भारत ने पाकिस्तान को आईना दिखाते हुए UNHRC के मंच का दुरुपयोग करने के लिए फटकारा

जेनेवा। भारत ने मंगलवार को कहा कि भयावह आर्थिक परिस्थितियों से जूझने वाले देश पाकिस्‍तान को राज्य प्रायोजित सीमा पार आतंकवाद को रोकना चाहिए और अपने अल्पसंख्यक और अन्य समुदायों के मानवाधिकारों के उल्लंघन को संस्थागत रूप देना बंद करना चाहिए।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग UNHRC में एक बार फिर भारत ने पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान को बेनकाब किया और जम्मू-कश्मीर पर टिप्पणी को लेकर इस्लामिक देशों के संगठन ओआईसी को भी जवाब दिया। यूएन में भारत के स्थायी मिशन के प्रथम सचिव ने बताया कि किस तरह पाकिस्तान में मानवाधिकारों का उल्लंघन किया जा रहा है और मुंह खोलने वालों पर हमले किए जाते हैं। भारतीय प्रतिनिधि पवन कुमार बाधे ने कहा कि पाकिस्तान में मुंह खोलने वालों को सुरक्षा एजेंसियों किस तरह जबरन गायब कर रही हैं, हत्याएं की जा रही हैं और मनमाने तरीके से बंधक बनाया जा रहा है।
पाकिस्तान के प्रतिनिधि के एक बयान के जवाब में मानवाधिकार परिषद के 46 वें सत्र में एजेंडा आइटम 2 के तहत अपने उत्तर के अधिकार का उपयोग करते हुए, भारत ने पाकिस्तान को आईना दिखाया और मंच का दुरुपयोग करने के लिए फटकारा।
जिनेवा में भारत के स्थायी मिशन के पहले सचिव पवन कुमार बाधे ने कहा कि “पाकिस्तान, जो कि भयाव आर्थिक स्थिति से जूझ रहा एक देश है, को परिषद और उसके तंत्र का समय बर्बाद करने, राज्य प्रायोजित सीमा पार आतंकवाद को रोकने और मानवाधिकारों के संस्थागत उल्लंघन को समाप्त करने की सलाह दी जाएगी।”
बाधे ने कहा, “इस परिषद के सदस्यों को अच्छी तरह से पता है कि पाकिस्तान ने खूंखार और सूचीबद्ध आतंकवादियों को राज्य के धन से पेंशन प्रदान की है और संयुक्त राष्ट्र द्वारा अभियुक्त आतंकवादियों की सबसे बड़ी संख्या की मेजबानी करने के लिए जाना जाता है।”
भारतीय राजनयिक ने याद किया कि पाकिस्तानी नेताओं ने इस तथ्य को स्वीकार किया है कि “पाकिस्तान आतंकवादियों के उत्पादन का कारखाना बन गया है।” भारतीय राजनयिक ने कहा, “पाकिस्तान ने इस बात को नजरअंदाज किया है कि आतंकवाद मानवाधिकारों के हनन का सबसे खराब रूप है और आतंकवाद के समर्थक मानवाधिकारों का हनन करते हैं।”
बाधे ने कहा कि परिषद को पाकिस्तान से पूछना चाहिए कि उसके अल्पसंख्यक समुदायों जैसे ईसाई, हिंदू और सिखों का आकार आजादी के बाद से क्यों कम हो गया है? पाकिस्तान में अहमदिया, शिया, पश्तून, सिंधी और बलूच का संस्थागत उत्पीड़न किया जा रहा है। उनका जबरन धर्मांतरण कराया जा रहा है।
भारतीय राजनयिक ने कहा, “हमने ओआईसी के बयान में केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के संदर्भ को अस्वीकार कर दिया है। जम्मू और कश्मीर से संबंधित मामलों पर टिप्पणी करने के लिए कोई लोकल स्टैंड नहीं है। यह भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है।”
उन्होंने आगे कहा, ”यह खेदजनक है कि ओआईसी पाकिस्तान के भारत विरोधी प्रॉपेगेंडा में खुद का इस्तेमाल होने दे रहा है।”
-एजेंसियां

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *