संस्कृति यूनिवर्सिटी में women’s day पर हुए विविध कार्यक्रम

मथुरा। संस्कृति यूनिवर्सिटी में आज मेधावी छात्राओं को सम्मानित कर अंतर्राष्ट्रीय women’s day मनाया गया। इस अवसर पर कुलपति डा. राणा सिंह ने छात्राओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि बेटियां घर-परिवार, समाज और देश की शान हैं। आज कोई भी ऐसा क्षेत्र नहीं है जहां भारतीय बेटियों ने अपनी विलक्षण प्रतिभा का लोहा नहीं मनवाया हो। महिला दिवस पर छात्राओं ने मनमोहक कार्यक्रम पेश किए।

कुलपति डा. सिंह ने कहा कि समय बदल रहा है, अब महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति न केवल जागरूक हो रही हैं बल्कि हर क्षेत्र में अपनी मजबूत दस्तक दे रही हैं। कल तक जो काम असम्भव माना जाता था उसे भी भारतीय बेटियां सम्भव कर दिखा रही हैं। आज बेटियां रेलगाड़ी ही नहीं लड़ाकू विमान तक उड़ा रही हैं। डा. सिंह ने देश के कई राज्यों में बेटियों की घटती संख्या पर चिन्ता व्यक्त करते हुए छात्राओं का आह्वान किया कि वे उच्च तालीम हासिल कर न केवल महिला साक्षरता का स्तर बढ़ाएं बल्कि लिंगानुपात में आ रही कमी पर महिलाओं को जागरूक करें।

इस अवसर पर ओ.एस.डी. मीनाक्षी शर्मा ने कहा कि आदिकाल से ही महिलाएं प्रेम, त्याग, आत्मविश्वास और बलिदान की प्रतिमूर्ति रही हैं। बेटियां यदि संकल्प ले लें तो उनके लिए कोई काम असम्भव नहीं है। उन्होंने शिक्षा और खेल के क्षेत्र में संस्कृति विश्वविद्यालय का नाम रोशन करने वाली छात्राओं को सम्मानित करते हुए उन्हें और बेहतर करने को प्रोत्साहित किया।

इस अवसर पर डीन इंजीनियरिंग डा. कल्याण कुमार ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की जानकारी देते हुए कहा कि इसकी शुरुआत लगभग एक शताब्दी पहले वर्ष 1908 में तब हुई थी जब 15 हजार महिलाओं ने न्यूयॉर्क शहर में काम के घंटे कम करने, बेहतर वेतन और मतदान के अधिकार के लिए मार्च किया था। महिलाओं द्वारा मार्च निकालने के एक साल बाद अमेरिका की सोशलिस्ट पार्टी ऑफ अमेरिका ने राष्ट्रीय महिला दिवस की घोषणा की थी।

साल 1975 में संयुक्त राष्ट्र ने इस दिन को अतंरराष्ट्रीय women’s day घोषित किया। इस अवसर पर छात्रा अनु मिश्रा ने तुम चहकती रहो, तुम महकती रहो गीत सुनाया।

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