भारत की बड़ी जीत है बिना गोली चलाए चीन को कदम खींचने पर मजबूर करना: बख्‍शी

नई दिल्‍ली। बीते कुछ दिनों से लद्दाख में चीन से लगती सीमा पर जारी तनाव फिलहाल खत्‍म होता दिखाई दे रहा है। चीन के जवान करीब ढाई किमी पीछे चले गए हैं। रिटायर्ड मेजर जनरल जीडी बख्‍शी इसको भारत की बड़ी जीत मानते हैं। उनका कहना है कि भारत ने इस बार चीन को करारा जवाब दिया है और यही वजह है कि बिना एक भी गोली चले चीन चुपचाप पीछे चला गया। हालांकि, वे ये भी मानते हैं कि चीन ने इस बार गावलान में जो हिमाकत की वो पहली बार और ज्‍यादा खतरनाक थी। उसने यहां वही हरकत की जो कारगिल में कभी पाकिस्‍तान ने की थी, जिसकी वजह से तीन माह तक युद्ध चला था।
मेजर जनरल बख्‍शी ने कहा कि भारत ने इस बार चीन को जबरदस्‍त टक्‍कर दी और जहां-जहां पर उन्‍होंने घुसपैठ की थी वहां पर उसी संख्‍या में जवानों को भेजा। इसका नतीजा ये हुआ है कि चीन को पीछे हटना पड़ा। उन्‍होंने कहा कि चीन ने पहले कभी ये नहीं सोचा था कि भारत इस तरह से कार्यवाही को अंजाम दे सकता है, लेकिन इस बार भारत की सही रणनीति ने उसको पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। इसके अलावा भारत की एक बड़ी जीत ये भी हुई कि चीन ने माना कि वह भारतीय सीमा के अंदर इतने किमी तक दाखिल हुआ था। राजनीतिक और सामरिक दृष्टि से इसके बेहद अहम मायने हैं।
प्रेशर प्‍वाइंट्स की तरह करता है इस्‍तेमाल
बख्‍शी का कहना था कि लद्दाख से लगती सीमा पर दरअसल लाइन ऑफ एक्‍चुअल कंट्रोल है। यहां पर चीन पहले भी इस तरह की हिमाकत करता रहा है और फिर वापस भी जाता रहा है। बीते कई वर्षों के दौरान भारत ने इस सीमा विवाद को सुलझाने की कोशिश की है, लेकिन चीन इसको बनाए रखना चाहता है। उसका मकसद है कि वह कि जब भी उसको अंतर्राष्‍ट्रीय मंच पर किसी मुद्दे पर कुछ दबाव झेलना पड़े तो वो भारत की सीमा से लगते इलाकों में विवाद पैदा कर दे, जिससे पूरी मीडिया का ध्‍यान उससे हटकर सीमा विवाद पर लग जाए। वे मानते हैं कि चीन की पहले से ही ये नीति रही है। भारत ने कई बार चीन से सीमा विवाद सुलझाने के लिए नक्‍शों का आदान-प्रदान करने की मांग की है, लेकिन चीन ने कभी भी इस पर कोई तवज्‍जो नहीं दी। बख्‍शी का कहना है कि चीन इस विवाद को ज्‍यादा तूल नहीं दे सकता था क्‍योंकि उसका ध्‍यान पूर्वी क्षेत्र पर लगा है। दक्षिण चीन सागर और ताइवान के साथ लगातार विवाद बना हुआ है। वह नहीं चाहता है कि लद्दाख के विवाद को लंबा कर वो किसी भी तरह की मुसीबत में पड़ जाए। वहीं भारत ने इस बार जो कार्यवही की उसके बारे में उसने पहले नहीं सोचा था। ये भारत की बड़ी जीत है।
पहली बार गावलान में हुई चीनी घुसपैठ
उनके मुताबिक ऐसा पहली बार हुआ कि चीन ने गालवान के इलाके में घुसपैठ करने की कोशिश की थी। उनके मुताबिक चीन की सेना ने बेहद सुनियोजित तरीके से यहां पर ट्रकों में भरकर अपने सैनिकों को उन स्‍थानों पर पहुंचाया जो भारतीय क्षेत्र में आते थे। गालवान बेहद ऊंचाई पर मौजूद है। यहां से हमारे सैनिकों की मूवमेंट को आसानी से देखा जा सकता था। यहां से हमारी सामरिक दृष्टि से अतिमहत्‍वपूर्ण सड़कों पर निगाह रखी जा सकती थी। यहां पर पहली बार चीन की सेना करीब 3 किमी तक भारतीय सीमा के अंदर आई थी। यहां से भारतीय सीमा में बनी एक सड़क दौलतबेग ओल्‍डी सेक्‍टर तक जाती है। जिस जगह पर चीन की सेना थी, वहां से ये सड़क दो किमी दूर है। गालवान नदी के साथ बन रही भारतीय सड़कों के निर्माण पर भी चीन ने आपत्ति दर्ज की थी। इसके अलावा चीन ने इस बार दो जगह और घुसपैठ की कोशिश की, जहां पर भी उसको मुंह की खानी पड़ी है।
फिर कर सकता है हिमाकत
बख्‍शी का कहना है कि चीन के पीछे हट जाने का अर्थ ये कतई नहीं है कि वह दोबारा इस तरह की हरकत नहीं करेगा। इसलिए मुस्‍तैद रहने की जरूरत है। उनके मुताबिक, लद्दाख के गावलान काफी ऊंचाई पर है और वहां पर भीषण बर्फबारी होती है। वहीं, दूसरे सीमावर्ती इलाकों में भी हर रोज सेना के जवान पैट्रोलिंग नहीं करते हैं। चीन के जवान भी इस इलाके में हर रोज पैट्रोलिंग नहीं करते हैं। दोनों सेनाएं हर वर्ष बेहद सर्द मौसम में पीछे चली जाती हैं, लेकिन इस बार चीन ने इसका ही फायदा उठाते हुए गावलान में घुसपैठ को अंजाम दिया। इसको लेकर अब भविष्‍य में चौकस रहना होगा। चीन इस बार ये जान चुका है कि भारत अब 1962 वाला नहीं रहा है। उनके मुताबिक भारतीय फौज चीन से कहीं ज्‍यादा मजबूत स्थिति में है।

-एजेंसियां

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