म्यामांर में चीन के दखल को रोकने के लिए भारत बना रहा है रणनीति

नई दिल्‍ली। भारत की म्यांमार के साथ द्विपक्षीय संबंध मजबूत बनाने के पीछे एशिया में चीन की चुनौती से निपटने की योजना भी है। म्यांमार अपने पहले सबमरीन को जल्द ही बेड़े में शामिल करने जा रहा है। यह सबमरीन भारत की ओर से औपचारिक तौर पर सौंपी जाएगी। म्यामांर में चीन के दखल को रोकने के लिए भारत अपनी रणनीति पर काम कर रहा है। रूसी तकनीक वाले आईएनएस सिंधुवीर को सौंपना भारत की इसी रणनीति का हिस्सा है।
आईएनएस सिंधुवीर की पुराना, लेकिन तकनीक से लैस
3,000 टन का आईएनएस सिंधुवीर 31 साल पुराना जरूर है, परंतु रूस और भारत दोनों ही जगहों पर इसकी लगातार मरम्मत की गई है। इस लिहाज से आईएनएस सिंधुवीर नई तकनीक से लैस है और इसकी उपयोगिता बनी हुई है। हाल ही में विशाखापट्टनम में हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड में इसमें डीजल इलेक्ट्रिक बोट के आधुनिकीकरण पर काम किया गया है।
नाविकों को INS सिंधुवीर के जरिए ट्रेंड करेगा म्यांमार
भारतीय नौसेना की ओर से इस मुद्दे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है किंतु सूत्रों का कहना है कि म्यांमार की ओर से आईएनएस सिंधुवीर का प्रयोग अपने नाविकों को ट्रेंड करने के लिए करेगा। म्यामांर अपने नाविकों को इस पानी के अंदर कॉम्बैट ऑपरेशन की ट्रेनिंग इसके जरिए देगा। मार्च-अप्रैल 2020 से इसकी शुरुआत हो सकती है।
बांग्लादेश की चीन के साथ बढ़ रही सैन्य साझेदारी
म्यांमार की योजना ऐसे कुछ और किलो-क्लास सबमरीन सिंधुघोष खरीदने की योजना है। म्यामांर ने भारत से सबमरीन खरीदने का फैसला 2016 में बांग्लादेश द्वारा चीन से दो मिंग क्लास डीजल इलेक्ट्रिक सबमरीन खरीदने के बाद लिया गया। बांग्लादेश भी चीन के साथ सैन्य सहयोग लगातार बढ़ा रहा है। बांग्लादेश की योजना कॉक्स बाजार में चीन के साथ मिलकर एक सबमरीन बेस की स्थापना का भी है।
म्यांमार के सैनिकों को भारत में मिल रही ट्रेनिंग
म्यांमार को सबमरीन सौंपने के साथ ही भारत इसके नाविकों के लिए ट्रेनिंग की भी व्यवस्था कर रहा है। म्यामांर के नाविकों को भारतीय नौसेना की ओर से विशाखापट्टनम में आईएनएस सतवाहन में ट्रेनिंग दी जा रही है। सूत्रों का कहना है कि पिछले कुछ सालों से लगातार रंगून में भी नौसेना मोबाइल ट्रेनिंग टीम भेज रही है, जहां नाविकों को खास प्रशिक्षण दिया जाता है।
-एजेंसियां

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