इमरान को Lahore हाईकोर्ट से मिला झटका, एक सीट पर रिकाउंटिंग के आदेश

लाहौर। Lahore हाईकोर्ट ने शनिवार को पाकिस्तान चुनाव आयोग (ईसीपी) को इमरान खान की लाहौर के एनए-131 सीट से जीत की अधिसूचना जारी करने पर रोक लगा दी है।

Lahore हाईकोर्ट ने शनिवार को पाकिस्तान चुनाव आयोग (ईसीपी) को पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के चेयरमैन इमरान खान की लाहौर के एनए-131 सीट से जीत की अधिसूचना जारी करने पर रोक लगा दी है और इसके साथ ही रिटर्निंग ऑफिसर को सभी मतपत्रों को रिकाउंट करने का भी आदेश दिया है।

पाकिस्तान के प्रमुख अंग्रेजी अखबार ‘डॉन’ के रविवार के अंक में पहले पन्ने पर प्रकाशित एक खबर में बताया गया है कि उसी निर्वाचन क्षेत्र से लड़ रहे और दूसरे नंबर पर रहे पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) के उम्मीदवार ख्वाजा साद रफीक की याचिका पर न्यायमूर्ति मामून रशीद शेख ने इस आदेश को पारित किया है हालांकि डॉन से बातचीत के दौरान पीटीआई के वकील बाबर अवान ने यह भी कहा है कि जल्द ही वे लाहौर हाईकोर्ट के आदेश को चैलेंज करेंगे।

605 वोटों के अंतर से मिली थी जीत
खबर के मुताबिक 25 जुलाई के आम चुनाव में इमरान खान को लाहौर निर्वाचन क्षेत्र से विजयी उम्मीदवार घोषित किया गया था। चुनाव में इमरान खान को 84 हजार 313 वोट मिले थे जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंदी रहे ख्वाजा साद रफीक को कुल 83 हजार 633 वोट मिले थे जिसके बाद रफीक ने रिटर्निंग ऑफिसर से मतपत्रों की काउंटिंग फिर से करने के लिए कहा था क्योंकि वे चुनाव सिर्फ 680 मतों के अंतर से चुनाव हार रहे थे।

खबर में आगे बताया गया है कि रफीक की अपील के बाद रिटर्निंग अधिकारी ने केवल 2,832 रिजेक्टेड वोटों की ही दोबारा गिनती की और पीएमएल-एन उम्मीदवार के पूर्ण मतपत्र पत्रों की रिकाउंटिंग की अपील को दरकिनार कर दिया। खबर में दावा किया गया है कि रिकाउंटिंग के बाद करीब 200 खारिज वोटों को वैध घोषित कर दिया गया और इसके साथ रफीक की हार का मार्जिन 680 से 605 वोटों तक पहुंच गया।

कोर्ट में पूर्व मंत्री के वकील ने दिया ये तर्क
इसी वजह से बाद में, पूर्व मंत्री रफीक रिटर्निंग अधिकारी द्वारा पूर्ण पुनर्मतगणना के अपने आवेदन की बर्खास्तगी को चुनौती देने के लिए Lahore उच्च न्यायालय पहुंच गए। एलएचसी में शनिवार की सुनवाई के दौरान, रफीक के वकील आजम नाजीर तरार ने तर्क दिया कि रिटर्निंग अधिकारी ने सभी मतपत्रों की रिकाउंटिंग करने से इनकार कर याचिकाकर्ता के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किया था। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता का अनुरोध बहुत तार्किक और न्यायसंगत था क्योंकि जीत का मार्जिन बहुत ही कम था।

वकील ने यह भी तर्क दिया कि रिटर्निंग ऑफिसर चुनाव अधिनियम 2017 की धारा 95 (5) के तहत पुनर्मतगणना कराने के लिए बाध्य था, लेकिन उन्होंने अपनी शक्तियों का प्रयोग करने से इनकार कर दिया।

-एजेंसी

50% LikesVS
50% Dislikes

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *