HC का आदेश, बंटवारे के बाद भी पैतृक संपत्ति में बेटियों को बराबर का हक

अहमदाबाद। गुजरात हाई कोर्ट ने पैतृक संपत्ति में बेटियों के हक को लेकर महत्वपूर्ण आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि बंटवारे से जुड़ी याचिका में अगर प्राथमिक आदेश में संपत्ति को भाइयों के पक्ष में बराबर बांटे जाने का का भी फैसला दिया हो तो भी बेटियों को उनके हक से दूर नहीं किया जा सकता है।
यह मामला वलसाड जिले के नानकवाडा गांव में एक परिवार की संपत्तियों से संबंधित है। रतनजी मरफातिया और मणिबेन की मौत के बाद 1989 में उनके तीन बेटों ने संपत्ति के बंटवारे की याचिका डाली थी। 28 फरवरी 1995 को वलसाड सिविल कोर्ट ने तीनों भाइयों के बीच प्रॉपर्टी के बराबर बंटवारे का आदेश पारित किया था। बराबर हिस्से को सुनिश्चित करने के लिए एक कोर्ट कमिश्नर की नियुक्ति भी की गई।
पांच बहनों के कानूनी वारिसों की तरफ से संपत्ति में हिस्सेदारी की याचिका डाली गई, जिसे निचली अदालत ने रद्द कर दिया। ट्रायल कोर्ट ने मामले में प्राथमिक आदेश पारित होने का हवाला देते हुए याचिका को रद्द कर दिया। इसके बाद उन्होंने वकील चैतन्य जोशी के जरिये हाई कोर्ट का रुख किया।
हाई कोर्ट ने इस मामले में सभी पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुनाया। हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम में संशोधन के तहत कोर्ट ने पैतृक संपत्तियों में बेटियों की भी बराबर हिस्सेदारी सुनिश्चित की। कोर्ट ने फैसले में यह भी कहा कि भले ही प्राथमिक आदेश दिया जा चुका हो, लेकिन बेटियों को किसी भी स्टेज में लाभार्थी बनाया जा सकता है।
-एजेंसियां

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