किसी भी रिश्ते की बेहतरी के लिए ये ज़रूरी है…

अमरीका के उप-राष्ट्रपति माइक पेंस किसी और महिला के साथ अकेले कभी डिनर या लंच नहीं करते हैं. वो कहते हैं कि ऐसा नियम उन्होंने अपनी पत्नी कैरेन के प्रति वफ़ादारी के लिए बनाया है. उन्हें पत्नी के प्रति वफ़ादार रहने की प्रेरणा अपनी धार्मिक आस्थाओं से मिलती है.
कई लोग माइक पेंस के इस नियम की तारीफ़ करते हैं. कई लोगों का ये मानना है कि ये दूसरी महिलाओं का अपमान है.
वैसे, माइक पेंस का फ़ैसला कोई अजूबा नहीं है. एक सर्वे के मुताबिक़, 5.7 प्रतिशत लोग ये मानते हैं कि किसी रिश्ते में रहने के बावजूद किसी अन्य महिला या पुरुष के साथ डिनर या लंच पर जाना बेवफ़ाई है.
भले ही आप माइक पेंस और कैरेन के बारे में कुछ भी सोचें, लेकिन उन्होंने कम से कम अपने रिश्ते में मर्यादा की एक सीमा-रेखा तो खींच ही रखी हैं.
वैसे, ज़्यादातर लोगों ने अपने संबंध में बेवफ़ाई क्या होती है, इसकी कोई सीमा या परिभाषा तय नहीं की होती है. उन्हें समझ भी नहीं होती कि आख़िर वफ़ादारी और बेवफ़ाई के बीच क्या फ़र्क़ होता है.
असली मामला तो संवादहीनता और बेवफ़ाई को लेकर समझदारी की कमी का है. हमारे समाज में रिश्तों में धोखे की घटनाएं बहुत आम हैं. लेकिन, हर जोड़ा ये मानता है कि उसका साथी उसके प्रति वफ़ादार है.
कितने लोग बेवफ़ाई करते हैं, इसका कोई सही आँकड़ा जुटा पाना बहुत मुश्किल है. इसकी बड़ी वजह ये है कि रिश्ते में विश्वासघात को लेकर लोग सही बात शायद ही बताते हों.
पहले कहा जाता था कि 75 प्रतिशत मर्द और 69 प्रतिशत औरतें बेवफ़ाई करते हैं. लेकिन, हालिया रिसर्च ये कहती हैं कि बेवफ़ाई के मोर्चे पर महिलाएं मर्दों से ज़रा भी कम नहीं हैं.
पर, मज़े की बात ये है कि केवल पांच फ़ीसद लोग ही ये मानते हैं कि उनके साथी उनके साथ छल करेंगे या कर रहे हैं. ज़्यादातर लोग अपने साथी पर आंख मूंदकर भरोसा करते हैं.
बेवफ़ाई का मतलब क्या?
कालगरी यूनिवर्सिटी की सूसन बून कहती हैं कि, “जो लोग डिप्रेशन के शिकार नहीं हैं, वो आम तौर पर अपने साथी पर आंख मूंद कर यक़ीन करते हैं. वो ये कभी सोचते भी नहीं कि उनका साथी उन्हें धोखा दे सकता है या सकती है.”
वैसे, इसकी एक बड़ी वजह ये भी है कि बेवफ़ाई की परिभाषा अलग-अलग लोगों के लिए अलग-अलग होती है. सूसन बून कहती हैं कि, “लोग अक्सर इस बात का ग़लत अनुमान लगाते हैं कि किसी भी रिश्ते में बेवफ़ाई का मतलब क्या होता है. इसकी बड़ी वजह ये है कि लोग इस बारे में बात करके कोई मर्यादा तय ही नहीं करते. हर इंसान के लिए धोखे का अलग मतलब होता है.”
क़रीब 70 प्रतिशत लोग ऐसे हैं, जिन्होंने अपने पार्टनर से कभी भी बेवफ़ाई को लेकर कोई चर्चा नहीं की. क्या किसी रिश्ते में रहते हुए डेटिंग ऐप डाउनलोड करना धोखा है?
डेटिंग ऐप टिंडर के 18 से 25 प्रतिशत ग्राहक पहले से किसी न किसी रिश्ते में बंधे हुए हैं. इसका मतलब तो यही है कि वो एक रिश्ते में होने के बावजूद दूसरे साथी की तलाश कर रहे हैं. इनमें से ज़्यादातर लोग कैज़ुअल सेक्स की तलाश में ऐसा करते हैं.
किसी के लिए दूसरे से सेक्स करना धोखा है. तो कोई सिर्फ़ मैसेज पर बात करने को बेवफ़ाई मानता है. जज़्बाती बेवफ़ाई की परिभाषा तय करना तो और भी मुश्किल है. दफ़्तर में अक्सर लोग अपने किसी साथी से ज़्यादा नज़दीकी महसूस करने लगते हैं. उसका इंतज़ार होता है. उसकी आमद से वो बहुत ख़ुश हो जाते हैं. अब इसे किसी रिश्ते में बंधे इंसान की बेवफ़ाई माना जाए या नहीं?
ज़्यादातर लोगों का मानना है कि अगर हम किसी संबंध की मर्यादाएं पहले से तय कर दें, तो बेवफ़ाई को समझना और उसे पकड़ना, दोनों ही आसान हो जाएगा. किसी भी रिश्ते की बेहतरी के लिए ये ज़रूरी भी है.
बहुत कुछ आपके दोस्तों पर भी निर्भर करता है. अगर आप के ज़्यादातर दोस्त ऐसे हैं जिन्होंने बेवफ़ाई की है, तो आपका भी अपने साथी को धोखा देना कमोबेश तय है. आम तौर पर हम अपने जैसे मिज़ाज के लोगों के ही क़रीब होते हैं.
बेवफ़ाई करते हैं तो क्या करना चाहिए?
किसी रिश्ते में बंधे लोग धोखे को अनैतिक मानते हैं. ऐसे में अगर किसी ने बेवफ़ाई की तो उसे क्या करना चाहिए? अपनी ग़लती मान लेनी चाहिए?
ज़्यादातर लोग इसका जवाब “हां” में देते हैं क्योंकि 90 प्रतिशत लोगों ने ये कहा कि अगर उनके साथी ने धोखा दिया है, तो वो ये बात जानना चाहेंगे.
तमाम रिसर्च ये इशारा करती हैं कि लोग किसी भी रिश्ते में वफ़ादारी को बहुत अहमियत देते हैं. उन्हें लगता है कि धोखा देने से उन्हें जज़्बाती नुक़सान होगा. यही वजह है कि बेवफ़ाई की वजह से ही अमरीका में सबसे ज़्यादा तलाक़ होते हैं. अगर आप ने रिश्ते में छल किया है, तो इसका इक़रारनामा आप के साथी को तकलीफ़ पहुंचाएगा.
वैसे, जो लोग आत्ममुग्ध होते हैं उन्हें ऐसी स्वीकारोक्ति से ज़्यादा तकलीफ़ होती है. कई लोग तो डिप्रेशन में भी चले जाते हैं. वहीं, कुछ अपने साथी की बेवफ़ाई से बहुत आक्रामक हो जाते हैं.
अगर कोई एक बार बेवफ़ाई करता है तो आम तौर पर उसके साथी उसे माफ़ कर देते हैं. कई बार इस वजह से रिश्ते टूटते भी हैं लेकिन अक्सर लोग ऐसे धोखों के बावजूद रिश्तों को बचाने की कोशिश करते हैं हालांकि अगर धोखा देना आदत ही बन जाए तो फिर कोई विकल्प नहीं रहता, सिवा इसके कि उस रिश्ते से पिंड छुड़ा लिया जाए.
इस में कोई दो राय नहीं कि हमारे समाज में बेवफ़ाई की घटनाएं आम हो रही हैं. हर रिश्ते में इसकी गुंजाइश रहती है. इसलिए शायद इस बारे में बात करने का अब सही वक़्त आ चुका है.
-BBC

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