भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा का आज 73वां जन्मदिन

भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा अपना 73वां जन्मदिन मना रहे हैं। उनका जन्म 13 जनवरी 1949 को पटियाला में हुआ था। 1984 में राकेश शर्मा (Rakesh Sharma) ने अंतरिक्ष में पहुंचने वाले पहला भारतीय बनकर देश को गौरान्वित किया था। स्कवाडर्न लीडर राकेश शर्मा ने कठिन परीक्षण और प्रशिक्षण से गुजरकर खुद को इस मिशन के लिए तैयार किया और तमाम तरह की योग्यताओं को हासिल किया और देश के हीरो बनकर दिखाया। भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) के पायलट के रूप में चुने गए राकेश शर्मा को अंदाजा नहीं था कि उन्हें यह गौरव हासिल करने का मौका मिलेगा। इस अभियान में उन्होंने कुछ प्रयोग भी किए थे जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं।

उन्होंने 1984 में अंतरिक्ष में जाकर इतिहास रच दिया था। इंडियन एयरफोर्स में पायलट रहे राकेश शर्मा इकलौते भारतीय नागरिक हैं जो अंतरिक्षयात्री रह चुके हैं। उनके अलावा दिवंगत कल्पना चावला और सुनीता विलियम्स जैसे दूसरे भारतीय मूल के लोग भी अंतरिक्ष में जा चुके हैं, लेकिन वो अमेरिकी नागरिक हैं। राकेश शर्म की वह आवाज लोगों के कानों में आज भी गूंजती है जब उन्होंने कहा था-‘सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तान हमारा।’ अंतरिक्ष से लाैटने के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने शर्मा से पूछा था कि ऊपर से अंतरिक्ष से भारत कैसा दिखता है, जवाब देते हुए शर्मा ने कहा था-सारे जहां से अच्छा।

1984 में सोवियत संघ के स्पेसक्राफ्ट से अंतरिक्ष गए राकेश शर्मा ने वहां 7 दिन, 21 घंटे और 40 मिनट गुजारे थे। उनके साथ सोवियत यूनियन के दो अंतरिक्षयात्री भी थे-यूरी मैलीशेव, गेनाडी स्ट्रेकलोव। 3 अप्रैल से 11 अप्रैल 1984 तक राकेश शर्मा अंतरिक्ष में रहे। राकेश शर्मा की ऐतिहासिक अंतरिक्ष यात्रा के बाद उन्हें कई पुरस्कार मिले। भारत में उन्हें अशोक चक्र से सम्मानित किया गया तो वहीं सोवियत यूनियन ने उन्हें ‘हीरो ऑफ सोवियत यूनियन’ पुरस्कार से सम्मानित किया था। ये पुरस्कार सोवियत यूनियन के भंग होने के पहले तक वहां की सरकार देती थी। इस पुरस्कार के बाद राकेश शर्मा के साथ ‘हीरो’ शब्द चिपक गया।

भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने राकेश शर्मा से यह सवाल किया गया था कि आखिर अंतरिक्ष से भारत कैसा दिखता है। इसके जवाब में शर्मा ने कहा, ‘सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तां हमारा।’ उन्होंने कहा था कि अंतरिक्ष में सबसे खूबसूरत क्षण होता है सूर्योदय और सूर्यास्त के समय का। जीरो ग्रेविटी का भी फन होता है। 80 के दशक की शुरुआत में सोवियत यूनियन अपना एक स्पेसक्राफ्ट अंतरिक्ष में भेजने की तैयारी कर रहा था। सोवियत की तरफ से इंदिरा गांधी को प्रस्ताव दिया गया कि वो भी इस मिशन में दो भारतीयों को भेज सकती हैं। इसी के तहत राकेश शर्मा को चुना गया था। उनके साथ रवीश मल्होत्रा का भी चयन हुआ था लेकिन वो बैक अप में थे। वो अंतरिक्ष यात्रा पर नहीं गए थे।

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