ईरानी समकक्ष से मिले भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर

तेहरान। शंघाई सहयोग संगठन की बैठक में हिस्‍सा लेने के लिए रवाना हुए भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर रास्‍ते में कुछ देर के लिए ईरान में रुके। जयशंकर ने अपने ईरानी समकक्ष जावेद जरीफ से मुलाकात की। ईरान ने कहा है कि भारत और ईरान दोनों ही अक्‍सर चर्चा करते रहे हैं। भारतीय विदेश मंत्री की यह ईरान ऐसे समय पर हो रही है जब चीन और पाकिस्‍तान दोनों ही तेहरान को अपने पाले में लाने के लिए प्रयास कर रहे हैं।
ईरान ने कहा कि भारत के संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद में अस्‍थायी सदस्‍य बनने के ठीक पहले यह मुलाकात हुई है। भारत का कार्यकाल 1 जनवरी से शुरू हो रहा है। अभी कुछ दिन पहले ही मास्को में शंघाई सहयोग संगठन की बैठक में भाग लेने के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह अचानक ईरान की राजधानी तेहरान पहुंचे थे। अपने तेहरान दौरे की सूचना खुद राजनाथ सिंह ने ट्वीट कर दी थी। चीन से तनाव के बीच ईरान दौरे पर भारत के रक्षामंत्री और विदेश मंत्री का पहुंचना रणनीतिक लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।
भारतीय नेताओं के ईरान दौरे से कई कयासों को बल
दो प्रमुख भारतीय नेताओं के ईरान के अचानक दौरे से कई कयासों को बल मिलने लगा है। विश्‍लेषकों के मुताबिक पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट के जवाब में भारत ईरान के चाबहार पोर्ट को विकसित कर रहा है। इस पोर्ट के रास्ते भारत न केवल अपनी सामरिक बल्कि आर्थिक हितों को भी साधेगा। चीन से बढ़ते तनाव और उसके रिंग ऑफ पर्ल्स नीति के खिलाफ इस पोर्ट की अहमियत काफी ज्यादा है। कुछ दिनों पहले ऐसी खबरें आईं थी कि चाबहार में निर्माण की धीमी गति को लेकर ईरान चिंतित है। ऐसे में भारत की बड़ी कोशिश ईरान की इन चिंताओं का समाधान करना होगा।
पाकिस्तान और चीन एक साथ मिलकर ग्वादर बंदरगाह को भारत के खिलाफ आर्थिक और सामरिक रूप से इस्तेमाल करने की तैयारी में हैं। ऐसे में चाबहार के जरिए भारत ग्वादर के ऊपर बैठा है और वहीं से चीन-पाकिस्तान की हर हरकत पर नजर रखे हुए है। यही नहीं इस बंदरगाह के कारण पाकिस्तान का व्यापारिक घाटा भी बढ़ रहा है क्योंकि मध्य एशिया के अधिकतर देश अब पाकिस्तान के ग्वादर को छोड़कर ईरान के चाबहार का उपयोग करने लगे हैं।
चीन-पाक को एक साथ साधने की तैयारी
दो फ्रंट पर युद्ध की तैयारी कर रहे चीन और पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए भारत ने भी कमर कस ली है। ईरान को साधकर भारत न केवल पाकिस्तान बल्कि चीन को भी तगड़ी चोट लगाने की तैयारी में है। चीन ने कुछ दिनों पहले ही ईरान के साथ अरबों डॉलर का सौदा किया था। इसमें न केवल रक्षा बल्कि व्यापार क्षेत्र के भी कई बड़े समझौते हुए थे। ऐसे में अगर भारत चीन के खिलाफ ईरान को मना लेता है तो यह बड़ी कूटनीतिक जीत मानी जाएगी।
पाकिस्तान को तगड़ा झटका देगा भारत
ईरान और पाकिस्तान की सीमाएं आपस में जुड़ी हुई हैं। इस स्थिति में भारत ईरान को अपने पाले में करके पाकिस्तान को बड़ा झटका भी दे सकता है। वहीं, कट्टर शिया देश होने के कारण पाकिस्तान और ईरान के बीच संबंध अच्छे भी नहीं है। ऐसे में भारत को इसका फायदा हो सकता है। ईरान के रास्ते भारत व्यापार के नए आयाम स्थापित करने की तैयारी में है। इससे भारी दबाव से गुजर रही ईरानी अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
-एजेंसियां

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