भारत का पहला बीवीएलओएस ड्रोन डिलीवरी ट्रायल के लिए तैयार

नई दिल्ली। अल्टरनेटिव ग्लोबल इंडिया, अब भारत में बीवीएलओएस ड्रोन डिलवरी फ्लाइट्स को शुरू करने के लिए डंजो डिजीटल की मदद कर रही है। एजीआई, एक प्रमुख मैनेजमेंट कंसल्टिंग कंपनी है जो कि यूके, यूएसए और इज़राइल में पार्टनर ऑफिसिज के साथ ग्लोबल स्तर पर ईवी और ड्रोन सेक्टर में काम कर रही है। ये ड्रोन डिलीवरी फ्लाइट्स भारत में अपनी तरह का पहला 100 घंटे का बीवीएलओएस ट्रायल होगा।

अल्टरनेटिव ग्लोबल 2016 से कंसल्टिंग स्पेस में है और घरेलू बाजार में लगातार विस्तार करने के साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 50 से अधिक कंपनियों की मदद कर रही है और साथ ही साथ कंपनी ने उभरती अर्थव्यवस्थाओं खासकर भारत में विस्तार किया है।

अल्टरनेटिव ग्लोबल इंडिया के मैनेजिंग पार्टनर श्री अंकित कुमार ने कंसोर्टियम में एजीआई की भूमिका पर टिप्पणी करते हुए कहा कि “पिछले 12 महीनों में, हम अपने मौजूदा सिस्टम में ड्रोन इनक्लूजन के लिए रोडमैप बनाने के लिए एक कंसल्टिंग पार्टनर के रूप में डंज़ो डिजीटल के साथ सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। और उस दिशा में पहला कदम दुनिया भर में सबसे अच्छी उपलब्ध तकनीकों से सीखने और अनुकूलन करने के लिए लंबी अवधि के बीवीएलओएस ट्रायल्स का आयोजन कर रहा है। हम डंज़ो टीम के साथ सहभागिता में काम करते हुए बेहद खुश हैं जो देश में ड्रोन डिलीवरी को सक्षम बनाने को लेकर बेहद उत्साहित है। हमने 8 सदस्यों के साथ डंज़ो एयर कंसोर्टियम का गठन किया है जो यूटीएम, यूएवी सिस्टम, एलटीई, ड्रोन ऑपरेशंस, 3 डी मैपिंग, सेफ्टी, इंश्योरेंस आदि जैसे विभिन्न क्षेत्रों से अपनी विशेषज्ञता का योगदान दे रहे हैं। सभी सदस्यों की कुछ जिम्मेदारियां होती हैं, जिन्हें वे कंसोर्टियम में पूरा करते हैं। ट्रायल में हेल्थ संबंधी उत्पादों, भोजन और अन्य पैकेजों की डिलीवरी शामिल होगी।”

इस बारे में विस्तार से बात करते हुए, श्री कुमार ने कहा कि “डंज़ो एयर कंसोर्टियम इस साल जुलाई-अगस्त के महीने के दौरान ट्रायल शुरू कर सकती है। हमने सभी आवश्यक दस्तावेज डीजीसीए को सौंप दिए हैं और फ्लाइट क्लीयरेंस का इंतजार कर रहे हैं। हम उम्मीद करते हैं कि ट्रायल के दौरान अलग अलग जगहों पर की गई डिलीवरी के डेटा प्वाइंट्स को डंज़ो द्वारा उपयोग किया जाएगा। जिसके आधार पर कॉन्सेप्ट और और सुरक्षा मामलों के प्रमाण के तौर पर उनको डीजीसीए के साथ शेयर किया जाएगा और साथ ही सेमि-अर्बन और अर्बन एरियोज में ड्रोन डिलीवरी मॉडल डेवलप करने के लिए इनका उपयोग किया जाएगा।”

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