प्रतिबंध के बाद जमात के नेताओं की संपत्तियां व दफ्तर सील, 4 दिन में 300 गिरफ्तार

नई दिल्‍ली। केंद्र सरकार ने जम्‍मू कश्‍मीर में जमात-ए-इस्लामी पर बैन लगाने के बाद बडी़ कार्रवाई करते हुए उनके नेताओं के कई घरों, दफ्तरों और संपत्तियों को सील कर दिया है, अभीतक जमात-ए-इस्लामी के तकरीबन 200 नेता व कार्यकर्ता गिरफ्तार किए जा चुके हैं।

आज शनिवार को भी कश्मीर में कई जगहों पर अधिकारियों ने जमात-ए-इस्लामी के कार्यकर्ताओं के घरों और संपत्तियों को सील किया। मजिस्ट्रेट ने जमात-ए-इस्लामी से जुड़े घरों और संस्थानों को सील करने का आदेश दिया था।

इससे पहले सुरक्षा बलों ने पुलवामा में 14 फरवरी को हुए आतंकवादी हमले के बाद अलगाववादी ताकतों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी तथा जमात-ए-इस्लामी जम्मू-कश्मीर के कई नेताओं और समर्थकों को गिरफ्तार किया था।

माना जा रहा है कि बीते चार दिनों में करीब 200 से अधिक जमात-ए-इस्लामी जम्मू-कश्मीर के नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है। वहीं पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने जम्मू कश्मीर में जमात-ए-इस्लामी पर पाबंदी लगाने के केंद्र के फैसले की शुक्रवार को निंदा की और कहा कि यह राज्य के राजनीतिक मुद्दे से बाहुबल से निपटने की केंद्र सरकार की पहल का एक अन्य उदाहरण है।

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि Jamaate-I-Islami (JeL) ही जम्मू कश्मीर राज्य के सबसे बड़े आतंकवादी संगठन हिज्बुल मुजाहिदीन और हुर्रियत कांफ्रेंस के गठन के लिए जिम्मेदार है। सरकारी अधिकारियों के अनुसार यह संगठन दशकों से अपने अलगाववाद एवं पाकिस्तान समर्थन एजेंडे के तहत राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के लिए राज्य में अलगाववादी एवं आतंकवादी तत्वों को वैचारिक और साजो-सामान संबंधी सहयोग प्रदान कर रहा है।

एक अधिकारी ने कहा, ‘जमात-ए-इस्लामी जम्मू कश्मीर में सक्रिय सबसे बड़े आतंकवादी संगठन हिज्बुल मुजाहिदीन के गठन के लिए जिम्मेदार है। पाकिस्तान के सहयोग से ऑल पार्टी हुर्रियत कांफ्रेंस के गठन के पीछे भी जमात-ए-इस्लामी का ही दिमाग है।’

-एजेंसी

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