेती।
अंबानी और अडानी के सभी उत्पादों का बहिष्कार करेंगे
किसान महासभा के नेतृत्व में मुंबई के आजाद मैदान में हो रहे किसान आंदोलन में किसान नेता अशोक ढवले ने केंद्र सरकार को जमकर खरी-खोटी सुनाई। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार अडानी और अंबानी को फायदा पहुंचाने के लिए यह तीन काले कानून लेकर आई है। लेकिन देश का किसान ऐसा होने नहीं देगा। उन्होंने महाराष्ट्र और देश के सभी किसानों से यह अपील की है कि वे अंबानी और अडानी की कंपनियों द्वारा बनाए गए सभी उत्पादों का बहिष्कार करें। ताकि उन्हें किसान एकता का पता चल सके। और सरकार यह तीनों किसान विरोधी कानून रद्द करने पर मजबूर हो जाए।
मेट्रो सिनेमा पर फाड़ी ज्ञापन की प्रतियां
पुलिस के साथ मुंबई के मेट्रो सिनेमा के पास एक घंटे से ज्यादा चली नोकझोंक के बाद किसान नेताओं ने राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को दिया जाने वाला ज्ञापन महाविकास अघाड़ी नेताओं की मौजूदगी में फाड़ दिया है। किसान नेताओं का कहना है कि वह अब राज्यपाल से मिलने नहीं जाएंगे। सब कुछ जानते हुए भी कोश्यारी गोवा मजा करने चले गए हैं अब सीधे राष्ट्रपति को ज्ञापन दिया जाएगा।
‘कोशयारी की होशियारी नहीं चलेगी’
किसान नेता अशोक ढवले इतने गुस्से में थे कि उन्होंने कहा कि कोश्यारी तुम्हारी होशियारी नहीं चलेगी। उन्होंने कहा कि राज्यपाल ने महाराष्ट्र के किसानों का अपमान किया है। जब उन्हें पता था कि महाराष्ट्र के दूर-दराज के इलाकों से किसान पैदल चलकर मुंबई आ रहे हैं और उन्होंने खुद मिलने के लिए समय दिया था। ऐसे में वे गोवा क्यों चले गए।
कंगना से मिलने का समय है लेकिन किसानों से नहीं
किसानों के इस महा आंदोलन में एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने भी शिरकत की उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र को ऐसा राज्यपाल कभी नहीं मिला है। जिसके पास कंगना से मिलने का वक्त है लेकिन किसानों से मिलने के लिए वक्त नहीं है। केंद्र सरकार ने यह कानून बनाकर डॉ. बाबा साहब आंबेडकर का भी अपमान किया है। संसद की प्रतिष्ठा का ख्याल ना रखते हुए इसे लाया गया है। अब किसानों का कहना है कि सरकार कानून वापस ले या ना ले लेकिन किसान इस सरकार और कानून दोनों को उखाड़ फेंकेगी। जिसकी शुरुआत हो चुकी है।
-एजेंसियां

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