‘धर्म संसद’ के मुद्दे पर पाकिस्‍तान में भारतीय राजनयिक को किया तलब

हरिद्वार की ‘धर्म संसद’ के बयानों को लेकर पाकिस्तान ने इस्लामाबाद में कल भारतीय राजनयिक को तलब किया गया.
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भारतीय दूतावास के सबसे वरिष्ठ राजनयिक एम. सुरेश कुमार को अपनी कथित ‘गंभीर चिंताओं’ से अवगत कराया.
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता आसिम इफ़्तिख़ार अहमद ने बयान जारी किया है कि ‘आज भारतीय चार्ज डी अफ़ेयर्स को विदेश मंत्रालय, इस्लामाबाद में तलब किया गया और भारतीय मुसलमानों के नरसंहार करने के हिंदुत्व समर्थकों के खुलेआम आह्वान पर पाकिस्तान सरकार की गंभीर चिंताओं से भारत सरकार को अवगत कराने को कहा है.’
“हिंदू रक्षा सेना के प्रबोधनाथ गिरि और अन्य हिंदुत्व नेताओं ने जातीय सफ़ाई का आह्वान किया, यह बेहद निंदनीय था लेकिन भारत सरकार ने न इस पर खेद ज़ाहिर किया और न ही इसकी निंदा की और न ही इसके ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई की.”
बयान में कहा गया है कि भारतीय पक्ष से यह बात साझा की गई है कि पाकिस्तान के लोगों और पूरी दुनिया की सिविल सोसाइटी और विभिन्न समुदायों में इस नफ़रत भरे भाषण को लेकर गहरी चिंताएं हैं.
बयान में कहा गया है, “अफ़सोस है कि भारत में हिंदुत्व के आधार पर चल रही बीजेपी-आरएसएस की वर्तमान गठबंधन सरकार में अल्पसंख्यकों और ख़ासकर मुसलमानों के ख़िलाफ़ ज़हरीले भाषण और राज्य संरक्षण में उनका उत्पीड़न एक नियम बन गया है.”
पाकिस्तान ने और क्या-क्या कहा
हरिद्वार में 17 से 19 दिसंबर को आयोजित हुई ‘धर्म संसद’ में हिंदुत्व को लेकर साधु-संतों के भाषणों सहित पाकिस्तान ने पिछली घटनाओं की याद भी भारत को दिलाई है.
पाकिस्तान विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि ‘हिंदुत्ववादी नेताओं द्वारा इस तरह की भड़काऊ बयानबाज़ी पहले भी हुई है जिसमें सत्ताधारी दल के चुने हुए सदस्य भी शामिल थे जिसके कारण फ़रवरी 2020 में नई दिल्ली में मुस्लिम विरोधी दंगे भी हुए.’
“अल्पसंख्यकों के मानवाधिकारों का निरंतर गंभीर रूप से उल्लंघन हो रहा है. ख़ासकर मुसलमानों और उनके धर्म स्थलों का, इसके साथ ही केंद्र सरकार और कई बीजेपी शासित राज्य मुस्लिम विरोधी क़ानून बना रहे हैं. मुसलमानों के ख़िलाफ़ हिंदुत्ववादी समूह छोटे-मोटे बहाने बनाकर राज्य के संरक्षण में हिंसा की लगातार घटनाएं अंजाम दे रहे हैं और सज़ा से बच जा रहे हैं. यह भारत के मुसलमानों के भविष्य और इस्लामोफ़ोबिया को लेकर बनती एक गंभीर तस्वीर को दिखाता है.”
बयान में आगे कहा गया है, “पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से मांग करता है कि वो अल्पसंख्यकों, ख़ासकर मुसलमानों के ख़िलाफ़ लगातार और व्यवस्थित तरीक़े से जारी मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए भारत को जवाबदेह ठहराए. साथ ही नज़दीक आ चुके नरसंहार से बचने के लिए तुरंत क़दम उठाए.”
पाकिस्तान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि भारत से अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ नफ़रत भरे भाषणों और व्यापक हिंसा की घटनाओं की जांच करने और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने की अपेक्षा की गई है.
बयान में कहा गया है, “पाकिस्तान ने भारत से निवेदन किया है कि वो अपने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और उनके कल्याण को सुरक्षित करेगा जिनमें उनके धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और जीवन जीने का तरीक़ा भी शामिल है.”
-एजेंसियां

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