गिनीज बुक में दर्ज हुआ खिचड़ी बनाने का वर्ल्ड रिकॉर्ड

करसोग/मंडी। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के तत्तापानी में मकर सक्रांति पर एक ही बर्तन में 1995 किलो खिचड़ी बनाने का नया वर्ल्ड रिकॉर्ड बन गया है। गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड्स के प्रतिनिधि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की उपस्थिति में अस्थायी प्रमाण पत्र जारी किया। स्‍थायी प्रमाण पत्र दो माह बाद जारी होगा। इससे पूर्व जो रिकॉर्ड बनाया गया है वह 2 वर्ष पूर्व 918 किलोग्राम खिचड़ी बनाने का है। होटल हॉलीडे होम के नंदलाल शर्मा डीजीएम की देखरेख में 25 शेफ ने खिचड़ी तैयार की है।

ये सामग्री डाली गई

405 किलोग्राम चावल, 195 किलोग्राम दाल 90 किलो घी, 55 किलो मसाले का इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा 1100 लीटर पानी का इस्तेमाल किया गया। 65 किलो इसमें मटर भी इस्तेमाल किए गए हैं। 1995 किलोग्राम तैयार की गई यह खिचड़ी लगभग 20000 लोगों को परोसी गई। बर्तन का भार 270 किलोग्राम है।

इससे पहले एक ही बर्तन में 918.8 किलो खिचड़ी बनाने का वर्ल्ड रिकॉर्ड था जो भारत के नाम ही दर्ज था। खिचड़ी का वजन गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के प्रतिनिधि ऋषि नाथ के सामने किया गया। इसकी आधिकारिक घोषणा आज मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने वर्ल्ड र‍िकॉर्ड का सर्ट‍िफ‍िकेट लेकर की ।

तत्तापानी में 25 शेफ ने पांच घंटे में खिचड़ी बनाकर तैयार की। इस खिचड़ी को बनाने में 405 किलो चावल, 190 किलो दाल, 90 किलो घी, 55 किलो मसाले व 1100 लीटर पानी का प्रयोग किया गया।

मुख्य शेफ एनएल शर्मा ने कहा कि पर्यटन विभाग की ओर से तत्तापानी में खिचड़ी मुख्य आकर्षण था। गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के प्रतिनिधि ऋषि नाथ का कहना है कि अब खिचड़ी का नया वर्ल्ड रिकॉर्ड बन गया है।

चार फीट ऊंचे और सात फीट चौड़े पतीले में खिचड़ी बनाई गई। यह पतीला हरियाणा से लाया गया था। करीब पांच घंटे बाद खिचड़ी तैयार हुई तो पतीले को चूल्‍हे से नीचे उतारने के लिए क्रेन बुलाई गई। क्रेन के माध्‍यम से पतीले को नीचे उतारा गया। तत्‍तापानी में मकर संक्रांति पर स्‍नान करने पहुंचने वाले हजारों लोगों में इस प्रसाद को बांटा गया।

हजारों लोगों ने किया स्नान व तुलादान

सतलुज नदी के तट पर सप्तऋषियों में शुमार जमदाग्नि ऋषि ने कई वर्ष तक तपस्या की थी। जमदाग्नि ऋषि ने वरदान दिया था कि जो व्यक्ति तत्तापानी के गर्म चश्मों में स्नान करेगा, उसके सभी चर्म रोग दूर हो जाएंगे और स्नान के बाद तुलादान करने वालों को कभी शनि ग्रह नहीं सताएगा। मकर संक्रांति पर स्नान व तुलादान के लिए कई हस्तियां तत्तापानी पहुंची थीं। सतलुज नदी के किनारे से निकलने वाले गर्म पानी के प्राकृतिक चश्मे अब कोल बांध के जलाशय में समा चुके हैं। श्रद्धालुओं के स्नान के लिए प्रशासन ने विशेष व्यवस्था की थी।

– Legend News

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