हिन्दू संत धारा का सबसे बड़ा अखाड़ा है जूना अखाड़ा

हिन्दू संतों के मूलत: श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा सहित 13 अखाड़े हैं। इन अखाड़ों के संन्यासियों का कार्य है ध्यान, तप, साधना और धर्मिक प्रवचन देना। लोगों को धर्म का मार्ग बताना। महाराष्ट्र के पालघर में जिन दो साधुओं कल्पवृक्ष गिरि और सुशील गिरि की हत्या की गई और जूना अखाड़े से संबंधित थे। जूना अखाड़ा देश के सबसे बड़े अखाड़े के रूप में जाना जाता है, जिसमें साधुओं की संख्या 4 लाख से ज्यादा है।

महाराष्ट्र के पालघर में दो साधुओं की ड्राइवर समेत भीड़ द्वारा हत्या ने देश को झकझोर कर रख दिया है। दोनों साधु जूना अखाड़ा से जुड़े हुए थे। साधुओं की हत्या पर प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि ने भी साधुओं की हत्या की निंदा की है। उन्होंने सभी 13 अखाड़ों के साधुओं से अपील की है कि लॉकडाउन के दौरान यदि कोई संत ब्रह्मलीन होता है तो उसकी समाधि में शामिल होने से बचें। मृत संत भी किसी महंत की समाधि में शामिल होने जा रहे थे।

क्या है जूना अखाड़ा
पालघर मॉब लिंचिंग में मारे गए साधु कल्पवृक्ष गिरि और सुशील गिरि जिस अखाड़े से आते हैं, उसे जूना अखाड़ा के नाम से जाना जाता है। हिंदू धर्म मे संतों-महतों को कई अखाड़ों में बांटा गया है। माना जाता है कि इनकी स्थापना आदिगुरू शंकराचार्य ने की थी। उन्होंने बाहरी आक्रमणकारियों से धार्मिक लोगों को बचाने के लिए 7 अखाड़ों की स्थापना की। इनमें महानिर्वाणी, निरंजनी, जूना, अटल, आवाहन, अग्नि और आनंद शामिल हैं। अखाड़ा शब्द मल्ल युद्ध के रिंग के अर्थ में इस्तेमाल किया जाता है।

बताया जाता है कि जिस समय अखाड़ों की स्थापना की गई थी, उस समय भारत पर कई विदेशी आक्रमणकारियों के हमले हो रहे थे। ऐसे में अखाड़ों में संतों को ज्ञान के साथ-साथ अस्त्र-शस्त्र की भी शिक्षा भी दी जाती थी। समय बीतने के साथ अखाड़ों ने अपने सैन्य चरित्र को त्यागकर अपने को शास्त्रार्थ और धार्मिक विचार-विमर्श के केंद्र के रूप में स्थापित किया।

सबसे बड़ा अखाड़ा
मौजूदा वक्त में 13 अखाड़े अस्तित्व में हैं। इनमें जूना अखाड़ा सबसे बड़ा अखाड़ा माना जाता है, जिनमें साधुओं की संख्या 4 लाख से ज्यादा है। इन साधुओं में नागा साधु बहुतायत मात्रा मे हैं। साल 1145 में उत्तराखंड के कर्णप्रयाग में स्थापित जूना अखाड़ा का केंद्र उत्तर प्रदेश के वाराणसी में हनुमान घाट पर है। जूना अखाड़े में 5 परिवारों के सभी बड़े साधुओं की एक कमिटी बनती है। ये लोग मिलकर सभापति का चुनाव करते हैं।

इस पद पर चुने गए साधु का कार्यकाल आजीवन होता है। अखाड़े के सभापति का चुनाव कुंभ मेले के दौरान होता है। मौजूदा वक्त में आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि जूना अखाड़े के प्रमुख हैं। वह साल 1998 में इस पद पर नियुक्त हुए थे।

Dharma Desk: Legend News

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