पर्वतारोहियों और पर्यटकों के लिए खोली गई कंजनजंगा चोटी

नई दिल्‍ली। भारत सरकार ने देश की एक मात्र 8 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में फैली कंजनजंगा की चोटी विदेशी पर्वतारोहियों, ट्रैकिंग करने वालों के लिए फिर से खोल दिया है। पर्यटन मंत्रालय के प्रस्ताव पर गृह मंत्रालय ने यह स्वीकृति दी है। कंचनजंगा के साथ ही 136 और चोटियों को भी सैलानियों के लिए खोल दिया गया है। इस फैसले का प्रभाव यह होगा कि अब विदेशी पर्वतारोहियों को सीधे गृह मंत्रालय से ही स्वीकृति लेनी होगी। इससे पहले तक रक्षा मंत्रालय और गृह मंत्रालय से यह स्वीकृति लेनी होती थी। अब जिन चोटियों को खोला गया है उनमें से 51 उत्तराखंड में, 47 हिमाचल प्रदेश में, 24 सिक्किम में और 15 जम्मू-कश्मीर में हैं। सरकार ने बंद करने के बाद फिर से इन चोटियों को कुछ खास कारण से खोल दिया है।
विश्व की तीसरी सबसे ऊंची चोटी कंजनजंगा नेपाल और सिक्किम बॉर्डर पर स्थित है। इसे 2000 में सिक्किम से स्थानीय लोगों के विरोध के बाद बंद कर दिया गया। सिक्किम के स्थानीय बौद्धों का कहना है कि जिस चोटी को वह अपने लिए पवित्र मानते हैं, उसकी चढ़ाई करना उनके धार्मिक विश्वास को आहत करना है। इससे पहले भी कई बार विदेशी पर्वतारोहियों के लिए इस चोटी को बंद किया जा चुका है। 1955 में भी ब्रिटिश पर्वतारोहियों की चढ़ाई के बाद इसे बंद किया गया था। उस वक्त पर्वतारोहियों ने बौद्धों की पवित्र मान्यतावाली चोटी से 20 फीट नीचे झंडा लगाया था।
पर्यावरण को ध्यान में रखकर भी लिया गया था फैसला
उत्तराखंड के नंदा देवी चोटी पर 1966 में सीआईए और आईबी ने चीन की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए न्यूक्लियर पावर लिस्टिंग डिवाइस वहां लगाया था। इसके बाद से इस चोटी को पर्वतारोहियों के लिए बंद कर दिया गया। 1974 में इसे फिर से खोला गया और 1983 में फिर से इसे बंद कर दिया गया। इसके बाद से इस चोटी को बंद ही रखा गया, लेकिन इसकी सिस्टर पीक कही जाने वाली सुनंदा देवी चोटी को खुला रखा गया। नंदा देवी को खोलने के 2 डर हैं। एक कि प्लूटोनियम डिवाइस जो लगाए जाने के कुछ समय बाद ही खो गई थी का विकिरण हो सकता है। दूसरी वजह है कि इस क्षेत्र के सुरम्य वातावरण पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है खास तौर पर नंदा देवी सेंचुरी पर।
पर्यटन रेवेन्यू पर भी चोटी बंद रहने का पड़ा असर
2000 में जब कंचनजंगा को बंद किया गया था तब सरकार ने 194 और चोटियों को भी खोला गया। पर्यटन राजस्व में होनेवाली कमी को देखते हुए सरकार ने यह फैसला लिया था। आखिरी बार विदेशी पर्वतारोहियों ने कंचनजंगा चोटी की यात्रा के लिए सिक्किम राज्य की सरकार को 20,000 अमेरिकी डॉलर दिए। इस वक्त नेपाल अकेले ही प्रति व्यक्ति से 11,000 डॉलर बतौर रॉयल्टी शुल्क वसूल कर रही है। इससे स्पष्ट होता है कि भारत सरकार को रेवेन्यू के लिहाज से खासा नुकसान हो रहा है। रेवेन्यू भी एक वजह है कि हर कुछ वर्षों पर सरकार कुछ चोटियों को खोलती है और कुछ को बंद कर देती है।
-एजेंसियां

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