CII के वार्षिक सत्र में पीएम मोदी ने कहा, हां… हम अपनी विकास दर दोबारा हासिल कर लेंगे

नई दिल्‍ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को भारतीय उद्योग परिसंघ CII के वार्षिक सत्र को संबोधित किया। CII की स्थापना 1895 में हुई थी और यह संगठन 125 साल पूरे कर चुका है। पीएम मोदी ने इस अवसर पर बताया कि कोरोना वायरस और लॉकडाउन के बाद अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए सरकार की पूरी योजना क्या है। पीएम ने कहा, ये भी इंसान की सबसे बड़ी ताकत होती है कि वो हर मुश्किल से बाहर निकलने का रास्ता बना ही लेता है। आज भी हमें जहां एक तरफ इस Virus से लड़ने के लिए सख्त कदम उठाने हैं वहीं दूसरी तरफ इकोनॉमी का भी ध्यान रखना है।

Speaking at the #CIIAnnualSession2020, Hon'ble PM  @narendramodi  outlined the three key enablers for #AatmanirbharBharat.
Speaking at the #CIIAnnualSession2020, Hon’ble PM
@narendramodi outlined the three key enablers for #AatmanirbharBharat.

पीएम मोदी ने कहा, हमें एक तरफ देशवासियों का जीवन भी बचाना है तो दूसरी तरफ देश की अर्थव्यवस्था को भी स्टेबलाइज करना है, स्पीड अप करना है। इस स्थिति में आपने “Getting Growth Back” की बात शुरू की है और निश्चित तौर पर इसके लिए आप सभी, भारतीय उद्योग जगत के लोग बधाई के पात्र हैं। बल्कि मैं तो Getting Growth Back से आगे बढ़कर ये भी कहूंगा कि Yes ! We will definitely get our growth back. (हां… हम अपनी विकास दर दोबारा हासिल कर लेंगे)
पढ़िए पीएम मोदी के संबोधन की बड़ी बातें
आप लोगों में से कुछ लोग सोच सकते हैं कि संकट की इस घड़ी में, मैं इतने आत्मविश्वास से ये कैसे बोल सकता हूं? मेरे इस Confidence के कई कारण है।
मुझे भारत की क्षमताएं और क्राइसिस मैनेजमेंट पर भरोसा है। मुझे भारत के टेलेंड और टेक्नोलॉजी पर भरोसा है। मुझे भारत के इनोवेशन और इंटेलेक्ट पर भरोसा है। मुझे भारत के फार्मर्स , MSME’s, इंटरप्रेन्यॉर पर भरोसा है।
कोरोना ने हमारी स्पीड जितनी भी धीमी की हो लेकिन आज देश की सबसे बड़ी सच्चाई यही है कि भारत, लॉकडाउन को पीछे छोड़कर Un-Lock फेज वन में इंटर कर चुका है। Un-Lock फेज वन में इकोनॉमी का बहुत बड़ा हिस्सा खुल चुका है।
आज ये सब हम इसलिए कर पा रहे हैं क्योंकि जब दुनिया में कोरोना वायरस पैर फैला रहा था तो भारत ने सही समय पर, सही तरीके से सही कदम उठाए। दुनिया के तमाम देशों से तुलना करें तो आज हमें पता चलता है कि भारत में lockdown का कितना व्यापक प्रभाव रहा है।
कोरोना के खिलाफ इकोनॉमी को फिर से मजबूत करना, हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक है। इसके लिए सरकार जो फैसले अभी तुरंत लिए जाने जरूरी हैं, वो ले रही है। और साथ में ऐसे भी फैसले लिए गए हैं जो लॉन्ग टर्न में देश की मदद करेंगे।
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना ने गरीबों को तुरंत लाभ देने में बहुत मदद की है। इस योजना के तहत करीब 74 करोड़ लाभार्थियों तक राशन पहुंचाया जा चुका है। प्रवासी श्रमिकों के लिए भी फ्री राशन पहुंचाया जा रहा है।
महिलाएं हों, दिव्यांग हों, बुजुर्ग हों, श्रमिक हों, हर किसी को इससे लाभ मिला है। लॉकडाउन के दौरान सरकार ने गरीबों को 8 करोड़ से ज्यादा गैस सिलेंडर डिलिवर किए हैं- वो भी मुफ्त।
भारत को फिर से तेज़ विकास के पथ पर लाने के लिए, आत्मनिर्भर भारत बनाने के लिए 5 चीजें बहुत ज़रूरी हैं।
Intent, Inclusion, Investment, Infrastructure और Innovation। हाल में जो Bold फैसले लिए गए हैं, उसमें भी आपको इन सभी की झलक मिल जाएगी।
हमारे लिए रिफोर्म कोई रेंडम या स्कैटर्स डिसिजन नहीं हैं। हमारे लिए reforms systemic, planned, integrated, inter-connected और futuristic process है। हमारे लिए रिफोर्म का मतलब है फैसले लेने का साहस करना, और उन्हें लॉजिकल कंक्लुजन तक ले जाना।
सरकार आज ऐसे पॉलिसी रिफॉर्म भी कर रही है जिनकी देश ने उम्मीद भी छोड़ दी थी। अगर मैं कृषि सेक्टर की बात करूं तो हमारे यहां आजादी के बाद जो नियम-कायदे बने, उसमें किसानों को बिचौलियों के हाथों में छोड़ दिया गया था।
हमारे श्रमिकों के कल्याण को ध्यान में रखते हुए, रोजगार के अवसरों को बढ़ाने के लिए लेबर रिफॉर्म्स भी किए जा रहे हैं। जिन नॉन-स्ट्रेटजिक सेक्टर्स में प्राइवेट सेक्टर को इजाजत ही नहीं थी, उन्हें भी खोला गया है।
सरकार जिस दिशा में बढ़ रही है, उससे हमारा माइनिंग सेक्टर हो, एनर्जी सेक्टर हो, या रिसर्च और टेक्नॉलोजी हो, हर क्षेत्र में इंडस्ट्री को भी अवसर मिलेंगे, और यूथ के लिए भी नए अवसर खुलेंगी। इस सबसे भी आगे बढ़कर, अब देश के स्ट्रेटजिक सेक्टर्स में भी प्रायवेट प्लेयर्स की भागीदारी एक रियल्टी बन रही है।
आप चाहे स्पेस सेक्टर में निवेश करना चाहें, अटॉमिक एनर्जी में नए अवसर को तलाशना चाहें, संभावनाएं आपके लिए पूरी तरह से खुली हुई है।
MSMEs की परिभाषा स्पष्ट करने की मांग लंबे समय से उद्योग जगत कर रहा था, वो पूरी हो चुकी है। इससे MSMEs बिना किसी चिंता के विकास कर पाएंगे और उनको MSMEs का स्टेट्स बनाए रखने के लिए दूसरे रास्तों पर चलने की ज़रूरत नहीं रहेगी।
स्वभाविक है कि इस समय नए सिरे से मंथन चल रहा है। और ऐसे समय में, भारत से दुनिया की अपेक्षा और बढ़ीं हैं। आज दुनिया का भारत पर विश्वास भी बढ़ा है और नई आशा का संचार भी हुआ है।
दुनिया को आज एक विश्वसनीय साझेदार की जरूरत है। भारत में यह क्षमता, ताकत है। आज पूरे विश्व में भारत के प्रति जो विश्वास पैदा हुआ है, उसका आप सभी को, भारत की इंडस्ट्री को पूरा फायदा उठाना चाहिए।
“Getting Growth Back” इतना मुश्किल भी नहीं है। और सबसे बड़ी बात कि अब आपके पास, भारतीय उद्योगों के पास साफ रास्ता है। आत्मनिर्भर भारत का मतलब है कि हम और ज्यादा ताकतवर होकर दुनिया को आत्मसात करेंगे।
अब जरूरत है कि देश में ऐसे Products बनें जो Made in India हों, Made for the World हों। कैसे हम देश का आयात कम से कम करें, इसे लेकर क्या नए लक्ष्य तय किए जा सकते हैं? हमें तमाम सेक्टर्स में productivity बढ़ाने के लिए अपने टार्गेट तय करने ही होंगे
मैं बहुत गर्व से कहूंगा कि सिर्फ 3 महीने के भीतर ही Personal Protective Equipment -PPE की सैकड़ों करोड़ की इंडस्ट्री आपने ही खड़ी की है। हमारी सरकार प्राइवेट सेक्टर को देश की विकास यात्रा का Partner मानती है। आत्मनिर्भर भारत अभियान से जुड़ी आपकी हर आवश्यकता का ध्यान रखा जाएगा। आपसे, सभी स्टेकहोल्डर्स से मैं लगातार संवाद करता हूं और ये सिलसिला आगे भी जारी रहेगा।
देश को आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प लें। इस संकल्प को पूरा करने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दें।
सरकार आपके साथ खड़ी है, आप देश के लक्ष्यों के साथ खड़े होइए।

-एजेंसियां

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