पीएम मोदी से जो बाइडेन की बात, साउथ चाइना सी में दादागिरी दिखा रहे चीनी ड्रैगन को सख्‍त संदेश

वॉशिंगटन/नई दिल्‍ली। अमेरिका के राष्‍ट्रपति जो बाइडेन ने पद संभालने के बाद पहली बार भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्‍वतंत्र और मुक्‍त आवागमन पर बल देकर साउथ चाइना सी में दादागिरी दिखा रहे चीनी ड्रैगन को सख्‍त संदेश दिया।
यही नहीं, बाइडेन और पीएम मोदी ने ऐलान किया कि Quad के जरिए हिंद-प्रशांत क्षेत्र में क्षेत्रीय अखंडता और मजबूत क्षेत्रीय ढांचे को समर्थन दिया जाएगा। माना जा रहा है कि जो बाइडेन का इशारा पूर्वी लद्दाख में चीन के सैनिक जमावड़े की ओर था।
विश्‍लेषकों का मानना है कि भारतीय प्रधानमंत्री के साथ पहली ही बातचीत में क्‍वाड पर जोर देकर अमेरिकी राष्‍ट्रपति जो बाइडेन ने अपने इरादे साफ कर दिए हैं। क्‍वाड एक ऐसा संगठन है जिससे चीन टेंशन में आ गया है और वह कई बार भारत को इससे दूर रहने के लिए धमका चुका है। साथ ही नसीहत दे रहा है कि भारत क्‍वॉड से दूर रहे और गुटन‍िरपेक्षता की अपनी नीति का पालन करे। हालांकि भारत अपने इरादे पर अटल है और चीन के धोखे का करारा जवाब देने के लिए क्‍वाड को मजबूत करने के लिए कमर कस चुका है।
QUAD फ्रेमवर्क में शामिल चारों देश जल्द ही कर सकते हैं पहली बैठक
द क्वॉड्रिलैटरल सिक्‍योरिटी डायलॉग (QUAD) फ्रेमवर्क में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं और इसमें ब्रिटेन के भी शामिल होने की बात चल रही है। कनाडा ने भी इस संगठन की ओर सकारात्‍मक रुख दिखाया है। वहीं चीन की आक्रामकता झेल रहे कई दक्षिण पूर्वी एशियाई देश जैसे वियतनाम भी इस संगठन में जुड़ सकते हैं। पीएम मोदी और जो बाइडेन ने क्‍वॉड पर उस समय जोर दिया है जब QUAD फ्रेमवर्क में शामिल चारों देश जल्द ही पहली बैठक कर सकते हैं।
जापान टाइम्स के मुताबिक नेशनल सिक्योरिटी अडवाइजर जेक सलीवन ने क्वॉड को वह नींव बताया है जिसके आधार पर अमेरिका अपनी इंडो-पैसिफिक नीति निर्धारित करेगा। अखबार ने सूत्र के हवाले से लिखा है कि अमेरिकी ने बाकी देशों को ऑनलाइन मीटिंग करने का सुझाव दिया है। इस मीटिंग के दौरान ‘फ्री ऐंड ओपन इंडो-पैसिफिक’ को सच करने पर चर्चा की जाएगी। इस क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य मौजूदगी को देखते हुए यह कदम बेहद अहम है।
जापान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक पहली बार क्वॉड फ्रेमवर्क के चारों देशों के विदेश मंत्रियों ने 2019 में न्यूयॉर्क में बैठक की थी और फिर कोरोना वायरस की महामारी के बीच टोक्यो में पिछले साल मुलाकात की गई थी। अक्टूबर में हुई बैठक में अमेरिका के तत्कालीन विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो चीन पर जमकर बरसे थे। उन्होंने चीन पर आरोप लगाया था कि वह अपने पड़ोसी दक्षिण एशियाई देशों पर दबदबा कायम करने के लिए आर्थिक शक्ति का इस्तेमाल कर रहा है।
जो बाइडेन और पीएम मोदी में क्‍या-क्‍या हुई बात
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन से फोन पर बात की और उनकी सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं। पीएम मोदी ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है। भारत और अमेरिका के संबंधों को देखते हुए ये बातचीत बहुत अहम मानी जा रही है। बाइडन के चुनाव जीतने के बाद से ही लगातार ये कयास लगाए जा रहे थे कि जिस तरह भारत और अमेरिका के संबंध राष्ट्रपति ट्रंप के समय थे क्या वैसे ही संबंध बाइडेन के साथ भी रहेंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा, ‘जो बाइडेन से बात की और उन्हें सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं। हमने क्षेत्रीय मुद्दों साझा प्राथमिकताओं पर चर्चा की। हम जलवायु परिवर्तन के खिलाफ अपने सहयोग को आगे बढ़ाने पर भी सहमत हुए।’ पीएम मोदी ने आगे कहा कि राष्ट्रपति जो बाइडेन और मैं एक नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम भारत-प्रशांत क्षेत्र की शांति और सुरक्षा के लिए अपनी रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए तत्पर हैं।
क्या है क्‍वॉड जानिए
द क्वॉड्रिलैटरल सिक्‍यॉरिटी डायलॉग (क्‍वॉड) की शुरुआत वर्ष 2007 में हुई थी। हालांकि इसकी शुरुआत वर्ष 2004-2005 हो गई जब भारत ने दक्षिण पूर्व एशिया के कई देशों में आई सुनामी के बाद मदद का हाथ बढ़ाया था। क्‍वाड में चार देश अमेरिका, जापान, ऑस्‍ट्रेलिया और भारत शामिल हैं। मार्च में कोरोना वायरस को लेकर भी क्वॉड की मीटिंग हुई थी। इसमें पहली बार न्यूजीलैंड, द. कोरिया और वियतनाम भी शामिल हुए थे।
-एजेंसियां

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