ख़ुफ़िया रिपोर्ट: जो बाइडन की टीम के करीबी लोगों पर नजर रखे हुए हैं चीनी एजेंट

वॉशिंगटन। अमेरिका के एक ख़ुफ़िया अधिकारी ने कहा है कि चीन के एजेंटों ने नव निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन की भावी सरकार के लोगों को प्रभावित करने की कोशिश शुरू कर दी हैं.
अमेरिका के नेशनल इंटेलिजेंस ऑफिस के विलियम एवनीना ने कहा है चीनी एजेंट बाइडन की टीम के क़रीबी लोगों पर नज़र रखे हुए हैं.
एवनीना का कहना है कि चीन की ये कोशिश अपने ‘चरम पर थी’.
इससे इतरअमरीका के न्याय विभाग के एक अधिकारी ने कहा है कि 1000 से ज़्यादा संदिग्ध चीनी एजेंट अमरीका से भाग गए हैं.
एसपेन इंस्टीट्यूट की एक वर्चुअल चर्चा में नेशनल इंटेलिजेंस के काउंटर इंटेलिजेंस प्रमुख विलियम एवनीना ने कहा कि चीन ने अमरीका के कोरोना वैक्सीन तैयार करने की प्रक्रिया में और अमरीकी चुनाव में दख़ल देने की कोशिश की थी.
उन्होंने कहा, ”हमने एक इन कोशिशों में एक इज़ाफ़ा देखा है, जिसकी योजना पहले से ही तैयार की गई थी. हमने पहले ही भविष्यवाणी कर दी थी कि चीन नए बाइडन प्रशासन को प्रभावित करने के लिए अपने कैंपेन को दोबारा शुरू करेगा.”
”ये नुक़सान पहुंचाने वाला विदेशी प्रभाव ना सिर्फ़ नए प्रशासन में शामिल लोग पर है बल्कि इसका इस्तेमाल जो लोग प्रशासन में शामिल लोगों के क़रीबी हैं उन पर भी किया जा रहा है.”
”हमारा पूरा ज़ोर ये सुनिश्चित करने में होगा कि नया बाइडन प्रशासन इस प्रभाव को समझ सके, ये कैसा दिखता है और इसे महसूस करके पहचान सके. ”
हाल में अमरीकी चुनाव के दौरान जो बाइडेन ने व्हाइट हाउस कैंपेन पर ”चीन से प्रभावित” होने का आरोप लगाया था. वहीं ट्रंप ने भी बाइडन के बेटे हंटर बाइडन के चीन के साथ बिज़नेस सौदे के ज़रिए बाइडन पर ‘चीन से प्रभावित होने’ का आरोप लगाया था.
‘हज़ारों चीनी शोधकर्ता अमरीका से फ़रार’
इसी थिंक टैंक की चर्चा में अमरीका के न्याय विभाग के प्रमुख जॉन डेमर्स ने कहा कि बीते कुछ महीनों के दौरान सैकड़ों चीनी शोधकर्ता जिनका संबंध चीन की आर्मी से था उनकी पहचान एफ़बीआई ने की है.
डेमर्स ने बताया कि ”अमरीकी अथॉरिटी ने ये जांच तब शुरू की जब पांच-छह ऐसे चीनी शोधकर्ताओं की गिरफ़्तारियां हुई जिन्होंने चीन की पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी के साथ अपने संबंधों को छुपाया था.”
”ये पांच-छह गिरफ्तारियां तो बहुत कम थीं, उस वक़्त तक हमें ये अंदाज़ा नहीं था कि ये संख्या इतनी ज़्यादा है.”
उन्होंने बताया कि जब एफ़बीआई ने कई लोगों से दर्जनों बार पूछताछ की तब जा कर ये बता चला कि 1000 से ज्यादा चीन के शोधकर्ता जो चीन की सेना से जुड़े हुए थे वह अमरीका छोड़कर निकल गए.
उन्होंने कहा कि केवल चीन के पास ही ऐसी कथित राजनीतिक-आर्थिक जासूसी करने और दुर्भावनापूर्ण गतिविधि करने के लिए ”संसाधन और क्षमता है”.
डेमर्स ने बताया कि ये चीनी रिसर्चर उन 1000 छात्रों से अलग हैं जिनका वीज़ा इस साल सितंबर में रद्द किया गया था.
सितंबर में विदेश मंत्रालय ने कहा था कि “हम चीन से उन छात्रों और विद्वानों का स्वागत करते हैं जो चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के सैन्य प्रभुत्व के लक्ष्यों को आगे नहीं बढ़ाते.”
इस साल जुलाई में विदेश मंत्रालय ने ह्यूस्टन, टेक्सस में स्थित चीन के वाणिज्य दूतावास को बंद कर दिया था, अमरीका का आरोप था कि चीन अमरीका से इंटलेक्चुअल प्रापर्टी चोरी कर रहा है.
इसके बदले में चीन ने अमरीका पर अपने लोगों के साथ नस्लीय भेदभाव करने का आरोप लगाया था.
अमरीका और चीन के रिश्ते लंबे वक़्त से तनावपूर्ण चल रहे हैं, इसकी शुरूआत ट्रंप प्रशासन की ओर से चीन पर शुल्क बढ़ाने से हुई.
इसके बाद हॉन्ग-कॉन्ग और कोरोना महामारी को लेकर अमरीका के रुख़ ने दोनों देशों के रिश्तों को और भी ख़राब किया है.
-BBC

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