सिंधु जल Treaty पर भारत व पाक फिर करेंगे बातचीत

नई दिल्‍ली। पाकिस्‍तान के अखबार डॉन में आज छपे एक समाचार के अनुसार भारत और पाकिस्‍तान लाहौर में सिंधु जल Treaty के विभिन्न आयामों पर बुधवार से फिर अपनी बातचीत शुरू करेंगे।

समाचार पत्र डॉन ने एक सरकारी अधिकारी के हवाले से खबर दी है कि प्रधानमंत्री इमरान खान के कार्यभार संभालने के बाद पहली द्विपक्षीय वार्ता के तहत भारत और पाकिस्तान बुधवार को लाहौर में सिंधु जल Treaty के विभिन्न आयामों पर फिर से अपनी बातचीत शुरू करेंगे।

भारत के सिंधु जल आयुक्त पीके सक्सेना के बुधवार को उनके पाकिस्तानी समकक्ष सैयद मेहर अली शाह के साथ दो दिवसीय बातचीत के लिए आज यहां पहुंचने की संभावना है।

भारत-पाकिस्तान के स्थायी सिंधु आयोग की पिछली बैठक मार्च में नई दिल्ली में आयोजित की गयी थी। इस दौरान दोनों पक्षों ने 1960 की सिंधु जल संधि के तहत जल बहाव और इस्तेमाल किये जाने वाले पानी की मात्रा पर ब्यौरा साझा किया था।

इमरान खान के 18 अगस्त को प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच यह पहली अधिकारिक वार्ता होगी।

पाकिस्तान के 22वें प्रधानमंत्री बनने पर खान को लिखे पत्र में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दोनों देशों के बीच अच्छे पड़ोसियों के संबंध बनाने का भारत का संकल्प व्यक्त किया था।

मोदी ने 30 जुलाई को फोन कर खान को उनकी पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ की जीत पर मुबारकबाद दी थी और उम्मीद व्यक्त की थी कि दोनों देश द्विपक्षीय संबंधों में एक नये अध्याय की शुरूआत करने के लिए काम करेंगे।

पाकिस्तानी पक्ष 29-30 अगस्त को निर्धारित दो दिवसीय बातचीत के दौरान भारत द्वारा बनाई गयी दो जल संग्रहण और पनबिजली परियोजनाओं पर अपनी आपत्तियां फिर से दर्ज करा सकता है।

अधिकारी ने बताया कि पाकिस्तान चेनाब नदी पर 1000 मेगावॉट पाकुल डुल और 48 मेगावॉट लोअर कलनई पनबिजली परियोजनाओं पर अपनी चिंताएं व्यक्त करेगा।

अधिकारी ने बताया कि दोनों पक्ष स्थायी सिंधु आयोग पर भविष्य में होने वाली बैठकों का कार्यक्रम और सिंधु आयुक्तों की टीमों के दौरों को भी निर्धारित करेंगे।

उन्होंने कहा पाकिस्तान और भारत के जल आयुक्तों की साल में दो बैठकें होती हैं और परियोजना स्थलों की तकनीकी यात्राओं की व्यवस्था करनी होती है। हालांकि समयबद्ध बैठकों और यात्राओं को लेकर पाकिस्तान को कई सारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

दो दिवसीय Treaty बैठक में नदियों पर जलीय आंकड़ों को समय पर और सुचारू रूप से साझा करने के तौर-तरीकों और साधनों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।
-एजेंसी

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