भारत अकेला नहीं, 23 देशों से चल रहा है चीन का सीमा विवाद

भारत-चीन के बीच सीमा विवाद काफी पुराना है। चीन की विस्तारवाद की नीति किसी से छिपी नहीं है। ऐसा नहीं है कि चीन का सीमा विवाद सिर्फ भारत से ही हो बल्कि दुनियाभर के तमाम मुल्कों से है। चीन अपनी सरहदों को मनमाफिक अंदाज से आगे बढ़ाना चाहता है। जिसका खामियाजा भी उसको भुगतना पड़ता है लेकिन वो अपनी हरकतों से बाज नहीं आता है।
चीन इस तरह की सीनाजोरी भारत के साथ नहीं करता बल्कि उससे दुनिया के 23 देश परेशान हैं। दुनिया की सबसे ज्यादा जनसंख्या वाला और क्षेत्रफल में दुनिया का तीसरे नंबर का देश चीन ऐक ऐसा देश है जो अपने इर्द गिर्द 14 देशों से सीमाओं को शेयर करता है लेकिन चीन का दावा है कि उसके देश की सीमाएं 23 देशों तक हैं। चीन से महज भारत नहीं 23 मुल्क परेशान हैं।
ब्रुनेई-कंबोडिया और इंडोनेशिया पर भी दावा
दक्षिण चीन सागर में कुछ तटीय द्वीपों पर ब्रुनेई का कब्जा रहा है। हालांकि, चीन को लगता है यह उसका इलाका है। मिंग राजवंश (1368-1644) कंबोडिया तक फैला हुआ था। इस आधार पर चीन गाहे-बगाहे कंबोडिया पर अपना अधिकार जताने से बाज नहीं आता। दक्षिण चीन सागर के कुछ इलाकों पर इंडोनेशिया का अधिकार है। चीन का कहना है कि यह पूरा इलाका उसका है।
इन देशों के साथ भी सीमा विवाद
इन सबके अलावा रूस के साथ लगती हुई 1,60,000 वर्ग किलोमीटर की सीमा पर चीन अपनी दावेदारी जता चुका है। दोनों देशों के बीच कई समझौते हो चुके हैं, लेकिन अब तक कोई नतीजा नहीं निकल सका है। ताइवान चीनी गणराज्य का हिस्सा है। ताइवान इस बात का पुरजोर विरोध करता रहा है। सिंगापुर के साथ चीन का विवाद दक्षिण चीन सागर को लेकर ही है। चीन यहां मछली मारने को लेकर कई बार सिंगापुर से अपनी आपत्ति दर्ज करा चुका है।
पाकिस्तान से सीमा विवाद
चीन और पाकिस्तान में भले ही गहरी दोस्ती हो मगर दोनों के बीच सीमा विवाद भी चला आ रहा है। चीन और पाकिस्तान दोनों भारत को घेरने के लिए एक दूसरे की गलत बातों का भी समर्थन करते हैं लेकिन दोनों देशों के बीच खुद सीमा विवाद है। जिस तरह से चीन इकॉनामिक कॉरिडोर बना रहा है। वो आने वाले वक्त में पाकिस्तान के सबसे बड़ा नुकसान साबित होगा। चीन अगर अपनी चाल में सफल हो गया तो पाकिस्तान का बड़ा हिस्सा चीन के आधिपत्य में होगा।
वियतनाम-चीन विवाद
चीन का वियतनाम के साथ युद्ध भी हो चुका है। चीन के मुताबिक वियतनाम पर भी उसका हक है, क्योंकि एक समय चीन के मिंग राजवंश (1368-1644) का यहां शासन रहा था।
चीन-बर्मा सीमा विवाद
बर्मा-चीन का सीमा विवाद काफी लंबे अरसे से चल रहा था। 1271 से 1368 के बीच चीन के युआन राजवंश के समय बर्मा चीन का हिस्सा हुआ करता था। उसी इतिहास को आधार मानकर चीन बर्मा के एक बड़े भूभाग पर अपनी दावेदारी दिखाता है।
चीन-नेपाल के बीच सीमा विवाद
कुछ दिनों पहले ही भारत के हिस्से को नेपाल ने अपने नक्शे में पेश किया था। भारत और नेपाल के बहुत ही मधुर संबंध हैं। कहा तो ये भी जा रहा है कि नेपाल को चीन उकसा रहा है। नेपाल के बड़े हिस्से पर चीन की दावेदारी रही है। यह दावेदारी वर्ष 1788-1792 चीन-नेपाल युद्ध के समय से चली आ रही है। चीन के मुताबिक, नेपाल तिब्बत का हिस्सा है। इस हिसाब से यह चीन का हिस्सा हुआ।
भारत के साथ सीमा विवाद
भारत और चीन के बीच काफी पुराना सीमा विवाद चला आ रहा है। भारत के तमाम हिस्सों पर चीन अपना दावा करता रहा है। दोनों देश 1962 में एक बार युद्ध भी लड़ चुके हैं लेकिन इस विवाद का समापन नहीं हुआ है। जम्मू-कश्मीर से लेकर सिक्किम, अरूणांचल प्रदेश, तक के इलाकों पर चीन अपनी धौंस दिखाता रहा है। चीन दावा करता है कि मैकमोहन रेखा के जरिए भारत ने अरुणाचल प्रदेश में उसकी 90 हजार वर्ग किलोमीटर जमीन दबा ली है। भारत इसे अपना हिस्सा बताता है। हिमालयी क्षेत्र में सीमा विवाद को निपटाने के लिए 1914 में भारत तिब्बत शिमला सम्मेलन बुलाया गया।
समझौते के बाद भी अफगानिस्तान के साथ सीमा विवाद
भारत के साथ-साथ चीन का अफगानिस्तान के भी साथ सीमा विवाद बहुत पुराना है। वर्ष 1963 में समझौते के बावजूद चीन अफगानिस्तान के बड़े भूभाग पर अपना आधिपत्य जताता है। चीन यहां समय समय पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराता है और इन इलाकों को अपना बताता है।
किर्जिगिस्तान पर भी चीन का दावा
चीन का दावा है कि किर्जिगिस्तान के बड़े हिस्से पर उसका अधिकार है, क्योंकि 19वीं सदी में उसने इस भूभाग को उसने युद्ध में जीता था। इसके साथ ही चीन का अपने सीमावर्ती कजाखस्तान के साथ भी सीमा विवाद है। हालांकि, हाल ही में दोनों देशों के बीच समझौते हुए हैं वे चीन के पक्ष में गए हैं।
चीन का साउथ कोरिया पर भी दावा
चीन की विस्तारवादी नीति सिर्फ भारत के साथ ही नहीं है। दक्षिण कोरिया पूर्वी चीन सागर में कई इलाकों पर लंबे समय से अपना कब्जा जमाए हुए है। हालाकं, चीन का कहना है कि पूरे दक्षिण कोरिया पर उसका हक है। यहां उसने ऐतिहासिक तथ्यों का हवाला दिया है, जिसमें कहा गया है कि दक्षिण कोरिया पर चीन के युआन राजवंशन का शासन रहा था। उत्तर कोरिया के जिन्दाओ इलाके पर अपनी दावेदारी पेश करता रहा है। यहां भी वह ऐतिहासिक तथ्यों की बात करता है।
भूटान के बड़े भूभाग पर चीन का दावा
भूटान के एक बड़े भूभाग पर चीन ने दावेदारी ठोक रखी है। चीन यहां तेजी से सड़को का निर्माण कर रहा है। इतना ही नहीं उसने यहां इंटरनेशनल बार्डर पर बंकर तक बना रखे है। वो लगातार इस क्षेत्र को अपना बताता है। भूटान के साथ भारत का बहुत मधुर संबंध है और भारत भूटान की हर तरह की मदद भी करता है।
चीन का तजाकिस्तान पर दावा
चीन के मुताबिक तजाकिस्तान पर चीन के किंग राजवंश (1644-1912) का शासन रहा है। इस लिहाज से तजाकिस्तान पर उसका हक है। चीन समय-समय पर यहां पर भी उकसावे भरी हरकतें करता रहता है।
-एजेंसी

50% LikesVS
50% Dislikes

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *