जापान: 200 साल के इतिहास में राजगद्दी छोड़ने वाले पहले सम्राट

जापान के सम्राट अकिहितो आज अपनी गद्दी छोड़ देंगे. जापान के शाही घराने के 200 साल के इतिहास में ऐसा करने वाले वो पहले राजा होंगे. राजगद्दी छोड़ने की प्रक्रिया शाही महल में कई निजी रीति रिवाजों के साथ शुरू हो चुकी है.
85 साल के सम्राट को अपनी गद्दी छोड़ने के लिए बाक़ायदा क़ानून बनाकर इजाज़त दी गई क्योंकि सम्राट अकिहितो ने अपनी बढ़ती उम्र और गिरती सेहत के कारण अपनी ज़िम्मेदारियों का ठीक से निर्वाह करने में असमर्थता जताई थी.
सम्राट अकिहीतो के बेटे युवराज नारोहितो बुधवार को राजगद्दी पर बैठेंगे.
जापान में राजा के पास कोई राजनीतिक शक्ति नहीं होती है लेकिन वो एक राष्ट्रीय प्रतीक के तौर पर देखे जाते हैं.
राजगद्दी छोड़ने की प्रक्रिया में सम्राट अकिहितो ने राजगद्दी छोड़ने की जानकारी सबसे पहले राजघराने के कथित कुलदेवता और अपने पूर्वजों को सांकेतिक तौर पर दी.
उसके बाद गद्दी छोड़ने की आधिकारिक प्रक्रिया शाही महल में होगी.
स्थानीय समयानुसार शाम पांच बजे (भारत में दिन के साढ़े 12 बजे) सम्राट अकिहितो और महारानी मिशिको शाही महल में आएंगे और ये पूरी प्रक्रिया क़रीब 10 मिनट चलेगी. इस दौरान महल में क़रीब 300 मेहमान होंगे.
अकिहितो सम्राट की हैसियत से अपना आख़िरी भाषण देंगे, हालांकि तकनीकी तौर पर वो मंगलवार की रात 12 बजे तक वो सम्राट बने रहेंगे.
बुधवार की सुबह नए राजा नारोहितो शाही ख़ज़ाने के वारिस घोषित कर दिए जाएंगे.
सम्राट अकिहीतो ने आख़िरी राजगद्दी क्यों छोड़ी?
जापानी राजघराने के क़रीब 200 साल के इतिहास में अकिहितो पहले राजा हैं जो अपनी इच्छा से राजगद्दी छोड़ रहे हैं. साल 2016 में सम्राट अकिहितो ने देश के नाम एक ख़ास संबोधन में कहा था कि उन्हें इस बात का डर है कि उनकी बढ़ती उम्र के कारण वो एक राजा की ड्यूटी ठीक तरह से नहीं निभा पाएंगे. उसी समय उन्होंने इस बात के साफ़ संकेत दिए थे कि वो राजगद्दी छोड़ना चाहते हैं.
उसके एक साल बाद 2017 में जापान की संसद ने एक ख़ास क़ानून बनाकर उन्हें राजगद्दी छोड़ने की इजाज़त दी.
कौन होंगे अगले सम्राट?
राजकुमार नारोहितो जापान के 126वें राजा होंगे. अकिहितो ने 1989 में राजगद्दी संभाली थी. वो 30 साल तक सम्राट रहे और अब अपनी मर्ज़ी से राजगद्दी छोड़ रहे हैं.
59 साल के नारोहितो ऑक्सफ़ोर्ड में पढ़े हैं और 28 साल की उम्र में युवराज घोषित कर दिए गए थे.
1986 में एक चाय पार्टी के दौरान उनकी मुलाक़ात प्रिंसेज़ मसाको ओवाडा से हुई जो बाद में 1993 में उनकी पत्नी बनीं.
नारोहीतो और मसाको को सिर्फ़ एक बेटी है जिनका नाम प्रिंसेज़ आइको है और वो 18 साल की हैं. लेकिन जापान के मौजूदा क़ानून के तहत महिलाओं को राजगद्दी नहीं मिलती है इसलिए वो जापान की अगली वारिस नहीं हैं.
इसलिए नए सम्राट नारोहीतो के भाई राजकुमार फ़ुमिहितो अगले वारिस हैं.
जापानी लोग इसे कैसे देख रहे हैं?
जापान में इस समय एक सप्ताह की सालाना छुट्टी मनाई जाती है. लेकिन सम्राट के राजगद्दी छोड़ने और नए राजा के राज्यअभिषेक के कारण इस छुट्टी को बढ़ाकर दस दिनों की कर दी गई है.
लोग इसे एक त्यौहार की तरह मना रहे हैं. 30 साल पहले मौजूदा सम्राट अकिहितो जब गद्दी पर बैठे थे तब पूरे जापान में शोक मनाया जा रहा था क्योंकि उस समय अकिहितो के पिता और तत्कालीन सम्राट की मौत हुई थी.
लेकिन इस बार लोग ख़ुशियां मना रहे हैं. छुट्टी पर जा रहे हैं, सिनेमाघरों और बाज़ारों में भारी भीड़ देखी जा रही है. राजगद्दी छोड़ने से जुड़े समारोह को लाइव प्रसारित किया जा रहाहै तो लोग घरों में या फिर बाज़ार में रहकर टीवी पर देख रहे हैं.
राजगद्दी छोड़ने के बाद अकिहितो को जोको का ख़िताब दिया जाएगा जिसका अर्थ होता है चक्रवर्ती महाराज.
जापान राजघराना क्यों अहम है?
ये दुनिया में अकेला ऐसा राजघराना है जो पिछले 2600 साल से लगातार जापान पर शासन करता चला आ रहा है. जापान के सम्राट को भगवान समझा जाता था लेकिन अकिहीतो के पिता सम्राट हिरोहितो ने दूसरे विश्व युद्ध में जापान की हार के बाद सार्वजनिक तौर पर कहा था कि उनके पास कोई दैवी शक्ति नहीं है.
विश्व युद्द के बाद जापान को जब आत्मसमर्पण करना पड़ा था तो उसके रुतबे को काफ़ी ठेस पहुंचा था लेकिन मौजूदा सम्राट अकिहीतो ने जब 1989 में राजगद्दी संभाली तब से उन्होंने जापान की शान-ओ-शौकत को दोबारा बहाल करने में बहुत हद तक सफलता पाई.
जापान के राजा आम जनता से शायद ही कभी मिलते थे लेकिन सम्राट अकिहितो ने इसे बदल दिया और आम लोगों से मेल-जोल करने लगे.
सम्राट अकिहीतो पिछले 200 सालों में राजगद्दी छोड़ने वाले पहले राजा हैं लेकिन ऐसा नहीं है कि जापान के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है.
जापान के राष्ट्रीय प्रसारक एनएचके के अनुसार क़रीब आधे राजा और रानियों ने आठवी शताब्दी से 19वीं शताब्दी के दौरान राजगद्दी छोड़ दी थी.
-एजेंसियां

50% LikesVS
50% Dislikes

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *