नागरिकता कानून पर भारत ने पाकिस्‍तान को दिया कड़ा जवाब

नई दिल्‍ली। भारत सरकार ने बुधवार को जेनेवा में नागरिकता संशोधन क़ानून पर कहा कि भारत ने दुनिया भर के शरणार्थियों का स्वागत किया है. भारत ने ये भी कहा कि वो “लोकतांत्रिक तरीके और पूरी प्रक्रिया” के साथ समस्या से निपट रहा है.
फर्स्ट ग्लोबल रिफ्यूजी फ़ोरम को जारी किए एक बयान में संयुक्त राष्ट्र के लिए भारत के स्थाई प्रतिनिधि राजीव के चंद्र ने कहा, “पाकिस्तान मानवाधिकारों का स्वघोषित चैंपियन है, जिसने सख्त ईशनिंदा क़ानून, उत्पीड़न, दुर्व्यवहार और जबरन धर्मांतरण करके अपने अल्पसंख्यक समुदाय को 1947 से 23 प्रतिशत से घटाकर तीन प्रतिशत पर ला दिया है.”
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने मंगलवार को कहा था कि कश्मीर में “कर्फ्यू” और नए नागरिकता क़ानून की वजह से लाखों मुसलमान भारत छोड़ देंगे.
क्या बोले इमरान ख़ान?
असम में भारत सरकार ने ‘सिटिज़न रजिस्ट्रेशन एक्ट’ लागू किया है. इसके अनुसार राज्य के सभी नागरिकों को अपनी नागरिकता साबित करनी होगी. म्यांमार में भी नस्लीय संहार शुरू होने से पहले यही किया गया था. वहाँ भी मुसलमानों को अपनी नागरिकता साबित करने के लिए कहा गया था.
भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम में भी क़रीब बीस लाख लोगों को जिनमें अधिकतर मुसलमान हैं, उन्हें साबित करना होगा कि वो भारत के नागरिक हैं.
भारत के एक केंद्रीय मंत्री के अनुसार वर्ष 2024 तक यह एक्ट पूरे भारत में लागू किया जाना है.
इसके अलावा भारत में एक और एक्ट पास हुआ है जिसके अनुसार पाकिस्तान, अफ़गानिस्तान और बांग्लादेश का कोई भी नागरिक जिसे धर्म के आधार पर खदेड़ा गया हो, वो भारत में नागरिकता के लिए आग्रह कर सकता है लेकिन मुसलमानों को इससे बाहर रखा गया है.
अब आप इन दोनों क़ानूनों को साथ में रखकर देखिए और सोचिए कि इन्हें अगर साथ में प्रयोग किया गया तो क्या होगा? जब ‘सिटिज़न रजिस्ट्रेशन एक्ट’ के तहत सभी को अपनी नागरिकता साबित करनी होगी, तब क्या होगा?
इस तथ्य को कैसे भुलाया जा सकता है कि भारत में बीस करोड़ मुसलमान हैं. इनमें से जो भी अपनी नागरिकता साबित नहीं कर पाएगा, उसकी नागरिकता नहीं बचेगी.
अगर बीस करोड़ मुसलमानों में से दो परसेंट भी अपनी नागरिकता साबित करने में असफल रहे तो वो कहाँ जाएंगे.
इसीलिए भारत में इन क़ानूनों का विरोध हो रहा है. लोग सड़कों पर हैं और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को भी इस पर ध्यान देना चाहिए क्योंकि अगर स्थिति बिगड़ी तो उसे संभाल पाना मुश्किल होगा.
हमें लगता है कि ऐसी स्थिति में पाकिस्तान पर बड़ा बोझ पड़ेगा. हम अपने लोगों को बेहतर बुनियादी सुविधाएं देने की कोशिश कर रहे हैं.
प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कहा कि पाकिस्तान में पहले से तीस लाख शरणार्थी बसे हुए हैं इसलिए वो और शरणार्थियों को जगह नहीं दे पाएंगे.
इससे पहले इमरान ख़ान ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से अपील करते हुए ये भी कहा कि वो कश्मीर मुद्दे पर ग़ौर फ़रमाएं और इस बात पर विचार करें कि लाखों की फ़ौज के बीच नज़रबंद कश्मीरी आवाम किन हालात में जीवन बसर कर रहा होगा.
-BBC

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