‘Ease of doing business’ रैंकिंग में भारत की लंबी छलांग

कारोबार करने में आसानी यानी ‘Ease of doing business’ की रैंकिंग में भारत ने 14 स्थान की छलांग लगाई है. इसका मतलब है कि भारत में बिजनेस करना अब और भी आसान हो गया है.
खास बात यह है कि ‘Ease of doing business’ रैंकिंग में लगातार पांचवी बार सुधार हुआ है. साल 2015 से इसमें लगातार सुधार होता जा रहा है और एक और अहम बात यह है कि लगातार 3 वर्षों से भारत इस मामले में रैंकिंग में तेज सुधार करने वाले टॉप 10 देशों में शामिल है.
इस मामले में 190 देशों की विश्व बैंक की रैंकिंग में भारत अब 63वें नंबर पर आ गया है. कहा जा रहा है कि नरेंद्र मोदी सरकार में हुए आर्थिक सुधारों के कारण भारत की स्थिति सुधरी है.
हालांकि सरकार का लक्ष्य इस रैंकिंग में 50 के भीतर आने का था. 2018 में भारत 77वें नंबर पर था. 2017 में भी भारत का प्रदर्शन सकारात्मक रहा था और यह 30 पायदान चढ़कर 100वें नंबर पर आया था.
‘Ease of doing business’ के मायने
कारोबारी सुगमता यानी ये जानना कि किसी देश में कारोबार शुरू करना कितना आसान या मुश्किल है. मसलन, कारोबार शुरू करने में कितना समय लगता है, कोई बिल्डिंग बनानी है तो उसकी इजाज़त लेने में कितना वक़्त लगता है. विश्व बैंक ने अपने सर्वे में कहा है कि भारत ने कई आर्थिक मोर्चों पर सुधार किया है.
सरकार के सतत प्रयासों का ही नतीजा है कि पिछले 5 वर्षों (2014-19) के दौरान भारत की रैंकिंग में 79 पायदानों का सुधार हुआ है. भारत 10 संकेतकों में से 7 में में सुधार लाया है और इंटरनेशनल बेस्ट प्रैक्टिसेस के करीब पहुंचा है. ‘दिवालिया शोधन प्रक्रिया’, ‘कंस्ट्रक्शन परमिट’, ‘प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन’, ‘विदेशी व्यापार’, ‘टैक्स अदायगी’ आदि इंडिकेटर्स में जबर्दस्त सुधार आया है, जिसकी वजह से भारत की रैंकिंग सुधरी है.
‘Ease of doing business’ के मामले में भारत की रैंकिंग में सुधार की कई वजहें हैं.
भारत ने इस साल कई स्तरों पर अपना पर्फॉर्मेंस सुधारा है, जिनमें प्रमुख हैं…
-वर्ल्ड बैंक ने लगातार तीसरे साल भारत को टॉप 10 इम्प्रूवर्स(सुधार लाने वालों) में रखा है.
-दिवालिया मामलों के रिकवरी रेट में जबर्दस्त सुधार आया है, जो 71.6% से सुधरकर 26.5% पर आ गया है.
-दिवालिया मामलों के निपटारे में लगने वाला समय भी घटा है. पहले ऐसे मामले निपटने में जहां 4.3 साल लग जाते थे, अब 1.6 साल लग रहे हैं.
-कंस्ट्रक्शन परमिट के प्रोसीजर्स की संख्या भी भारत ने घटाई है.
-दक्षिण एशियाई देशों में भारत पहले स्थान पर काबिज है. साल 2014 में वह छठे स्थान पर था.
-एजेंसियां

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