कानपुर शूटआउट और एनकाउंटर केस: SIT ने शिवली थाने में 30 साल की तैनाती का ब्‍यौरा मांगा

कानपुर। कानपुर शूटआउट और एनकाउंटर की जांच SIT ने बहुत तेजी के साथ शुरू की है। मंगलवार को जांच टीम ने पुलिस अधिकारियों से शिवली थाने में 1990 से अब तक तैनात रहे पुलिसकर्मियों का ब्यौरा मांगा है। हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे ने साल 1990 में ही अपराध की दुनिया में एंट्री की थी। विकास को राजनीतिक संरक्षण और पुलिसकर्मियों की हमदर्दी ने प्रदेश का सबसे बड़ा अपराधी बना दिया था। इसका खामियाजा 3 अप्रैल को 8 पुलिसकर्मियों को अपनी जान गवां कर भरना पड़ा। दुबे के सबसे बड़े मददगार पुलिस महकमें के ‘विभीषण’ थे।
गौरतलब है कि विभाग के विभीषण ही उसे बचाने का काम करते रहे। वह विभाग से जुड़ी हर एक गतिविधि की जानकारी विकास को देते रहे। विकास को पकड़ने के लिए पुलिस जब कभी भी दबिश देने की तैयारी करती थी, पुलिस विभाग के ‘विभीषण’ विकास दुबे तक जानकारी पहुंचा देते।
दरअसल, कुख्यात अपराधी विकास दुबे का एनकाउंटर हो जाने के बाद भी बिकरू गांव में दहशत बरकरार है। ग्रामीणों के मन से विकास का खौफ बाहर निकालने के लिए बिकरू गांव में अस्थायी पुलिस चौकी खोली जा रही है।
इसके बाद ग्रामीणों को शिकायत लेकर 18 किलोमीटर दूर चौबेपुर थाना नहीं जाना पड़ेगा।
विकास दुबे और पुलिस के कनेक्शन की जांच
SIT की टीम ने बीते रविवार को शिवली थाने पहुंचकर विकास दुबे से संबधित फाइलों को खंगाला। विकास दुबे और पुलिस विभाग के विभीषणों के कनेक्शन का पता लगाने के लिए SIT ने 1990 से 2020 तक शिवली थाने में तैनात रहे थानाप्रभारी, दरोगा, सीओ और सिपाहियों का मोबाइल नंबर समेत ब्योरा मांगा है। इसके साथ ही SIT ने विकास दुबे के मुकदमों में क्या प्रगति रही, उनमें क्या रिपोर्ट लगाई गई और विकास के गुर्गो के खिलाफ क्या कार्यवाही गई, इसकी रिपोर्ट भी पेश करने को कहा है।
शिवली थाने में दर्ज है 27 मुकदमे
हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे का गढ़ शिवली रहा है। शिवली थाने में विकास दुबे पर 27 मुकदमे दर्ज हैं। इनमें से चार मुकदमे हत्या के हैं। चौबेपुर और बर्रा थाने में हत्या के एक-एक मुकदमों में उसका नाम है। विकास दुबे पर चौबेपुर थाने में 15 से अधिक एफआईआर दर्ज है। कल्यानपुर थाने में 10 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। विकास दुबे ने साल 2001 में तत्कालीन दर्जा प्राप्त मंत्री संतोष शुक्ला की शिवली थाने में घुसकर हत्या कर दी थी।
इस हत्याकांड के बाद विकास दुबे के बिकरू गांव को कानपुर नगर के चौबेपुर थाने से जोड़ दिया गया था। साल 2001 से पहले विकास दुबे का बिकरू गांव कानपुर देहात के शिवली थाना अंतर्गत आता था।
बिकरू गांव में खुलेगी चौकी
बिकरू गांव के ग्रामीणों के मन से विकास दुबे के नाम खौफ निकालने के लिए गांव में चौकी खोली जाएगी। विकास दुबे का एनकाउंटर हो गया है। इसके बाद भी उसकी दहशत कायम है। आज भी ग्रामीण उसके खिलाफ खुलकर बोलने में घबराते हैं। ग्रामीणों का कहना है जब तक उसके गुर्गे जिंदा हैं, हमे खतरा है। बिकरू समेत आसपास के ग्रामीणों को अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए 18 किलोमीटर दूर चौबेपुर थाने जाना पड़ता था। एसएसपी दिनेश कुमार पी ने बताया कि गांव में ग्रामीणों के मन से डर निकालने के लिए गांव में चौकी बनाई जाएगी। चौकी प्रभारी समेत स्टाफ तैनात किया जाएगा।
-एजेंसियां

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