चीन को माकूल जवाब देने के लिए भारत पूरी तरह तैयार, कूटनीतिक के साथ ही रणनीतिक प्लान भी बनाया

नई दिल्‍ली। पूर्वी लद्दाख सीमा पर आक्रामक तेवर दिखा रहे चीन को माकूल जवाब देने की भारत ने पूरी तैयारी कर ली है। चीन के खिलाफ कूटनीतिक के साथ ही रणनीतिक प्लान भी तैयार है। आज चल रही आर्मी कमांडर्स कॉन्फ्रेंस में चीन सीमा पर डटे कमांडर्स अपना प्लान सामने रखेंगे। इस कॉन्फ्रेंस में चीन पर जवाबी एक्‍शन का खाका खिंचेगा।
इससे पहले कल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के सुरक्षा चक्र के ‘टॉप 5’ से बातचीत की। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत और तीनों सेनाओं के प्रमुख इस बातचीत में शामिल थे।
आर्मी कमांडर्स की बैठक साल में दो बार होती है। इसमें सेना के सातों कमांड के अफसर भाग लेते हैं। चीन से सटी उत्तरी और पूर्वी कमांड के सैन्य अधिकारी भी इस कॉन्फ्रेंस का हिस्सा हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि आक्रामक तेवर दिखा रहे चीन के खिलाफ रणनीति तय होगी। सभी सैन्य अधिकारी इसमें प्रजेंटेशन के जरिए बॉर्डर का हाल सामने रखेंगे और भारतीय सैनिकों ने क्या कदम उठाया है, इसकी जानकारी देंगे।
एक इंच पीछे नहीं हटेगा भारत, बाज आए चीन
पीएम मोदी संग CDS, NSA और सेना प्रमुखों की मीटिंग का एजेंडा वैसे तो मिलिट्री रिफॉर्म्‍स और भारत की लड़ाकू क्षमता को बढ़ाने पर था मगर चीन की लद्दाख में हरकत ने मीटिंग का रुख मोड़‍ दिया।
सूत्र बताते हैं कि अधिकारियों ने पीएम मोदी को लद्दाख के ताजा हालात से रूबरू कराया। यह तय हुआ है कि बॉर्डर पर जो डेवलपमेंट के काम चल रहे हैं, वे नहीं रुकेंगे। चीन ने निर्माण रोकने की शर्त रखी है जिसे भारत मानने को तैयार नहीं। भारत ने चीन से साफ कहा है कि वह बॉर्डर पर यथास्थिति बनाए रखे।
हर डेवलपमेंट पर है NSA की नजर
CDS ने तीनों आर्मी के चीफ को साथ लेकर पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से भी मुलाकात की थी। पैंगोंग झील, गलवां घाटी, डेमचोक और दौलब बेग ओल्‍डी में भारत और चीन के सैनिक भिड़े हैं। NSA अजीत डोभाल ने लगातार LAC पर हुए डेवलपमेंट्स पर नजर रखी है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक उत्‍तरी सिक्किम और उत्‍तराखंड में बॉर्डर पर पिछले दिनों जो भी हलचल हुई है, डोभाल ने उसके बारे में पीएम मोदी को बताया है।
लद्दाख में एक्‍स्‍ट्रा फोर्स तैनात
भारतीय सेना ने लद्दाख में बॉर्डर से सटे कई सेक्‍टर्स में प्रजेंस बढ़ा दी है ताकि चीन कोई उलटी हरकत ना कर सके। चीन ने LAC पर बड़ी तेजी से कंस्‍ट्रक्‍शन शुरू किया है और टेंट वगैरह गाड़ दिए थे। भारत ने भी पैंगोंग झील और गलवां घाटी में चीन को उसी तरह जवाब दिया है। दौलत बेग ओल्‍डी में सेना की 81 और 114वीं ब्रिगेड तैनात है।
भारत से क्‍यों चिढ़ा चीन?
भारत LAC के ऊंचाई वाले विवादित क्षेत्रों में रोड और एयर कनेक्टिविटी के मामले में चीन के दबदबे को लगातार चुनौती दे रहा है। पूर्वी लद्दाख में चीन के तनाव बढ़ाने वाली हरकतों के पीछे भारत का बॉर्डर इन्फ्रास्ट्रक्चर के मामले में आक्रामक होना है। 255 किलोमीटर लंबे दारबुक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी (DBO) यानी DSDBO रोड पर 37 पुलों का निर्माण हुआ है। भारत ने सीमाई इलाकों में एयर फोर्स के लिए जरूरी इन्फ्रास्ट्रक्चरों को और मजबूत करने की दिशा में अच्छी प्रगति की है।
फॉरवर्ड एयरबेसों को मजबूत करने की दिशा में अच्छी प्रगति
भारत ने सीमाई इलाकों में एयर फोर्स के लिए जरूरी इन्फ्रास्ट्रक्चरों को और मजबूत करने की दिशा में अच्छी प्रगति की है। पूर्वी लद्दाख के न्योमा, डीबीओ और फकचे के साथ-साथ अरुणाचल प्रदेश के पासीघाट, मेचुका, वैलोंग, तुतिंग, अलोंग और जिरो में पुराने अडवांस लैंडिंग ग्राउंड्स (ALGs) को न सिर्फ री-ऐक्टिवेट कर दिया गया है बल्कि उन्हें अपग्रेड भी किया गया है। अब यहां सी-17 ग्लोबमास्टर-3 और सी-130 जे सुपर हरक्युलिस एयरक्राफ्ट भी लैंड करने लगे हैं। इससे जरूरत पड़ने पर भारत अब एलएसी पर तेजी से सैनिकों और सैन्य उपकरणों को मूव कर सकता है। उदाहरण के तौर पर दौलत बेग ओल्डी में भारत ने 16,614 फीट की ऊंचाई पर ALG बनाया है जो दुनिया में सबसे ज्यादा ऊंचाई पर बनी हवाई पट्टी है।
तिब्बत में ही चीन के 14 एयरबेस, एयरक्राफ्ट की पार्किंग के लिए बना रहा सुरंगें
बात अगर चीन की करें तो उसने बॉर्डर पर मिलिटरी इन्फ्रास्ट्रक्चर का एक जाल तैयार कर चुका है। उदारण के तौर पर तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में 14 एयरबेस बना चुका है। विशाल रेल नेटवर्क और 58,000 किलोमीटर लंबी सड़कों के जाल को तैयार कर चुका है। चीन अब अपने फाइटरजेट्स की पार्किंग के लिए कुछ एयरबेसों के पास पहाड़ खोदकर सुरंग बना रहा है।
-एजेंसियां

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