अंपायरिंग को लेकर एक बार फिर विवादों में सबसे अधिक पैसे वाला टूर्नामेंट IPL

मुंबई से हार कर चेन्नई की टीम भले ही प्लेऑफ़ की रेस से बाहर हो गई है लेकिन इस मैच के पहले ओवर ने एक बार फिर आईपीएल IPL को विवादों में लपेट लिया है.
मुंबई ने चेन्नई को पहले बैटिंग के लिए उतारा और पहले ही ओवर में डेवोन कॉनवे एलबीडब्ल्यू आउट दे दिए गए. कॉनवे रिव्यू लेना चाहते थे लेकिन डीआरएस मौजूद ही नहीं था.
बताया गया कि बिजली से जुड़ी तकनीकी ख़ामी की वजह से डीआरएस कुछ समय के लिए उपलब्ध नहीं है.
यहाँ सबसे पहले कॉनवे के बारे में दो शब्द- ये वो इन्फॉर्म ओपनर हैं, जिन्होंने चेन्नई को पिछले तीन मुक़ाबले में अच्छी शुरुआत दी और नाबाद 85, 56 और 87 रनों की पारी खेली. इतना ही नहीं, इन तीन पारियों में से दो में पहले विकेट के लिए शतकीय साझेदारी निभाई तो तीसरे में अर्धशतकीय.
वापस आते हैं कॉनवे के आउट होने और डीआरएस के मौजूद न होने की चर्चा पर. तो जो गेंद उनके पैड से लगी और वे आउट दे दिए गए वो चौथे स्टंप्स की ओर जा रही थी. यह तब मैच देख रहे दर्शक, जानकार और कमेंट्री कर रहे क्रिकेट के दिग्गजों ने भी कहा.
इस गेंद की रिप्ले में दिखा कि डेनियल सम्स ने यह गेंद एक एंगल से डाली थी, जो टप्पा खाने के बाद बाएं हाथ के कॉनवे के पैड पर लगी और लेग स्टंप्स से बाहर की ओर जा रही थी. लेकिन अंपायर रविकांत रेड्डी के फ़ैसले को रिव्यू करने का कोई तरीक़ा मौजूद नहीं था.
कमेंट्री कर रहे सुनील गावस्कर ने कहा, “गेंद जब उनके पैड पर लगी तब ऑफ़, मिडिल और लेग स्टंप्स का कुछ हिस्सा दिख रहा था तो संभावना ये है कि वो गेंद लेग स्टंप्स से बाहर की ओर जाती.”
चेन्नई की शुरुआती विकेटें तेज़ी से गिरती देख इसके चाहने वालों में हड़कंप मच गया. लोग डीआरएस की ग़ैरमौजूदगी पर अपनी नाराज़गी ज़ाहिर करने लगे. सोशल मीडिया पर कुछ ही देर में हज़ारों की संख्या में प्रतिक्रियाएं आने लगीं.
चेन्नई और धोनी के फैन्स कॉनवे के आउट होने पर डीआरएस की ग़ैर मौजूदगी और अंपायरिंग पर भड़क गए.
पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने ट्वीट किया, “आप क्रिकेट के सबसे अधिक पैसे वाले टूर्नामेंट खेल रहे हैं और तकनीकी कारणों से आपके पास डीआरएस उपलब्ध नहीं है जिससे पहले ही ओवर में अंपायरिंग का एक ग़लत फ़ैसला होता है. आईपीएल 2022 में अंपायरिंग अच्छी नहीं रही है.”
हालांकि कमेंटेटर हर्ष भोगले ने डीआरएस किन परिस्थितियों में मैच में उपलब्ध नहीं होता इस पर विस्तार से बताया.
उन्होंने कहा, “मैं ऐसे कई टूर्नामेंट और द्विपक्षीय मैचों में रहा हूँ जहाँ मैच बग़ैर डीआरएस के कुछ देर खेले गए हैं. ये एक ग्लोबल प्रोटोकॉल है. जैसे ही मशीनें तैयार होती हैं, डीआरएस फिर शुरू हो जाता है. यहां विश्वस्तरीय प्रोडक्शन सेटअप है.”
हर्ष भोगले ने बताया, “जब बिजली जाती है, जेनरेटर अपने आप चालू हो जाते हैं और इस तरह कवरेज़ जारी रहती है. लेकिन कुछ मशीनों को फिर से चालू (रीबूट) करने की ज़रूरत पड़ती है, जिसमें समय लगता है और तब उतनी देर के लिए डीआरएस मैच में मौजूद नहीं होता है. पूरी दुनिया में यही स्थिति है. इसका बजट से कोई लेना देना नहीं है.”
चेन्नई सुपरकिंग्स के कोच स्टीफन फ्लेमिंग ने कहा, “यह थोड़ा दुर्भाग्यपूर्ण था कि ये उस समय हुआ. हम थोड़े निराश थे, लेकिन ये तो खेल का ही हिस्सा है. निश्चित रूप से हमारी शुरुआत अच्छी नहीं हुई.”
मानवीय चूक
तो तकनीक के ज़माने में तकनीक की ग़ैर मौजूदगी ने चेन्नई की शुरुआत ख़राब कर दी और बाकी का काम उसके बल्लेबाज़ों और मुंबई के गेंदबाज़ों ने कर डाला. लेकिन इसकी शुरुआत मानवीय चूक से हुई.
हर्ष भोगले ने ये भी लिखा, “अंपायर से शायद ग़लती हो गई.”
वहीं पूर्व क्रिकेटर संजय मांजरेकर और पीयूष चावला ने टी20-टाइम आउट कार्यक्रम में इसे आईपीएल में लगातार हो रही ख़राब अंपायरिंग का सबसे ताज़ा उदाहरण बताया.
पीयूष चावला ने कहा, “हमने इस सीज़न में कुछ बहुत ही साधारण अंपायरिंग देखी है, तो ये फ़ैसला भी उन्हीं में से एक था.”
मांजरेकर का मानना था कि डेवोन कॉनवे के साथ-साथ रॉबिन उथप्पा को जो एलबीडब्ल्यू आउट दिया गया, वो भी रिव्यू के लायक था. चेन्नई सुपरकिंग्स के लिए दो ओवर तक डीआरएस उपलब्ध नहीं थे और इस मैच में ये वो समय था जब मैच मुंबई के पलड़े में झुक गया.
मांजरेकर भी मानते हैं कि इस सीज़न में भारतीय अंपायरों की अंपायरिंग चिंता का विषय रही है.
धोनी क्या बोले?
हालांकि मैच के बाद धोनी ने इस बारे में बात न करके तेज़ गेंदबाज़ों के बारे में बात की. चेन्नई की ओर से मुकेश चौधरी (4 ओवर, 23 रन, 3 विकेट) और सिमरजीत सिंह (4 ओवर, 22 रन, 1 विकेट) ने अच्छी गेंदबाज़ी की. दोनों ने शुरुआती आठ ओवर डाले, मुंबई के चार विकेट लिए और कुछ देर के लिए ही सही, उन्हें दबाव में डालने का काम किया.
धोनी ने कहा, “दोनों युवा तेज़ गेंदबाज़ों (मुकेश, सिमरजीत) ने अच्छी गेंदबाज़ी की. जहाँ तक मैच में उनके योगदान का प्रश्न है, इस तरह के मैच से मिला अनुभव उनके लिए वाक़ई मददगार होगा. इस मैच के प्रदर्शन से उनमें ख़ुद पर विश्वास बढ़ेगा. हर छोटे फॉर्मेट के मैच के शुरू में हमें ऐसे ही रवैये की ज़रूरत होती है.”
धोनी ने आईपीएल में अलग-अलग टीमों के पास अच्छे तेज़ गेंदबाज़ों की मौजूदगी पर कहा, “हम ऐसे दौर से गुज़रे हैं, जब हमारे पास तेज़ गेंदबाज़ों की बेंच स्ट्रेंथ कभी नहीं थी. तेज़ गेंदबाज़ों को परिपक्व होने में समय भी लगता है. ऐसा बहुत कम ही होता है कि एक तेज़ गेंदबाज़ क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट के लिए छह महीने के समय में तैयार होता हो.”
“मुझे लगता है कि ऐसा आईपीएल कर रहा है. ये गेंदबाज़ों के लिए अवसर है, जहाँ कई गेंदबाज़ों में पहले से अधिक आत्मविश्वास जाग उठता है और उनका साहस बढ़ता है. वो सामने वाली टीम से सीधा मुक़ाबला करना चाहते हैं और ये ही सबसे बड़ा अंतर रहा है.”
इस दौरान धोनी ने बताया कि अगले सीज़न में चेन्नई सुपरकिंग्स में दो और नए तेज़ गेंदबाज़ आ रहे हैं. साथ ही कुछ और तेज़ गेंदबाज़ होंगे.
“हम बस उन्हें आईपीएल की तैयारी के लिए पर्याप्त समय देना चाहते हैं. तो अगले सीजन के लिए हम यहाँ से कई सकारात्मक चीज़ें लेकर जाएंगे लेकिन महत्वपूर्ण ये है कि जो दरारें हैं वो भरी जाएं, ताकि कोई लीकेज न हों.”
पहली बार प्लेऑफ़ में न धोनी, न रोहित
आईपीएल-15 में गुरुवार का दिन एक ऐतिहासिक दिन था. लेकिन यह दिन चेन्नई और मुंबई के करोड़ों चाहने वालों के लिए एक आघात की तरह आया.
बीते 14 सालों से इन दोनों टीमों में से कोई एक टीम आईपीएल के प्लेऑफ़ में ज़रूर पहुंचती रही हैं. लेकिन गुरुवार को मुंबई ने चेन्नई को 5 विकेट से हरा दिया और इसके साथ ही पहली बार आईपीएल का प्लेऑफ़ इन दो दिग्गज़ टीमों के बग़ैर खेला जाएगा.
आईपीएल में इस बार दोनों टीमों का प्रदर्शन उनके नाम के अनुरूप नहीं रहा है. मुंबई की टीम तो पहले ही आईपीएल के प्लेऑफ़ से बाहर हो गई थी.
चेन्नई के पास भी अपने लचर प्रदर्शन की बदौलत प्लेऑफ़ में पहुंचने की बहुत कम संभावना थी. उसे बाकी सभी मैच जीत कर 14 अंक अर्जित करने थे. उम्मीद ये भी करनी थी कि टॉप टीमों में से कम से कम एक टीम केवल 14 अंक ही बटोर सके और फिर उससे बेहतर रन रेट भी रखना था.
आँकड़ों के इस जोड़-तोड़ में प्लेऑफ़ में पहुँचने की उम्मीद तो बहुत कम थी लेकिन क्रिकेट संभावनाओं का खेल है और पहले कई मौकों पर ऐसी ही असंभव जीत धोनी दिला चुके हैं. इस पर बल्ले से महेंद्र सिंह धोनी का उम्दा प्रदर्शन भी उनके चाहने वालों को आस जगा रहा था.
कुल मिलाकर आगे के मैचों को प्लेऑफ़ में पहुँचने की संभावना से देखने का मज़ा भी लेना था, लेकिन मुंबई इंडियंस के गेंदबाज़ों डेनियल सम्स और जसप्रीत बुमराह ने चेन्नई के फैन्स के साथ ऐसा होने न दिया.
पिछले 14 में से 9 खिताबों पर पाँच बार मुंबई का तो चार बार चेन्नई का नाम लिखा है लेकिन इस बार ये दोनों टीमें प्लेऑफ़ में भी नहीं पहुंच सकी हैं.
आईपीएल के इतिहास में यह पहला मौक़ा है जब चेन्नई और मुंबई में से कोई एक टीम भी इसके प्लेऑफ़ में नहीं दिखेगी.
-एजेंसियां

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