चिनाब में कम पानी छोड़ने की पाकिस्‍तानी शिकायत को भारत ने खारिज किया

नई दिल्‍ली। पाकिस्तान ने कहा है कि चिनाब नदी में छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा में बहुत कमी आई है। भारत ने उसके दावे को बेबुनियाद बताया है। सिंधु नदी मामलों के भारतीय आयुक्त प्रदीप कुमार सक्सेना को बुधवार को भेजे पत्र में उनके पाकिस्तानी समकक्ष सैयद मोहम्मद मेयर अली शाह ने कहा कि चेनाब के मराला हेडवर्क्स पर पानी का बहाव अप्रत्याशित तौर पर 31,853 क्यूसेक्स से घटकर 18,700 क्यूसेक्स रह गया है। मराला हेडवर्क्स से ही चेनाब का पानी भारत से पाकिस्तान की तरफ जाता है। पत्र में शाह ने सक्सेना से इसका पता लगाकर उन्हें जानकारी देने का आग्रह किया।
भारत ने पाकिस्तान के दावे को किया खारिज
सक्सेना ने कहा कि इस मामले को देखा गया है और पाकिस्तान का यह दावा बेबुनियाद है। उन्होंने कहा कि भारत की तरफ से चिनाब और रावी नदी पर क्रमशः अखनूर और सिध्रा में आखिरी गेज है और वहां से पानी के प्रवाह में कोई बदलाव नहीं हुआ है। सक्सेना ने कहा कि पाकिस्तान जिस पीरियड में कम पानी छोड़े जाने की बात कर रहा है, उस वक्त भी उसी मात्रा में पानी जा रहा था। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान को यही जवाब दे दिया गया है और उसे मामले की सही पड़ताल करने की सलाह दी गई है।
1960 में हुआ था सिंधु जल समझौता
विश्व बैंक की मध्यस्थता में 19 सितंबर 1960 को भारत और पाकिस्तान के बीच जल पर एक समझौता हुआ था। इसे ही 1960 की सिंधु जल संधि कहते हैं।
संधि पर भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति अयूब खान ने दस्तखत किए थे। 12 जनवरी 1961 से संधि की शर्तें लागू कर दी गईं थीं। संधि के तहत 6 नदियों के पानी का बंटवारा तय हुआ, जो भारत से पाकिस्तान जाती हैं।
6 नदियों के पानी का बंटवारा
समझौते में स्पष्ट किया गया है कि पूर्वी क्षेत्र की तीनों नदियां- रावी, ब्यास और सतलज पर भारत का एकछत्र अधिकार है। वहीं, पश्चिमी क्षेत्र की नदियां- सिंधु, चिनाब और झेलम पाकिस्तान के हिस्से में गई हैं। भारत को इन नदियों के पानी से खेती, नौवहन, घरेलू इस्तेमाल के साथ ही डिजाइन और ऑपरेशन की निश्चित मापदंडों के अधीन पनबिजली परियोजनाएं तैयार करने का अधिकार दिया गया है। तीन नदियों के कुल 16.80 करोड़ एकड़ फीट पानी में से भारत के हिस्से 3.30 एकड़ पानी दिया गया है जो कुल पानी की मात्रा का करीब-करीब 20 प्रतिशत है। हालांकि, भारत अपने हिस्से का 93-94 प्रतिशत पानी ही इस्तेमाल करता रहा है।
हर साल मिलते हैं दोनों देशों के आयुक्त
सिंधु जल समझौते के तहत भारत और पाकिस्तान के बीच एक स्थाई आयोग का गठन किया गया था। सिंधु आयोग के दोनों तरफ के आयुक्त इस समझौते पर अपनी-अपनी सरकारों का प्रतिनिधित्व करते हैं। समझौते के तहत दोनों आयुक्तों को साल में एक बार मीटिंग करनी होती है- एक साल भारत में तो दूसरे साल पाकिस्तान में। मार्च महीने में सिंधु आयोग के आयुक्तों की मीटिंग होनी थी, लेकिन कोरोना संकट के कारण भारत ने इसे टालने का प्रस्ताव रखा। समझौते के तहत हर साल 31 मार्च को दोनों आयुक्तों की मीटिंग होती है।
-एजेंसियां

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