ISRO का बयान: विक्रम लैंडर से संपर्क करने की कोशिश जारी

चेन्‍नै। इंडियन स्पेस रिसर्च सेंटर (ISRO) ने मंगलवार को बयान जारी कर कहा कि एजेंसी चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर से संपर्क स्थापित करने की कोशिश कर रही है। चंद्रयान के ऑर्बिटर ने इसकी सटीक लोकेशन का पता भी लगा लिया है। ISRO के चेयरमैन के सिवन ने भी रविवार को कहा था कि ऑर्बिटर ने विक्रम की लोकेशन का पता लगा लिया है। इसरो का कहना है कि उनकी टीम लगातार सिग्नल भेजकर लैंडर से सम्पर्क की कोशिश कर रही है। ऐसे में विक्रम से सम्पर्क स्थापित करने को लेकर कई ऐसे सवाल हैं, जो हर किसी के दिमाग में घूम रहे होंगे। जैसे विक्रम से कैसे संपर्क किया जा रहा है, इस कोशिश के लिए ISRO के पास कितना समय है, संपर्क स्थापित हुआ तो विक्रम कैसे जवाब देगा… इन सब सवालों के जवाब खोजने की कोशिश की।
ऐसे हो रही है सम्पर्क की कोशिश
ISRO को वह फ्रिक्वेंसी पता है, जिसमें विक्रम के साथ कम्युनिकेट किया जाना है। ऐसे में उनकी टीम लगातार इस उम्मीद के साथ अलग-अलग कमांड भेज रही है कि विक्रम किसी कमांड पर जवाब दे। हालांकि अभी तक कोई कामयाबी हाथ नहीं लगी है।
ISRO सम्पर्क के लिए कर्नाटक के एक गांव बयालालु में लगाए गए 32 मीटर ऐंटीना का इस्तेमाल कर रहा है। इसका स्पेस नेटवर्क सेंटर बेंगलुरू में है। ISRO एक और रास्ते का इस्तेमाल कर रहा है। ISRO की कोशिश है कि ऑर्बिटर के जरिए विक्रम से सम्पर्क स्थापित हो सके लेकिन इसमें भी अभी तक सफलता नहीं मिली है।
कैसे जवाब दे सकता है विक्रम?
विक्रम तीन ट्रांसपोंडर्स और एक तरफ आरे ऐंटीना से इक्विप्ड है। इसके ऊपर एक गुम्बद के जैसा यंत्र लगा है। विक्रम इन्हीं इक्विपमेंट का इस्तेमाल करके पृथ्वी या इसके ऑर्बिटर से सिग्नल लेगा और फिर उनका जवाब देगा लेकिन ग्राउंड स्टेशन से सम्पर्क टूट जाने के बाद से 72 घंटे से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी विक्रम ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि अभी तक ISRO ने अधिकारिक तौर पर इसकी जानकारी नहीं दी है कि विक्रम के ये इक्विपमेंट सही सलामत हैं या उन्हें क्षति पहुंची है। इन सिस्टम को काम करने के लिए पावर की जरूरत भी होगी।
क्या विक्रम के पावर/ऊर्जा है?
विक्रम की बाहरी बॉडी पर सोलर पैनल लगा है। यदि विक्रम ने तय योजना के मुताबिक लैंडिंग की होगी तो यह सूरज से ऊर्जा लेकर पावर जनरेट कर लेगा।
इसके अलावा विक्रम में बैटरी सिस्टम भी है लेकिन यह साफ नहीं है कि लैंडर पावर जनरेट कर रहा है या नहीं। ISRO ने अभी तक इसकी भी जानकारी नहीं दी है। हो सकता है कि हार्ड लैंडिंग के कारण इसके कुछ इक्विपमेंट टूट गए हों लेकिन जैसा कि इसरो के चेयरमैन ने कहा कि वे अभी भी उसके डेटा का विश्लेषण कर रहे हैं।
ISRO के पास इस कोशिश के लिए कितना समय?
ISRO के प्री-लॉन्च अनुमान के मुताबिक विक्रम को सिर्फ एक लुनार डे के लिए ही सीधी सूरज की रोशनी मिलेगी। इसका मतलब है कि 14 दिन तक ही विक्रम को सूरज की रोशनी मिलेगी। ऐसे में ISRO इन 14 दिन तक अपनी कोशिश जारी रख सकता है। यदि ISRO को इस बात की जानकारी भी मिल जाए कि इसके कम्युनिकेशन इक्विपमेंट क्षतिग्रस्त हो चुके हैं तो 14 दिने से पहले भी संपर्क की कोशिश खत्म कर सकता है। 14 दिन के बाद एक लंबी काली रात होगी। यदि लैंडर ने सॉफ्ट लैंडिंग की होती तो भी इस अंधेरी रात में बचे रह पाना उसके लिए मुश्किल होता।
-एजेंसियां

50% LikesVS
50% Dislikes

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *