भारत को चीन के प्रति और अधिक कड़े रुख की जरूरत: डॉ. आशिमा

नई दिल्‍ली। मोदी सरकार की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीए) में शामिल एक सदस्य डॉ. आशिमा गोयल ने कहा है कि भारत के लिए ये सही समय है कि वो चीन को अपना व्यवहार ठीक करने पर मजबूर करे.
परिषद की अस्थायी सदस्य और मुंबई स्थित Indira Gandhi Institute of Development Research में प्राध्यापक डॉ. आशिमा गोयल ने कहा, “भारत को ज़्यादा कड़ा रुख़ लेना चाहिए, अपने सामानों की बराबर पहुँच को लेकर बात करना चाहिए. चीन को नियमों को लेकर ज़्यादा खुला रवैया रखना होगा, भारत के लिए अपने बाज़ार में पहुंच देनी होगी और इस तरीक़े से दोनों देशों का फ़ायदा सुनिश्चित हो सकता है.
वो कहती हैं कि ‘आगे चलकर हमें चीन के साथ व्यापार करना ही चाहिए. पिछले कुछ महीनों में हमारे निर्यात में बहुत सी वृद्धि उनकी बढ़ती अर्थव्यवस्था के कारण हुई है.’
2014 से एशिया के इन दो बड़े देशों के बीच आपसी व्यापार 70 अरब डॉलर से ज़्यादा रहा है. 2018 में ये 95.7 अरब डॉलर पहुंच गया था. हालांकि जनवरी से नवंबर 2019 के बीच चीन के लिए भारतीय निर्यात और चीन से होने वाला आयात धीमा हो गया.
भारत सरकार ने एक नोट में लिखा, “फलते-फूलते व्यापार से तमाम तरह के फ़ायदे हुए हैं, जैसे भारत में कम क़ीमत पर वस्तुओं की उपलब्धता, लेकिन चीन के साथ हमारा व्यापार घाटा भी किसी भी देश के मुक़ाबले सबसे ज़्यादा है. व्यापार घाटे को लेकर हमारी चिंता दो हिस्सों में बंटी हुई है. एक है घाटे का वास्तविक आकार. दूसरा है कि साल दर साल बढ़ता वो असंतुलन जो 2018 में 58.08 अरब डॉलर हो गया था.”
इसका सीधा मतलब ये है कि भारत चीन से ज़्यादा सामना ख़रीदता है लेकिन इसके मुक़ाबले चीन भारत से कम सामान ख़रीदता है.
उसी नोट में लिखा है, “चीन के साथ व्यापार घाटे की वृद्धि के लिए दो कारकों को ज़िम्मेदार ठहराया जा सकता है: हम चीन को चुनिंदा चीज़ें निर्यात करते हैं और जिन क्षेत्रों में हम प्रतिस्पर्धी हैं जैसे फार्मास्यूटिकल्स, आईटी/आईटीईएस वगैरह और हमारे ज़्यादातर कृषि उत्पाद, उनकी पहुंच को लेकर चीन के मार्केट में बाधाएं हैं.”
2018 और 2019 में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच अनौपचारिक शिखर सम्मेलन के दौरान भी व्यापार असंतुलन की गूंज सुनाई दी थी.
इस साल की शुरुआत में, चीनी विदेश मंत्री ने कहा था, “हमने कभी भी जानबूझकर भारत के साथ ट्रेड सरप्लस नहीं किया. हाल के सालों में चीन ने इसके लिए गंभीर कदम उठाए हैं. जिनमें चावल और चीनी का आयात बढ़ाना शामिल है. साथ ही भारत से मेडिकल और कृषि उत्पादों के आयात के लिए मंज़ूरी मिलने की प्रक्रिया को भी तेज़ किया गया है.”
डॉ. आशिमा गोयल के अनुसार “कई देश साथ आएंगे तो ज़्यादा शांति आएगी, मेरे विचार से इससे स्थिति शांत होगी और चीज़ें ख़राब नहीं होंगी.”
चीन में बने कई ऐप्स पर प्रतिबंध लगाने और चीनी निवेश के नियम सख़्त करने के भारत के फ़ैसले पर वो कहती हैं, “भारत को कड़ा स्टैंड लेना पड़ा, डेटा सुरक्षा बहुत महत्वपूर्ण है और उपभोक्ताओं की भावना का ध्यान रखना भी ज़रूरी है.”
‘सरकार से प्रोत्साहन मिलने का वक़्त’
आरबीआई और सरकार दोनों ने कई तरह के कदमों की घोषणा की है जिनमें आसान शर्तों पर ऋण प्रदान करना, कम दरों पर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के लिए गारंटी की पेशकश और ज़रूरतमंदों को सीधे नकद लाभ प्रदान करना शामिल है.
जून में सरकार ने कैश ट्रांसफर बंद कर दिया था, जिसे 26 मार्च से तीन महीने के लिए शुरू किया गया था. जबकि प्रमुख आर्थिक सलाहकार के वी सुब्रमण्यन ने कहा था कि वो चाहते हैं कि सरकार इस फ़ायदे को देना जारी रखे.
डॉ. आशिमा गोयल कहती हैं, “बेरोज़गारी बढ़ने के संकेत हैं. जल्द ही ख़रीफ फसलों की कटाई पूरी होने के बाद और लोग काम की तलाश करेंगे. मनरेगा सिर्फ 100 दिनों का रोज़गार देती है. इसे देखते हुए, हमें ऐसी ही शहरी रोज़गार बीमा योजना की ज़रूरत है. इससे अपने गांवों को लौटे प्रवासी मज़दूर दोबारा शहरों की तरफ आएंगे, जहां दोबारा काम शुरू करने वाले कारखानों को कामगारों की ज़रूरत है. त्योहारों का मौसम नज़दीक है, ऐसे में इस रोज़गार के सृजन और इससे होने वाली कमाई के लिए प्रोत्साहन की बड़ी ज़रूरत होगी और मुझे लगता है कि अभी इसका वक़्त है.”
भारत में हालात कब सामान्य होंगे?
गोयल के मुताबिक़ “ये बात समझना सबसे ज़रूरी है कि अर्थव्यवस्था का लगभग 25 प्रतिशत संकुचन मुख्य रूप से केवल दो महीनों के लिए था, ये एक अस्थायी स्थिति थी. जून ने गतिविधियां फिर शुरू हो गई थीं.”
वो कहती हैं, “मॉल, रिटेल, सर्विस सेक्टर के लिए वापसी करना आसान नहीं होगा लेकिन हमारे सामने नए अवसर भी हैं. ग्रोथ रिकवर करेगी. मैन्युफैक्चरिंग में ग्रोथ हो रही है, फार्मा और फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स यानी एफ़एमसीजी जैसे उद्योगों में भी ग्रोथ देखने को मिली है.”
“जब तक ये बीमारी हमारे आस-पास है, तब तक पूरी तरह अनलॉक नहीं होगा. इसलिए 31 मार्च 2021 तक हमारी ओवरऑल ग्रोथ नेगेटिव रह सकती है. लेकिन हां, ज़्यादातर अनुमानों में हमारी ग्रोथ अगले साल 6-7 प्रतिशत रहने की बात कही गई है.”
“दो चीज़ें हमारे पक्ष में हैं – सरकार लंबे वक़्त के लिए सुधार कर रही है और हमारी प्रति व्यक्ति आय जो अपेक्षाकृत कम है और इसके बढ़ने की गुंजाइश है. मुझे नहीं लगता हमें रफ़्तार पकड़ने में 3-5 साल लगेंगे. दो साल काफ़ी होने चाहिए.”
-BBC

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