आगरा में जि‍ला आपदा प्रबंधन ने योजना क्रि‍यान्‍वयन में बरती ढील

आगरा। आपदा प्रबंधन भारत में हमेशा एक न एक कारण से चुनौती के रूप में सामने आता रहा है। कोवि‍ड-19 संक्रमण के फरवरी -2020 से शुरू हुए दौर में देश के अन्‍य भागों के समान ही आगरा जनपद और महानगर में भी जनजीवन बुरी तरह से प्रभावि‍त हुआ।

आर्थि‍क प्रक्रि‍याओं के पूरी तरह से टूटने से बचाने पर सरकार या जि‍ला प्रशासन की भूमि‍का को लेकर तो कुछ खास कहना उपयुक्‍त नहीं है क्‍योंकि इस सम्‍बन्‍ध में उसकी सीमा और अधि‍कार सशर्त एवं अति सीमि‍त होते हैं लेकि‍न संक्रमण की बनी हुई स्‍थि‍ति से नि‍पटने में अब तक प्रकट होती रही नाकामी अपने आप में इस बात का परि‍चायक है कि आपदा प्रबंधन के लि‍ये बना आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के तहत गठि‍त हुए उप्र राज्‍य आपदा प्रबधन पा्रधि‍करण के द्वारा संक्रमण प्रबंधन के लि‍ये अगर कोई योजना बनायी भी होंगी तो उनका जमीनी स्‍तर पर क्रि‍यान्‍वयन करने की कोयी तैयारी ही नहीं थी।

जि‍ला आपदा प्रबंधन
कोवि‍ड 2019 को नि‍यत्रि‍त करने के लि‍ये उ प्र शसन की ओर से 31 मार्च 2020 को सचि‍व राजस्‍व एवं राहत आयुक्‍त के स्‍तर से आपदा प्रबंधन कक्ष स्‍थापि‍त करने के लि‍ये शासनादेश जारी कि‍या गया। इसमें शासन से पूर्व में दि‍नांक 06मार्च2020 जारी कि‍या गये ( 9292रा.आ. का./ 2019-20), तथा 26मार्च2020 ( पत्र संख्‍या 900/ रा.आ./का./2019-20 मार्च 2020 ) को जारी पूर्व पत्रों के संदर्भ का उल्‍लेख जारी कर आपदा नि‍यंत्रण केन्‍द्र स्‍थापि‍‍त एवं संचालि‍त करने के लि‍ये 50हजार रुपये अवमुक्‍त कि‍ये गये।
इस पत्र के साथ ही वायरस जनि‍त संक्रामक के नि‍यंत्रण के लि‍ये उपाय शुरू करने तथा शासन के द्वारा कई बि‍न्‍दुओं पर रोज रि‍पोर्ट भेजे जान की अपेक्षा की गयी। शहर पहले अमेरि‍कन राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप के 24फरवरी को आगरा आगमन की तैयारि‍यां, उसके बाद 18फरवरी 2020 से 27 फरवरी 2020 तक चले ताज महेत्‍सव के समापन कार्यक्रम के समापन की तैयारियों में रही व्‍यस्‍तताओं के कारण संक्रमण को आगरा में वि‍स्‍तार पाने का भरपूर अवसर मि‍ला।

जैवि‍क संक्रमण आपदा से नि‍पटने के लि‍ये तैयारी नहीं
दरअसल राष्‍ट्रीय आपदा नि‍यंत्रण प्राधि‍करण की सूची में शामि‍ल अपदाओं की सूची नि‍यत्रण की सूची में दर्ज संक्रामक )जैविक आपदाओं में महामारी का फैलना, जंतुओं एवं जानवर के संक्रामक रोग, कीड़े अथवा अन्य जानवरों से फैलने वाले संक्रामण) को नि‍यंत्रि‍त करने के लि‍ये जनपद स्‍तार तक कोयी कार्ययोजना थी ही नहीं और अगर कोयी होगी भी तो उसकी जानकारी अति‍ सीमि‍त लोगो को ही रही होगी।

ताली बजने के साथ ही जेबें होने लगीं खाली
22 मार्च 2020 को तालीथाली बजाने के साथ शुरू हुए जनता को जोड़ने का प्रयास शीघ्र ही नागरि‍कों की सहभागि‍ता के स्‍थान पर मजबूरी बन गया। प्रशासन ने नागरि‍क संगठनों और राजनैति‍क सहभागि‍ता को सीमि‍त कर अभि‍यान लगभग सरकारी कर डाला। पुलि‍स का डंडा जब खूब जमकर चलने लगा तब राजनीति‍ज्ञों को लगने लगा कि अब जनता के बीच साख उखडने का नि‍र्णयक चरण शुरू हो चुका है।

जनप्रति‍नि‍धि तक रहे उपेक्षि‍त
जाहि‍र है जनपद के सभी जनप्रति‍नि‍धि‍यों ने प्रशासन के रवैय पर सख्‍त नाराजगी जताना शुरू कर दि‍या। हालांकि आहात तो अधि‍कांश जनप्रति‍नि‍धि थे कि‍न्‍तु अभि‍व्‍यक्‍ति की हि‍म्‍मत अंतत: मेयर नवीन जैन ही दि‍खा सके। इस पत्र के प्रत्‍यक्ष परि‍णाम तो नहीं आये कि‍न्‍तु जनप्रति‍नि‍धि‍यों के प्रति प्रशासनिक तंत्र की बेरूखी जरूर कम हुई। कि‍न्‍तु अब काफी देर हो चुकी है मंद‍िर मस्‍जि‍द , गुरुद्वारे और चर्च सभी का सहयोग और सदभावनायें रहने के बावजूद जनपद में न तो मौतें रुक सकीं और नहीं संक्रमण प्रभावि‍तों की संख्‍या में ही कमी आ सकी।

अर्थतंत्र पूरी तरह से टूटा
जनजीवन का अर्थतंत्र पूरी तरह से टूट गया। जूता कारोबार और टूरि‍ज्म जो कि आगरा के अर्थतंत्र का आधार है। पूरी तरह ध्‍वस्‍त हो गया है। अब हालात ये हैं कि जहां जनपद भर में कारोबार ठप हैं ,लोगों के पास बच्‍चों की फीस देने के पैसे नहीं हैं , सेवायोजकों के पास अपने कर्मचारि‍यों को देने के लि‍ये धन नहीं है। सरकार और प्रशासन की ओर से जो राशन वि‍तरण और इलाज के नाम पर कोरेनटाइन कि‍या जा रहा है। वह जनजीवन की नि‍रंतरता बनाये रखने के लि‍ये जरूरी तो है कि‍न्‍तु इसके लि‍ये नागरि‍कों को बेहद ऐसी अप्रि‍य स्थ‍ि‍ति‍यों का सामना करना पड़ता है वह अपने आप में सोचनीय है।

सिविल सोसाइटी ऑफ़ आगरा के हरव‍िजय बहिया ने कहा जब “आपदा प्रबंधन एक्ट २००५ है जो भारत के हर जिले तक लागू होता है तो आगरा में उस के तहत कार्य हुआ तो कहाँ कमी रह गयी। शिरोमणि सिंह -प्रेसिडेंट सिविल सोसाइटी ऑफ़ आगरा और नगर निगम पार्षद ने कहा – एक्ट २००५ में बना था, प्रदेश की सरकारों ने कभी इस पर ध्यान नहीं दिया। अगर आपदा प्रबंधन का कार्य होता तो हम प्रदेश में बेहतर सिथिति में होते। अभी भी वक्त है क‍ि हमें जल्द से जल्द इस का इन्तेजाम करना चाहिए। नगर निगमों की भी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है,उस के बारे में भी जनपद की आगरा नगर निगम से ले कर फतेहपुर सीकरी नगर पंचायत तक सभी निकायों को जानकारी देनी चाहिए।
सेक्रेटरी सिविल सोसाइटी ऑफ़ आगरा अनिल शर्मा ने कहा क‍ि एक्ट बनने के बाद पूरा सिस्टम है, लोग आपदा प्रबंधन को देखने के लिए हैं, एडवाइजर हैं, ऑफिस है और बजट भी होगा। सब कुछ होते हुए भी कहाँ चूक हुई यह देखना बहुत ज़रूरी है। अब तो हमारे पास करीब करीब २ महीने का आपदा प्रबंधन का महत्वपूर्ण तजुर्बा है। अगर हम अब भी नहीं सीख पाते तो बहुत शर्म की बात है।

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